रोहतास के एक अभ्यर्थी ने 2022 में सिविल कोर्ट में चपरासी पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन प्रवेश पत्र में उसके फोटो की जगह कुत्ते का फोटो लगा दिया गया। इससे ऑनलाइन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आई।
बिहार में पहले भी कई चौंकाने वाले मामले सामने आए—जैसे मतदाता सूची में “डॉग बाबू” का पहचान पत्र, शिक्षक भर्ती में अभ्यर्थी के फोटो की जगह अभिनेत्री अनुपमा परमेश्वरन की फोटो लगना, और राज्यपाल के नाम से परीक्षा प्रवेश पत्र जारी होना।
पेपर लीक, भर्ती विवाद और प्रशासनिक गड़बड़ियों के कारण बिहार की शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली और राज्य में पलायन जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए।
बिहार में एक युवक की सफलता शासन व्यवस्था में खामियों की भेंट चढ़ गई। हाल के वर्षों में देखा जाए तो बिहार में पेपर लीक का मामला काफी समय से चर्चा में था। अब युवक के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो गया है और प्रवेश पत्र में अभ्यर्थी के फ़ोटो की जगह कुत्ते का फ़ोटो लगा दिया गया।
बिहार के रोहतास जिले का रहने वाला युवक बिहार (Bihar) प्रशासन के ऑनलाइन प्रक्रिया में लापरवाही की भेंट चढ़ गया। दरअसल, अभ्यर्थी ने साल 2022 में बिहार में सिविल कोर्ट में चपरासी पद के लिए आवेदन किया था। इतने लंबे समय बाद जब प्रवेश पत्र जारी हुआ तो बच्चे के होश उड़ गए, क्योंकि प्रवेश पत्र (Admit Card) में अभ्यर्थी का फोटो नहीं था बल्कि उसकी जगह एक कुत्ते का फ़ोटो लगाया गया था। एक तरफ बिहार में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवक को इतने लंबे समय का इंतजार करना पड़ा, दूसरी तरफ बच्चे को प्रशासनिक लापरवाही का शिकार होना पड़ा।
बिहार में यह पहली प्रशासनिक लापरवाही नहीं है बल्कि अन्य अनेक अवसरों पर बिहार के प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया जा चुका है। जुलाई 2025 में चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया के तहत नए मतदाता सूची को तैयार किया था। चुनाव आयोग और भाजपा सरकार उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब एक कुत्ते का पूरा परिचय पत्र चर्चा में आया था। डॉग बाबू के नाम से बनाया गया यह पहचान पत्र था, जिसमें बाप का नाम कुत्ता बाबू और मां का नाम कुतिया देवी बताया गया था। इसमें पता के तौर पर मसौरी, वार्ड 15 दिखाया गया था। बाद में इस मामले पर कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने भाजपा और चुनाव आयोग की जमकर आलोचना की।
बिहार के जहानाबाद में, सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी करने वाले युवक ऋषिकेश कुमार ने बिहार के शिक्षक भर्ती परीक्षा को पास कर लिया। लेकिन बिहार के शिक्षा विभाग ने बच्चे को चयन सूची से बाहर कर दिया। केवल ऋषिकेश कुमार की बात नहीं है, बल्कि बिहार के लगभग सैकड़ों छात्रों को अंतिम रूप से चयन सूची से बाहर कर दिया था क्योंकि इन छात्रों द्वारा अंतिम रूप से जारी सूची के खिलाफ बयान दिया गया और मामले को चुनौती भी दीगई थी।
ऋषिकेश को केवल बाहर ही नहीं किया गया बल्कि बिहार शिक्षा आयोग द्वारा जारी परीक्षा परिणाम वाले पत्र पर से उसका फ़ोटो भी बदल दिया गया है। ऋषिकेश के स्थान पर दक्षिण भारतीय अभिनेत्री अनुपमा परमेश्वरन का चित्र लगा दिया गया।
बिहार में पिछले साल 2024-25 में बिहार लोकसेवा आयोग (BPSC) के खियाफ़ छात्रों ने लामबंद होकर पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन किया था।
वहीं एक और घटना बिहार की है कि साल 2022 में बिहार के राज्यपाल फागु चौहान के नाम से मिथिला विश्व विद्यालय के स्नातक द्वितीय तृतीय वर्ष के परीक्षा में प्रवेश पत्र जारी कर दिया गया।
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बिहार में पिछले 20 साल से नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के जुबान पर सिर्फ यही वाक्य चुनावी भाषण और मीडिया साक्षात्कार में अभिन्न हिस्सा बना रहा। सदन से लेकर चुनावी मैदान में नीतीश कुमार ने जनता से सिर्फ यही कहा, कुछ था जी पहले….कोई काम किया है ई सब….! लेकिन भाजपा और नीतीश कुमार के गठबंधन वाली सरकार ने अभी तक बिहार को पिछले 20 साल से भ्रष्टाचार और आपराधिक माहौल दिया है। आज भी बिहार में हालत यह है कि आय दिन सरकारी पुल गिरने की खबर मिलती रहती है। शिक्षा व्यवस्था का तो पूरी तरीके से बँटाधार कर दिया गया है।
पलायन बिहार की सियासत का एक मुद्दा है तो सवाल बनता है कि बिहार में 20 साल से भाजपा और जदयू की मिलीजुली सरकार ने आखिर ऐसा क्या कर दिया है कि जनता आज भी बिहार में रहना नहीं चाहती है।