आज की आधुनिक और व्यस्त जीवनशैली में पेट संबंधित शारीरिक और मानसिक समस्या होना आम हो गया है। ऐसी स्थिति में नावासन उन आसनों में से एक है, जो पेट और शरीर के संतुलन दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है।
नावासन, नौकासन भी कहा जाता है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है, 'नावा' का अर्थ है 'बोट' और 'आसन' का अर्थ है 'मुद्रा'। इस आसन को करते समय शरीर का आकार नाव जैसा बन जाता है, इसलिए इसे नावासन कहा जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, नौकासन एक प्रभावी योगासन है, जो शरीर को मजबूत और संतुलित बनाने में मदद करता है। इसे करते समय पेट, पीठ और जांघों की मांसपेशियों पर सीधा असर पड़ता है, जिससे शरीर की चर्बी कम होती है। यही नहीं, रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने में भी यह सहायक होता है। यह आसन न सिर्फ शारीरिक ताकत बढ़ाता है, बल्कि मानसिक एकाग्रता और संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है। नावासन एब्स बनाने के लिए प्रभावी माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से एब्स बहुत मजबूत होते हैं।
नौकासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल सीधे लेट जाएं और अपने दोनों पैरों को आपस में जोड़ लें। हाथों को शरीर के बगल में सीधा रखें। अब एक गहरी सांस लें, और सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे अपने पैरों और सीने को ऊपर उठाएं। साथ ही, हाथों को आगे की तरफ खींचें ताकि वे पैरों की ओर बढ़ें। इस दौरान आपकी नजरें पैरों पर होनी चाहिए, वहीं हाथ और पैर एक सीध में दिखाई दें। पेट की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस करें और कुछ देर इसी स्थिति में रहें। फिर धीरे-धीरे वापस पहली जैसी स्थिति में आ जाएं।
आयुष मंत्रालय ने दिल की कोई गंभीर बीमारी या अस्थमा से जूझ रहे लोगों को नौकासन न करने की सलाह दी है। साथ ही अगर आपको माइग्रेन, तेज सिरदर्द या लो ब्लड प्रेशर है, तो आप इसका अभ्यास न करें, क्योंकि इससे तकलीफ और बढ़ सकती है। गर्भावस्था के दौरान नौकासन से परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह पेट पर दबाव डालता है।
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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)