नीतीश कुमार 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे, जिसके बाद 30 मार्च 2026 को उन्होंने बिहार विधान परिषद (MLC) से इस्तीफा दे दिया।
10 अप्रैल 2026 को उनके राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना प्रबल हो गई है।
जदयू प्रवक्ताओं और मंत्रियों ने नीतीश कुमार के इस फैसले को एक राजनीतिक मानक बताया है।
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया है। 30 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की खबर जैसे ही सामने निकलकर सामने आई, राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई।
जदयू के नेता और बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित हो चुके हैं, और यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य था। नीतीश कुमार के इस कदम के साथ ही बिहार में नेतृत्व परिवर्तन होने की संभावना है। हालांकि उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं है। नीतीश कुमार 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य हैं। नीतीश कुमार 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए। इसके बाद विधान परिषद की सदस्यता से उनके इस्तीफे की चर्चा शुरू हो गयी थी।
बता दें कि नीतीश कुमार उन नेताओं में शामिल हैं जो चारों सदनों के सदस्य बने हैं। नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव लड़ने के दौरान कहा गया था कि उनकी इच्छा राज्यसभा की सदस्यता के रूप में निर्वाचित होने की थी , इस कारण उन्होंने यह निर्णय लिया।
नीतीश कुमार 1985 में बिहार के हरनौत विधानसभा सीट से विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 1989 में वे नौवीं लोकसभा के सदस्य चुने गए। वे 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। अब पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में वे अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि 10 अप्रैल 2026 को वे राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।
नीतीश कुमार ने केंद्र में रेल मंत्री (1998-1999 और 2001-2004), कृषि मंत्री और जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे, जहां उन्होंने रेलवे में व्यापक सुधार किए। साल 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं।
नीतीश कुमार ने विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया। अब यह बताया जा रहा है कि उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा से नहीं दिया है। इस पर फिर एक बार बहस तेज हो गई है कि नीतीश कुमार कब तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं।
बता दें कि नीतीश कुमार ने विधान परिषद से इस्तीफा दिया है लेकिन वह 6 महीने तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। मंत्री श्रवण कुमार के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद से इस्तीफा दिया है तो जरूरी नहीं है कि वह अपने मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा दें। अगर वह चाहे तो बिना सदन के सदस्यता लिए 6 महीने तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। परंतु संविधान के अनुसार, इस 6 महीने के भीतर उन्हें किसी एक सदन की सदस्यता लेनी जरूरी होगी। अब नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं, ऐसे में आंकड़ों पर ध्यान दिया जाए तो नीतीश कुमार सितंबर तक किसी सदन की सदस्यता लिए बिना मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं।
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नीतीश कुमार के विधान परिषद से इस्तीफे पर जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, 'उन जैसा नेता न हुआ, न होगा, "राजनीति में वे एक मानक के तौर पर जाने जाएंगे। कोई भी व्यक्ति अपनी कुर्सी एक दिन के लिए नहीं छोड़ता है। नीतीश कुमार ने मांझी को अपनी कुर्सी पर बैठाया। उन्होंने नौ महीने के लिए पद छोड़ा था।
सभी ने संकल्प लिया था कि पच्चीस से तीस ,फिर से नीतीश, लेकिन नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति में अपनी मौजूदगी का आश्वासन देकर एमएलसी पद छोड़ा है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि बिहार में न कोई नीतीश कुमार जैसा दूसरा पैदा हुआ है और न कोई दिखाई पड़ रहा है।"
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