सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने उनके ऊपर लगाया गया रासुका (National Security Act) हटा लिया। कोर्ट ने कहा कि उनके भाषणों को गलत तरीके से समझा गया था।
लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग – वांगचुक इस मांग को लेकर 10 सितंबर 2025 से भूख हड़ताल पर थे। 24 सितंबर को लद्दाख में हिंसा के बाद 26 सितंबर को उन्हें रासुका (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया और जोधपुर जेल भेजा गया।
विपक्षी नेताओं में अखिलेश यादव और जयराम रमेश ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वांगचुक पर रासुका लगाना गलत था और भाजपा को लद्दाख के लोगों से माफी मांगी जानी चाहिए।
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को बड़ी राहत मिली है। सोनम वांगचुक पर केंद्र सरकार की तरफ से लगाया गया एनएसए अब हटा दिया गया है। सोनम वांगचुक की तरफ से डाली गई याचिका पर 10 मार्च 2026 को न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि उनके भाषणों को गलत तरीके से समझने का प्रयास हुआ है।
सोनम वांगचुक लद्दाख के रहने वाले हैं। फिलहाल वह एक पर्यावरण कार्यकर्ता हैं लेकिन पेशे से वह इंजीनियर भी हैं। लद्दाख को जबसे जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) से अलग किया गया है, सोनम की मांग है कि लद्दाख को छठी अनुसूची में सूचीबद्ध किया जाए। इसके लिए सोनम वांगचुक ने सरकार से कई बार बातचीत करने की कोशिश की लेकिन सरकार से सहमति नहीं बन पाई। 10 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक इसी मांग के साथ भूख हड़ताल पर बैठ गए। 24 सितंबर 2025 को लद्दाख में हिंसा भड़क गई थी। 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को एनएसए के तहत हिरासत में ले लिया गया।
सोनम वांगचुक की गिरफ़्तारी के बाद उनको 27 सितंबर 2025 को जोधपुर केन्द्रीय कारागार में स्थानांतरित किया गया। सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि जे. अंगमो (Dr. Gitanjali J. Angmo) ने गिरफ़्तारी को चुनौती देते हुए 3 अक्टूबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दायर की थी। 10 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की और केंद्र तथा लद्दाख के प्रशासन से इस मामले पर जवाब मांगा था।
10 अक्टूबर 2025 को सुनवाई के दौरान वांगचुक के वकील कपिल सिब्बल (Advocate Kapil Sibal) ने अदालत में कहा था कि उनके मुवक्किल (Client) की बातों को सरकार ने गलत समझा है। इस मामले पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने कहा कि सरकार ने उनकी बात का कुछ ज्यादा ही मतलब निकाला है।
पीठ ने कहा कि सरकार ने जो लिखित अनुवाद दिया था वह 7 से 8 मिनट का है, जबकि सोनम वांगचुक का असली भाषण केवल 3 मिनट का ही है। पीठ ने इस मामले पर अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को तय करते हुए वीडियो की जांच स्वयं करने की बात कही और सरकार से इस मामले पर जवाब भी मांगा था।
इस मामले पर बहस जारी था, इसी क्रम में 14 मार्च 2026 को सोनम के ऊपर लगाया गया एनएसए सरकार द्वारा हटा दिया गया।
1 सितंबर 1966 को लद्दाख के सोनम वांग्याल (Sonam Wangyal) और शेरिंग (Shering) के घर में सोनम वांगचुक का जन्म हुआ था। दिल्ली के विशेष केन्द्रीय विद्यालय से 12वीं तक की शिक्षा पूर्ण करने के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए एनआईटी श्रीनगर में उन्होंने दाखिला लिया। साल 1987 में यहाँ से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की।
उन्होंने साल 2011 में फ्रांस के CRAterre के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर (School of Architecture) से अर्थन आर्किटेक्चर (Earthen Architecture) का कोर्स किया। इसके बाद साल 2016 में ग्लोबल अवार्ड फॉर सस्टेनेबल आर्किटेक्चर (Global Award for Sustainable Architecture) से सम्मानित हुए।
इसके साथ ही सोनम साल 2018 में लद्दाख में शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (Ramon Magsaysay Award) से सम्मानित हो चुके हैं। इसके अलावा साल 2016 में आइस स्तूप (कृत्रिम ग्लेशियर) के लिए रोलेक्स अवार्ड (Rolex Award) भी मिल चुका है।
सोनम वांगचुक को साल 2025 में भारत सरकार की तरफ से पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
एनएसए (National Security Act) जिसे रासुका कहा जाता है, को साल 1980 में बनाया गया था। इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति अपराध करने से पहले मात्र शंका के आधार पर गिरफ्तार किया जा सकता है। हिरासत में लिए गए शख्स को गिरफ़्तारी का कारण बताना जरूरी नहीं है। गिरफ़्तारी के शुरुआत में पहले 3 महीने का आदेश होता है, लेकिन गिरफ़्तारी के बाद बिना मुकदमे के अधिकतम 12 महीने तक किसी भी शख्स को हिरासत में रखा जा सकता है।
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सोनम वांगचुक के ऊपर लगे एनएसए को हटाए जाने पूर्व मुख्यमंत्री (उत्तर प्रदेश) और लोकसभा सांसद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा कि सवाल यह है कि उनको गिरफ्तार क्यों किया गया था। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की बात हुई थी। उन्होंने आगे कहा बीजेपी ने लद्दाख के लोगों के साथ धोखा किया और सोनम वांगचुक के साथ भी धोखा करके उनको जेल भेजा गया।
वहीं कांग्रेस (Congress) के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि सोनम वांगचुक के ऊपर से एनएसए हटना, यह साबित करता है कि भाजपा पूरी तरीके से बेनकाब हो गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा को सिर्फ सोनम वांगचुक से नहीं बल्कि पूरे लद्दाख के लोगों से माफी मांगना चाहिए।
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