

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नौचंदी थाना क्षेत्र में पुलिस ने राहुल कौशिक को 11 मार्च 2026 को उनके घर से गिरफ्तार किया।
पुलिस का आरोप है कि वे खुद को आईएएस अधिकारी बताकर पुलिस अधिकारियों को फोन करते थे और झूठा रौब झाड़ते थे।
राहुल का कहना है कि वे फर्जी नहीं हैं बल्कि 2008 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) पास कर चुके हैं। उनके अनुसार वे पहले दिल्ली में तैनात थे, बाद में चेन्नई और फिर दिल्ली के संचार मंत्रालय में ADG पद पर रहे। वे दावा करते हैं कि फिलहाल वे निलंबित हैं और उनका मामला सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में चल रहा है।
उत्तर प्रदेश, मेरठ जिले के अंतर्गत नौचंदी थाना क्षेत्र की पुलिस ने एक फर्जी आईएएस को उसके घर से पकड़ लिया। पुलिस के मुताबिक फर्जी आईएएस का नाम राहुल कौशिक है। पुलिस ने राहुल कौशिक को यह कहकर गिरफ्तार किया कि राहुल ने फर्जी आईएएस बनकर अन्य पुलिस कर्मियों को बेवजह परेशान किया और पुलिस अधिकारी बनकर झूठ में रौब झाड़ने का प्रयास किया।
दरअसल, पुलिस के मुताबिक राहुल कौशिक फिलहाल मेरठ जिले में पुलिस अधिकारियों को फोन मिलाकर झूठे रौब झाड़ते थे और फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर आस-पास के लोगों को भ्रमित करने का प्रयास भी किया। यह मामला जब पुलिस के अधिकारियों तक पहुंचा तो फिर 11 मार्च 2026 को मेरठ पुलिस ने राहुल के घर धावा बोल दिया और उन्हें उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने इसके बाद प्रेस कांफ्रेंस में यह बात बताई की राहुल फर्जी आईएएस अधिकारी बने हुए थे।
राहुल कौशिक ने पुलिस के कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की है। राहुल का कहना है कि पुलिस को भ्रम हुआ है। उनको बेवजह मानसिक प्रताड़ना दिया जा रहा है। राहुल ने फर्जी आईएएस वाले मामले पर अपना पक्ष रखते हुए बहुत सारे सबूत भी दिए और यह बताने का प्रयास किया कि वह फर्जी आईएएस नहीं बल्कि सही में आईएएस अधिकारी रह चुके हैं फिलहाल वह निलंबित हैं।
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राहुल के मुताबिक उन्होंने संघ लोकसेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा 2008 में पास किया था। उन्होंने बाकायदा दो वर्ष की ट्रेनिंग भी पूर्ण किया है। उनके मुताबिक उनकी पहली तैनाती दिल्ली में साल 2010 में हुई थी। राहुल ने इतिहास विषय से यूजीसी नेट/जेआरएफ की परीक्षा भी पास की है और इतिहास विषय में पीएचडी भी पूर्ण कर चुके हैं।
राहुल बताते हैं कि दिल्ली में तैनाती के समय उनको रिक्रूटिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। यह पहली तैनाती ही थी कि उनके ऊपर बहुत सारे आरोप लग गए और उनका स्थानांतरण दिल्ली से चेन्नई में कर दिया गया।
राहुल कौशिक ने बताया कि वहां से फिर उनका स्थानांतरण साल 2017 में दिल्ली हुआ और वह संचार मंत्रालय में बतौर ADG तैनात थे। उनके ऊपर लगे आरोपों की जांच की जा रही है और उनका मामला सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में चल रहा है। उन्होंने बताया कि इसके लिए 90 दिन का समय निर्धारित है। राहुल का कहना है कि इस मामले में कांस्टेबल से लेकर CO किसी को भी पूछताछ करने नहीं आया।
एक अन्य मामला गुजरात का है, जिसमें एक शख्स, जिसका नाम किरण पटेल (Kiran Patel) बताया जाता है। वह बुलेटप्रूफ गाड़ियों से चलता था और Z प्लस सुरक्षा होने का दावा भी करता था । किरण पटेल खुद को पीएमओ से जुड़ा हुआ अधिकारी बताता था। लोगों के बीच उसकी काफी धाक जमी हुई थी। किरण पटेल ने साल 2019 से 2023 तक लगभग 4 सालों तक इस तरीके से प्रशासन के आंखों में धूल झोंकने का काम किया। बाद में पुलिस ने किरण पटेल को अतुल वैद्य नाम के शख्स द्वारा की गई शिकायत के आधार पर मार्च 2023 में श्रीनगर से गिरफ्तार कर लिया।
वहीं दूसरी घटना बिहार की है जहां ललित कुमार उर्फ गौरव नामक शख्स ने सीतामढ़ी से पूरे प्रशासन की आँख में धूल झोंकने का प्रयास किया और फर्जी आईएएस बनकर बहुत सारे लोगों से पैसे ढग लिए। ललित कुमार अर्थात गौरव के मित्र अभिषेक द्वारा फर्जी आईडी, नेम-प्लेट और अन्य दस्तावेज तैयार किया गया था। बाद में उसका सामना सीधे पुलिस से ही हो गया और गिरफ्तार कर लिया गया।
इसी तरीके से एक अन्य मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस (Uttar Pradesh Police) ने 17 अक्टूबर 2025 को विवेक नाम के फर्जी आईएएस अधिकारी को गिरफ्तार किया था। आरोपी डॉ. विवेक मिश्रा खुद को 2014 बैच का अधिकारी बताता था और लोगों से पैसे हद से ज्यादा ऐंठ चुका था। साल 2019 में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी और साल 2025 में उसकी गिरफ़्तारी हुई।
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