

महाराष्ट्र (Maharashtra) केवल आधुनिक शहरों और औद्योगिक विकास के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी कई वर्षों पुरानी पारंपरिक, सांस्कृतिक धरोहर के लिए भी विख्यात है l विशेष रूप से अजंता और एलोरा की गुफाएँ (Ajanta & Ellora Caves),एलीफेंटा गुफाएँ (Elephanta Caves) और पश्चिमी घाट (Western Ghats) महाराष्ट्र की पर्यटन को पूरे देश में ही नहीं बल्किन विदेश में भी एक अलग पहचान देती है l
महाराष्ट्र (Maharashtra) के ये ऐतिहासिक स्थल विश्व धरोहर के रूप में भी मान्यता प्राप्त हैं और हर वर्ष लाखों देशी-विदेशी पर्यटक यहाँ आते हैं। ऐसे में अगर आप महाराष्ट्र घूमने का प्लान बना रहे हैं तो इन जगहों पर जरूर जाना चाहिए। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
अजंता की गुफाएँ:
महाराष्ट्र (Maharashtra) के औरंगाबाद जिले में अजंता गुफाएँ (Ajanta Caves) बौद्ध कला का उदाहरण हैं। इन गुफाओं की यह विशेषता है कि पहाड़ों को काटकर बनाया गया है। अजंता की गुफाओं की दीवारों और छतों पर वह जो नकाशी की गई है उस समय की धार्मिक और सामाजिक संगम को दर्शाती हैं। यहाँ भगवान बुद्ध के जीवन की घटनाओं और जातक कथाओं को साथ चित्रित किया गया है। पत्थरों पर स्तंभ और बुद्ध की ध्यानमग्न मूर्तियाँ इस बात का साक्ष्य हैं कि प्राचीन भारतीय कलाकारों की सोंच और रचनात्मक कितनी शानदार रही होगी।
कला और धर्म का मिश्रण: एलोरा गुफाएँ
अजंता से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर एलोरा गुफाएँ (Ellora Caves) हैं l यहाँ बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म को दर्शाते हुए टोटल 34 गुफाएँ हैं। सबसे बड़ी विशेषता इन गुफाओं की यह है कि उनका विशाल आकार और रचनात्मक नकाशी । मुख्य रूप से कैलाश मंदिर, जो एक ही विशाल चट्टान के पत्थर को काटकर बनाया गया है, विश्व की सबसे अद्भुत कलाओं में गिना जाता है। मंदिर की दीवारों पर रामायण और महाभारत के दृश्य बारीकी से चित्रित किये गए हैं। पत्थरों पर बनाई गई देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और स्तंभों के आकार उस समय की शिल्पकला को दर्शाती हैं।
महादेव का मंदिर: एलीफेंटा गुफाएँ
अरब सागर में स्थित एलीफेंटा द्वीप की गुफाएँ (Elephanta Caves) भी भारतीय कला और आध्यात्मिकता का एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। यहाँ की विशेषता मुख्य तौर पर भगवान शिव की विभिन्न मूर्तियाँ हैं। सबसे प्रसिद्ध त्रिमूर्ति शिव की विशाल प्रतिमा है, जिसकी ऊँचाई लगभग 20 फीट है। यह प्रतिमा शिव के सृजन, संरक्षण और विनाश के तीन रूपों को दर्शाती है। इन गुफाओं की दीवारों पर की गई गहरी नकाशी और स्तंभों की बनावट प्राचीन भारतीय वास्तुकला को दर्शाती है।
पश्चिमी घाट: प्राकृतिक पर्वतमाला
जहाँ एक ओर तीनों गुफाएँ महाराष्ट्र (Maharashtra) के ऐतिहासिक और रचनात्मक कला को दर्शाती हैं, वहीं पश्चिमी घाट (Western Ghats) इसकी प्राकृतिक सुंदरता के चलते पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इसका दूसरा नाम सह्याद्रि पर्वतमाला है जोकि घने जंगलों, झरनों और विविध वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। यहाँ कई दुर्लभ पौधों और जीवों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। मानसून के दौरान यहाँ की हरियाली और झरने पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं।
इस प्रकार महाराष्ट्र (Maharashtra) की गुफाएँ और पश्चिमी घाट न केवल पर्यटन के केंद्र हैं, बल्कि वे भारत की प्राचीन कला और प्रकृति के अद्भुत समन्वय का जीवंत उदाहरण भी हैं।
छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस:
महाराष्ट्र (Maharashtra) का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (Shivaji Maharaj Terminus) केवल रेलवे स्टेशन नहीं बल्कि महाराष्ट्र पर्यटन का एक प्रमुख हिस्सा है l इसका पुराना नाम विक्टोरिया टर्मिनस था l इसका निर्माण ब्रिटिश वास्तुकार फ्रेडरिक विलियम स्टीवंस ने 19वीं सदी के अंत में किया था l 2004 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया और इसे विश्व प्रसिद्धि प्राप्त हुई l यहाँ पर पश्चिमी और भारतीय वास्तुकला का मिश्रण देखने को मिलता है l इसके रंगीन शीशे और नकाशी इसे ख़ास बनाते है l