मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा में पदस्थ एसडीएम पूजा सोनी इन दिनों दो बिल्कुल विपरीत वजहों से अचानक मीडिया की सुर्खियों में आ गई हैं। एक तरफ जहां उन्होंने यूपीएससी (UPSC) जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा पास कर आईएएस बनने का गौरव हासिल किया है, वहीं दूसरी तरफ उनके कार्यकाल के दौरान उनके ही दफ्तर में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (Economic Offences Wing) की एक बड़ी कार्रवाई से हड़कंप मच गया है।
पन्ना जिले के एक साधारण किसान परिवार से आने वाली पूजा सोनी का प्रशासनिक सफर अब तक काफी विवादों से दूर रहा था। लेकिन हाल ही में उनपर एक रिश्वतखोरी का आरोप लग गया और उनके कार्यालय में छापेमारी हो गयी जिसके कारण पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
नरसिंहपुर के तेंदूखेड़ा में पदस्थ एसडीएम पूजा सोनी (SDM Pooja Soni) का दफ्तर वैसे तो आम दिनों की तरह ही चल रहा था, लेकिन 15 मई 2026 की दोपहर अचानक वहां जबलपुर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की टीम आ धमकी। इस छापेमारी ने हड़कंप मचा दिया। आइए समझते हैं इस पूरे रिश्वतकांड की क्रोनोलॉजी:
फाइल को लटकाना: शिकायतकर्ता और कॉलोनाइजर संजय राय (Colonizer Sanjay Rai) ने अपनी कॉलोनी निर्माण के प्रस्तावित नक्शे की निरीक्षण रिपोर्ट के लिए एसडीएम कार्यालय में आवेदन दिया था। आरोप है कि इस बेहद जरूरी रिपोर्ट को बिना किसी ठोस वजह के दफ्तर में लगातार लटकाया जा रहा था और फरियादी को परेशान किया जा रहा था।
30 हजार की डिमांड: जब परेशान होकर संजय राय ने एसडीएम के स्टेनो सौरभ यादव से संपर्क किया, तो उसने इस निरीक्षण रिपोर्ट को क्लीयर करने और जारी करने के एवज में 30,000 रुपये की रिशवत मांग ली।
EOW का जाल और रंगे हाथों गिरफ्तारी: रिश्वत मांगे जाने के बाद पीड़ित ने इसकी गुप्त शिकायत जबलपुर EOW से कर दी। प्लान के मुताबिक, 15 मई 2026 (शुक्रवार) को दोपहर करीब 12:49 बजे जैसे ही संजय राय ने एसडीएम दफ्तर के भीतर स्टेनो सौरभ यादव (Saurabh Yadav) को केमिकल लगे नोट थमाए, पहले से घात लगाकर बैठी EOW की टीम ने दबिश देकर उसे रंगे हाथों दबोच लिया। उसके खिलाफ तुरंत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत केस दर्ज किया गया।
"25 ऊपर के हैं..."वो बयान जिसने सबको चौंकाया: इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया, जब कथित तौर पर यह बात सामने आई कि स्टेनो ने पैसों के लेन-देन के दौरान 'हिस्सेदारी' का जिक्र किया था। चर्चाओं के मुताबिक, उसने कहा था "30 में से 5 हजार मेरे हैं और 25 हजार एसडीएम मैडम के हैं।" इस एक लाइन ने पूरे घटनाक्रम का रुख बदल दिया है। हालांकि, EOW ने अभी तक इस 'इशारे' को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं की है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा रही है कि क्या भ्रष्टाचार के इस खेल के तार वाकई सीधे एसडीएम की कुर्सी से जुड़े हैं या स्टेनो सिर्फ मैडम के नाम का गलत इस्तेमाल कर रहा था यह सामने आना अभी बाकी है।
पूजा सोनी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा है कि रिश्वत उनके बाबू ने ली थी, उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। उनका दावा है कि जिस कॉलोनी निर्माण की NOC के लिए लेन-देन की बात कही जा रही है, वह 12 मई को ही जारी हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता अक्सर “सेवा” की बात करता था, जिसे उन्होंने हमेशा मना किया।
जब भी किसी प्रशासनिक अधिकारी के कार्यालय में भ्रष्टाचार (Corruption) की बड़ी कार्रवाई होती है, तो समाज में उस अधिकारी के निजी और शैक्षणिक सफर को जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है। नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा में पदस्थ एसडीएम पूजा सोनी (SDM Pooja Soni) की कहानी भी एक बेहद साधारण परिवार से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा तक पहुंचने की है। वह मूल रूप से मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पन्ना जिले के एक छोटे से कस्बे देवेंद्रनगर की रहने वाली हैं। एक मध्यमवर्गीय और बेहद सामान्य परिवार से आने वाली पूजा सोनी के पिता महेश सोनी पेशे से एक किसान हैं, जिन्होंने बेहद सीमित संसाधनों के बीच अपनी बेटी को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए दिन-रात मेहनत की।
प्रतियोगी परीक्षाओं के मामले में पूजा सोनी का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद शानदार और प्रेरणादायक रहा है। प्रशासनिक सेवाओं में आने की चाह में उन्होंने सबसे पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षा पास कर अपनी काबिलियत साबित की थी। इसके बाद, साल 2019 में उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा में बड़ी सफलता हासिल की, जिसके बाद उनका चयन डिप्टी कलेक्टर (एसडीएम) के पद पर हुआ। लेकिन उनका सपना यहीं नहीं थमा सेवा में रहने के दौरान भी उन्होंने अपनी जिद और पढ़ाई को जारी रखा। नतीजा यह हुआ कि उन्होंने साल 2025 की संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा क्रैक कर ली|इस हालिया रिश्वतकांड से पहले तक उनका पूरा कार्यकाल बेहद शांत और निर्विवाद रहा था, यही वजह है कि उनके दफ्तर में हुई इस अचानक कार्रवाई ने सबको हैरान कर दिया है।
एसडीएम पूजा सोनी (SDM Pooja Soni) के करियर का ग्राफ जितनी तेजी से ऊपर चढ़ा था, उतनी ही तेजी से वह इस वक्त विवादों के केंद्र में आ गई हैं। सेवा में रहने के दौरान अपनी निरंतर मेहनत के दम पर उन्होंने साल 2025 की संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की थी। देश की इस सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षा में ऑल इंडिया 249वीं रैंक हासिल कर उन्होंने प्रशासनिक गलियारों में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया था। इस बेहतरीन कामयाबी के बाद उनका आईएएस (IAS) अफसर बनना तय हो चुका है और वह जल्द ही अपने वर्तमान एसडीएम पद से इस्तीफा देकर मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) में अपनी ट्रेनिंग के लिए रवाना होने वाली थीं।
लेकिन किस्मत के खेल और प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्विरोध देखिए कि उनकी इस नई और बड़ी पारी की शुरुआत से ठीक पहले उनके अपने ही दफ्तर में भ्रष्टाचार का यह बड़ा धमाका हो गया। कार्यालय के स्टेनो के रंगे हाथों पकड़े जाने और उसके बाद प्रशासनिक स्तर पर मचे हड़कंप ने उस समय उनकी छवि पर एक गहरा सवालिया निशान लगा दिया है, जब वह अपने करियर के सबसे सुनहरे पड़ाव पर कदम रखने जा रही थीं।
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इस पूरे रिश्वतकांड के बाद फिलहाल जबलपुर EOW की टीम मामले की गहराई से कानूनी जांच कर रही है। मुख्य आरोपी स्टेनो सौरभ यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर उससे पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी का पूरा फोकस अब उस '25 हजार रुपये के ऊपर के हिस्से' वाले कथित बयान के सच को खंगालने पर है।
ईओडब्ल्यू इस बात की बारीकी से पड़ताल कर रही है कि क्या इस घूसखोरी के तार वाकई सीधे एसडीएम पूजा सोनी से जुड़े हैं, या फिर स्टेनो सिर्फ मैडम के रसूख और नाम का गलत इस्तेमाल कर अपनी जेबें भर रहा था। एक उभरती हुई होनहार आईएएस अफसर के करियर, साख और भविष्य के लिहाज से इस कानूनी जांच के नतीजे बेहद निर्णायक और महत्वपूर्ण होने वाले हैं। [SP]