तमिलनाडु चुनाव 2026 में बीजेपी ने एआईएडीएमके को बड़ा भाई मानकर उसके पक्ष में झुकाव दिखाया और चर्चित युवा नेता व पूर्व आईपीएस अन्ना मलाई को टिकट नहीं दिया। कोयंबटूर से 2024 लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद उनका कद और मेहनत चर्चा में रहे, पर इस बार टिकट कटने से स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराजगी और राजनीतिक समीकरणों पर असर की आशंका बढ़ गई है।
तमिलनाडु चुनाव 2026 में बीजेपी ने गठबंधन के साथी एआईएडीएमके के सामने घुटने टेक दिए हैं। बीजेपी इस चुनाव में बहुत पहले से मेहनत कर रही थी। तमिलनाडु बीजेपी में चर्चित युवा चेहरे के तौर पर अन्ना मलाई का नाम सबसे ऊपर आता है। इस बार तमिलनाडु चुनाव-2026 में बीजेपी ने अन्ना मलाई को टिकट नहीं दिया है। एक तरफ बीजेपी ने एआईएडीएमके को बड़ा भाई मानते हुए समर्थन दे दिया है दूसरी तरफ अन्ना मलाई को टिकट न मिलने पर स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी देखने को मिली।
अन्ना मलाई एक आईपीएस ऑफिसर थे। तमिलनाडु में बीजेपी का दामन थामने से पहले उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। 4 जून, 1984 को तमिलनाडु के करूर जिला में जन्में अन्ना मलाई ने पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी (कोयंबटूर) से इंजीनियरिंग और IIM लखनऊ से MBA किया है। 2011 में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल करके आईपीएस बने। इसके बाद कर्नाटक कैडर में बहुत समय तक सेवा की। राजनीति को अपना कार्यक्षेत्र बनाने के लिए मई 2019 में नौकरी से इस्तीफा दे दिए। साल 2020 में तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए अन्ना मलाई ने भाजपा का की सदस्यता ले ली। इसके बाद तमिलनाडु की राजनीति में उभरते चेहरे के तौर पर देखे जाने लगे। लोगों को उम्मीद थी की भाजपा तमिलनाडु में नए चेहरे को कमान सौंपकर राजनीति में नया चाल चल सकती है। लेकिन इस बार अन्ना मलाई को बीजेपी से टिकट नहीं मिला।
अन्ना मलाई नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं। नरेंद्र मोदी कई बार सार्वजनिक तौर पर ये बात बोल चुके हैं कि अन्ना मलाई तमिलनाडु की राजनीति में बीजेपी के लिए एक बड़ा चेहरा हैं। 2019 में नौकरी से त्यागपत्र देकर अन्ना मलाई ने 2020 में भाजपा की शरण ली। इसके बाद बीजेपी के लिए कड़ी मेहनत करते नजर आए थे। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अन्ना मलाई को तमिलनाडु के कोयंबटूर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से टिकट देकर मैदान में उतारा। इस चुनाव में उनके सामने डीएमके ने गणपति पी. राजकुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था। अन्ना मलाई को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। गणपति पी. राजकुमार ने उनको एक लाख अट्ठारह हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में अन्ना मलाई को हार मिली, इसके बावजूद तमिलनाडु में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ते दिखाई दिया। इस बार तमिलनाडु चुनाव-2026 में भाजपा ने अन्ना मलाई को टिकट नहीं दिया है इसका असर चुनाव में देखने को मिल सकता है।
तमिलनाडु में पिछले 10 साल में बहुत सारे युवा नेतृत्व उभरकर सामने आए। बीजेपी ने अन्ना मलाई को स्टार लीडर की तरह प्रस्तुत किया। अन्ना मलाई के अलावा डीएमके में उदयनिधि स्टालिन भी युवा चेहरा माने जाते हैं। डीएमके ने युवा वोटरों को साधने के लिए उदयनिधि स्टालिन को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। डीएमके के अलावा तमिलनाडु में विजय थलपती नया और बड़ा चेहरा माने जा रहे हैं। 4 मई 2026 को तमिलनाडु में यह स्थिति साफ हो जाएगा कि नए और युवा चेहरों में सबसे सबसे अधिक प्रभाव किसका पड़ा।
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