

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2025 रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के लगभग 180 देशों का मूल्यांकन किया गया। सबसे अधिक भ्रष्ट देशों में दक्षिण सूडान, सोमालिया, वेनेजुएला, यमन, लीबिया, इरिट्रिया, सूडान, निकारागुआ, सीरिया और उत्तर कोरिया शामिल हैं, जहाँ राजनीतिक अस्थिरता और कमजोर शासन के कारण भ्रष्टाचार गहराई तक व्याप्त है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत टॉप-10 भ्रष्ट देशों में नहीं है। भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) 2025 में भारत 180 देशों में 91वें स्थान पर है और 39/100 स्कोर के साथ 2024 की 96वीं रैंक से 5 स्थान बेहतर हुआ है।
किसी देश में भ्रष्टाचार का स्तर उसकी राजनीतिक संस्कृति और नागरिकों की सक्रियता पर निर्भर करता है। सहभागी राजनीतिक संस्कृति में नागरिक जागरूक और सक्रिय होते हैं, जिससे भ्रष्टाचार कम होता है।
भ्रष्टाचार पूरी दुनिया के देशों में शासन व्यवस्था के लिए एक चुनौती है। किसी भी देश में शासन व्यवस्था के सुचारु रूप से संचालित होने में भ्रष्टाचार एक बहुत बड़ा बाधा होता है। दरअसल, भ्रष्टाचार अपने आप शासन व्यवस्था में नहीं आता है बल्कि शासन व्यवस्था में कार्यरत लोगों के भीतर भ्रष्टाचार अपनी जगह बना लेता है और इसका असर पूरी व्यवस्था में दिखाई पड़ता है।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2025 जारी की है। इस सूची में लगभग 180 देशों को समाहित किया गया है। ऐसे में आइये जानते हैं कि क्या इसमें भारत का भी नाम है और साथ ही उन शीर्ष दस देशों के नाम भी जानते हैं जहां सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार व्याप्त है, उनकी जानकारी कुछ इस प्रकार हैं:-
साल 2011 में दक्षिण सूडान को आजादी मिलने के बाद से बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रपति सल्वा कीर एवं उपराष्ट्रपति रीक माचर के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान फिलहाल गृह युद्ध में तब्दील हो चुकी है। शासन व्यवस्था को लेकर किसी भी तरीके की गंभीरता नहीं नजर आ रही है।
यही कारण है सूडान में भ्रष्टाचार (Corruption) ने बहुत अच्छे से जड़ें जमा ली हैं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी सूची में सूडान सबसे भ्रष्ट देशों में से एक है। सूचकांक के मुताबिक सूडान में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार व्याप्त है।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी सूची के अनुसार पूरे सोमालिया में भ्रष्टाचार ने व्यवस्था को जकड़ लिया है। सूचकांक में सोमालिया सूडान के बाद है, लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में सूडान के समकक्ष है। दरअसल,सोमालिया भी राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है जिसकी वजह से पूरी व्यवस्था लचर हो चुकी है। एक तरफ जहां 329 सदस्यों वाली सोमालिया की संसद में वोटिंग की प्रक्रिया में बदलाव और सदस्यों के कार्यकाल को बढ़ाने को लेकर बहसबाजी जारी है, तो दूसरी तरफ सोमालिया की व्यवस्था भ्रष्टाचार के आगे दम तोड़ती नजर आ रही है।
वेनेजुएला को इस सूची में भ्रष्टाचार में जकड़े देशों के साथ रखा गया है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के अनुसार, सूडान और सोमालिया के बाद वेनेजुएला में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। इसको लेकर वेनेजुएला में काफी दिन से संघर्ष भी दिखाई दे रहा था, साल 2024 के चुनाव में यह आरोप लगाया गया कि चुनाव में निकोलस मादुरो ने धांधली कारवाई है। दूसरी तरफ पूरा तंत्र इतना कमजोर हो गया था कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को इसी बीच 3 जनवरी 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वेनेजुएला से ही सैन्य अभियान के तहत उठा लिया।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी सूची में यमन भी उन दस देशों में शामिल है जहां भ्रष्टाचार की जड़ें सबसे गहरी हैं। कमजोर हो चुका यमन का पूरा राजनीतिक व्यवस्था इस बात की गवाही दे रहा है कि मुल्क को भ्रष्टाचार दीमक की तरह चाट कर खत्म कर देगा। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार,यमन के 80% से अधिक आबादी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानवीय सहायता की आवश्यकता है।
अफ्रीका महादेश (African Continent) में स्थित लीबिया अफ्रीका में क्षेत्रफल के हिसाब से चौथा सबसे बड़ा देश है। 2011 में मुअम्मर गद्दाफीकी के जाने के बाद से लीबिया में राजनीतिक अस्थिरता और राजनीतिक विभाजन का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में लीबिया की शासन व्यवस्था में भ्रष्टाचार ने काफी अच्छे से घर बना लिया है। दफ्तरों में लालफीताशाही और शासन व्यवस्था में लग चुका दीमक, लीबिया को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत सारे मुश्किलों का सामना करने पर मजबूर कर दिया है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी की गई सूची में लीबिया भी भ्रष्टाचार के मामले में ऊपर के देशों के साथ कदमताल कर रहा है।
इसी तरीके से अन्य देशों का क्रम इरिट्रिया, सूडान, निकारागुआ, सीरिया और उत्तर कोरिया है। रिपोर्ट के मुताबिक क्रमशः इन देशों में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी मजबूत हो चुकी हैं। वहीं, जो रिपोर्ट सामने आई है, उसमें भारत का नाम नहीं है। हालांकि, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी नवीनतम भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) 2025 के अनुसार, भारत 180 देशों में 91वें स्थान पर है। पिछले साल (2024) की तुलना में भारत की स्थिति में सुधार हुआ है, जिसमें 39/100 स्कोर के साथ 96वीं रैंक से 5 पायदान की छलांग लगाई है। ऐसे में भारत टॉप 10 में तो नहीं है।
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दरअसल, कोई भी देश हो, जहां के नागरिक सजग और सक्रिय होते हैं, वहाँ पर भ्रष्टाचार का स्वरूप वैसा नहीं दिखाई देता जैसा कि यमन,सीरिया,लीबिया जैसे देशों में देखने को मिल रहा है। किसी भी देश में जिस प्रकार की राजनीतिक संस्कृति होती है, उस देश में भ्रष्टाचार का स्तर उसी के अनुसार होता है।
एक संकीर्ण राजनीतिक संस्कृति (Parochial Political Culture) में नागरिक, राष्ट्रीय शासन व्यवस्था में बिल्कुल रुचि नहीं लेते हैं, जिसके वजह से मुट्ठी भर लोगों के स्वार्थ के सहारे शासन में भ्रष्टाचार पैर जमा लेता है।
वहीं प्रजाभावी राजनीतिक संस्कृति (Subject Political Culture) में नागरिक, सरकार के कार्यों से अवगत तो होते हैं परंतु नागरिकों की राजनीतिक सक्रियता में रुचि नहीं होती है। इसके कारण भी शासन में भ्रष्टाचार व्याप्त हो जाता है।
सहभागी राजनीतिक संस्कृति (Participant Political Culture) में नागरिक, राजनीतिक फैसलों से अच्छी तरह अवगत होते हैं और सही या गलत फैसले आने पर अपनी सहमति और असहमति भी दर्ज कराते हैं। ऐसी राजनीतिक संस्कृति में नागरिक दोनों तरीके से सक्रिय होते हैं, जिसके वजह से भ्रष्टाचार बहुत कम दिखाई देता है।
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