MCD के डिप्टी कमिश्नर अभिषेक मिश्रा और एक अन्य अधिकारी को CBI ने 4 लाख रुपये की घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया, कोर्ट ने दोनों को CBI हिरासत में भेजा।
CBI यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस भ्रष्टाचार में और भी अधिकारी शामिल हैं और क्या पहले भी इस तरह के घोटाले हुए हैं।
NCRB के मुताबिक 10 साल में 45,000 केस दर्ज हुए, हर साल औसतन 4,000 मामले, जो सिस्टम में गहराई तक फैली समस्या को दिखाते हैं।
कहते हैं आज़ाद भारत का पहला भ्रष्टाचार का मामला साल 1948 में आया था, जब जीप घोटाला हुआ था। उसके बाद से लेकर अब तक 2026 चल रहा है और अब तक हज़ार से ज्यादा ऐसे मामले देखने को मिल चुके हैं।
भारत में भ्रष्टाचार के मामलों को देखकर यह कह सकते हैं कि अब ये सरकारी बाबुओं का एक शौक बन चुका है कि नियम-कानून का डर तो बिल्कुल नहीं है। हम अपनी मर्जी से जितनी मर्जी हो घूस लेते ही रहेंगे। ताजा मामला दिल्ली से आया जहाँ MCD के डिप्टी कमिश्नर 4 लाख का घूस लेते धरा गए हैं। CBI ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ा है। क्या है पूरा मामला, आइये समझते हैं।
दिल्ली के शाहदरा नॉर्थ MCD जोन में तैनात डिप्टी कमिश्नर अभिषेक कुमार मिश्रा को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने एक दिन की CBI हिरासत में भेज दिया है। उनके साथ गिरफ्तार किए गए प्रशासनिक अधिकारी दिव्यांशु कुमार गौतम को भी कोर्ट ने एक दिन की सीबीआई कस्टडी में भेजने का आदेश दिया है।
यह कार्रवाई उस समय हुई जब CBI ने दोनों अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया। उनके अनुसार अभिषेक मिश्रा और उनके सहयोगी अधिकारी दिव्यांशु गौतम पर करीब 4 लाख रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप है। बताया जा रहा है कि यह रिश्वत किसी काम को करवाने के बदले मांगी गई थी, जिसकी शिकायत मिलने के बाद एजेंसी ने कार्रवाई की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI ने जांच शुरू की और शुरुआती जांच में आरोपों को सही पाए जाने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें एक दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया। इस दौरान सीबीआई दोनों से पूछताछ करेगी और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों को जुटाने की कोशिश करेगी।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब CBI यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस मामले में कोई और अधिकारी या कर्मचारी शामिल तो नहीं है। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या इससे पहले भी इस तरह की कोई गतिविधि हुई है। इस घटना के सामने आने के बाद दिल्ली नगर निगम के भीतर भी हलचल मच गई है। अधिकारियों के खिलाफ हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई सीबीआई की जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।
गौरतलब है कि जब ये मामला सामने आया, तो भारतीय लिबरल पार्टी के अध्यक्ष डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा ने इसकी कड़ी आलोचना भी की। उन्होंने अपने X हैंडल के जरिये भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने कहा, ''हमारे भारत में भ्रष्टाचार के मामलों की कहानी कभी खत्म नहीं होती। ताज़ा खबर यह है कि CBI ने कल MCD के डिप्टी कमिश्नर अभिषेक मिश्रा को ₹4 लाख की रिश्वत के एक मामले में गिरफ़्तार किया। चाहे कोई भी राज्य हो, कोई भी भाषा, कोई भी जाति या धर्म: हम सभी भ्रष्टाचार की विचारधारा से एक सूत्र में बंधे हैं, यही हमारा सच्चा धर्म है।"
आपको बता दें कि भारत में भ्रष्टाचार का मुद्दा कोई नया नहीं है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में पंजाब के पूर्व डीआईजी (रूपनगर रेंज) हरचरण सिंह भुल्लर को CBI ने 8 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। अधिकारियों ने उनके घर से और साथ ही फार्महाउस से भी भारी मात्रा में कैश, सोना, लग्जरी घड़ियां और हथियार बरामद किया। साथ ही भुल्लर पर आय से अधिक संपत्ति का भी केस दर्ज है। वर्तमान में पूर्व DIG चंडीगढ़ की जेल में हैं।
इसके साथ ही माइन ऑफिसर देवब्रत मोहंती फ़रवरी 2026 में ओड़िसा से धराया था, जिसे 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते विजलेंस अधिकारियों ने पकड़ा था। उसके घर से पूरे 4 करोड़ रुपये नकद भी बरामद हुए थे। नोटों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि उसे गिनने के लिए मशीन तक लानी पड़ी।
बता दें कि NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 सालों में करीब 45,000 भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किये गए हैं। मतलब हर साल औसतन 4,000 मामले।
इसमें कुछ चर्चित केस के बारे में बात करें तो वो कुछ इस प्रकार हैं:- अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामला (2016-18), आईएनएक्स मीडिया मामला (2019), आईएनएक्स मीडिया मामला (2019), पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला (2022), दिल्ली शराब नीति मामला (2023-24) और यस बैंक-डीएचएफएल मामला (2020), ऐसे मामले आइना दिखाने का काम कर रहे हैं कि देश भ्रष्टाचार में लीन होता जा रहा है।