फडणवीस सरकार ने चंद्रपुर के लोहारडोंगरी में 'सनफ्लैग आयरन एंड स्टील कंपनी' को लौह-अयस्क खनन के लिए 36 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की मंजूरी दी।
राज्य वन्यजीव बोर्ड (SBWL) की अपनी ही विशेषज्ञ समिति ने इस परियोजना का विरोध करते हुए इसे पर्यावरण के लिए विनाशकारी बताया था। शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया।
भारी राजनीतिक दबाव और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद, साल 2026 के विधानसभा सत्र में वन मंत्री गणेश नाईक ने स्पष्ट किया कि सरकार इस प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ा रही है।
कुछ दिन पहले राजस्थान में अरावली पर्वत को लेकर चले घमासान ने पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। अरावली को बचाने के लिए राजस्थान सहित देश के अन्य हिस्से में लोगों ने अरावली आंदोलन को अपना समर्थन दिया। इसी बीच महाराष्ट्र में भाजपा के फडणवीस सरकार ने एक नए आदेश देकर एक नए बवाल को निमंत्रण दे दिया है।
फडणवीस सरकार ने एक कंपनी को चंद्रपुर में खनन को लेकर आदेश पारित किया था। यह आदेश जैसे ही आया पर्यावरण चिंतकों ने इस पर आपत्ति जताई। इस खनन से ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व पर गहरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
दरअसल, महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की सरकार ने 6 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के चंद्रपुर के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के पास में ही लोहारडोंगरी में लौह-अयस्क खनन की मंजूरी दी थी। यह मंजूरी जब से सनफ्लैग आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड (Sunflag Iron and Steel Company Ltd - SISCL) को मिली है, तभी से ही बवाल मचा हुआ है। हालांकि इस मामले पर SBWL (State Board for Wildlife) की विशेषज्ञ समिति ने अपना विरोध भी दर्ज कराया था कि खनन से पर्यावरण को काफी नुकसान हो सकता है। बावजूद इसके महाराष्ट्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के खनन की मंजूरी दे दिया।
महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) ने लौह-अयस्क खनन के लिए जबसे मंजूरी दी है लगातार इस मामले पर विपक्ष द्वारा सरकार को घेरा जा रहा है। दरअसल, खनन से पास में ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व पर गहरा असर पड़ने की संभावना जताई जा जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व में लगभग 115 से 120 बाघ रहते हैं। खनन से वह गलियारा नष्ट हो सकता है जो अन्य जंगलों जैसे कि ब्रह्मपुरी और घोडाझरी को जोड़ता है।
बता दें कि इस परियोजना के तहत लगभग 36 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र के 18,000 से अधिक पेड़ों के कटने की संभावना है। इतनी भारी मात्रा में कटाई से आसपास के इलाकों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
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शिवसेना (UBT) की राज्यसभा में सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले पर अपनी बात राज्यसभा में रखी। उन्होंने कहा कि एक निजी कंपनी को यह प्रोजेक्ट देने से ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व सहित आसपास के इलाकों के पर्यावरण पर नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। साथ ही वह कॉरीडोर भी खतरे में पड़ सकता है जो अन्य जंगलों को टाइगर रिजर्व से जोड़ता है। प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार (BJP Government) ने अपनी ही विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को नजरअंदाज किया और खनन की अनुमति दे दी। इस परियोजना से लगभग 36 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले 18,000 पेड़ों की कटाई होगी और 250 से अधिक बाघों वाले भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीय उद्यान को जोड़ने वाला अहम कॉरिडोर खतरे में पड़ सकता है।
उन्होंने ने आगे कहा कि 650 से ज्यादा गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ेगा। सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि केवल 120 नौकरियों के लिए प्रकृति और जैव विविधता को दांव पर लगाना विकास नहीं, बल्कि विनाश है।
वहीं महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि इस प्रोजेक्ट को फिलहाल रोक दिया गया है। साल 2026 में विधानसभा सत्र में सवाल पूछने पर वन मंत्री गणेश नाईक (Ganesh Naik) ने जवाब दिया कि सरकार खनन वाले प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ा रही है और न ही सरकार का आगे बढ़ाने का इरादा है।
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