

स्वस्थ शरीर के लिए रोजाना योगासन और संतुलित आहार जरूरी है। योग में गरुड़ासन एक ऐसा आसन है जो शरीर को लचीलापन और मजबूती देता है। खासकर बच्चों के शारीरिक विकास और सेहत के लिए योग एक आसान और बहुत लाभकारी तरीका माना जाता है।
गरुड़ासन का नाम 'गरुड़' शब्द पर रखा गया है। 'गरुड़' का मतलब होता है 'चील'। इस आसन में आप चील की मुद्रा में होते हैं, इसलिए इसका नाम 'गरुड़ासन' दिया गया है। अंग्रेजी में इसे ईगल पोज कहा जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार गरुड़ासन संतुलन, एकाग्रता और शारीरिक मजबूती को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण योगासन है, जो हाथ-पैर की मांसपेशियों को मजबूत करता है। इसके साथ ही, यह टखनों, पिंडलियों, जांघों और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। पैरों और कूल्हों में जकड़न दूर करता है। संतुलन और एकाग्रता में सुधार लाता है। कंधों और ऊपरी पीठ की अकड़न को भी दूर करता है। नसों को सक्रिय कर नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाता है।
गरुड़ासन को करने के लिए पहले आप ताड़ासन मुद्रा में आराम से खड़े हो जाएं। इस दौरान आप सामान्य रूप से सांस लेते रहें। अब अपने घुटनों को थोड़ा मोड़ें और दोनों हाथों को सामने की ओर लाएं। अब पूरे शरीर का संतुलन दाएं पैर पर लें और बाएं पैर को ऊपर की ओर उठाएं। इसके बाद बाएं पैर को दाईं टांग के आगे से घूमाते हुए पीछे की ओर ले जाएं। इस स्थिति में बाईं जांघ दाईं जांघ के ऊपर रहेगी। इसके बाद आपको दोनों बाजुओं को कोहनी से मोड़ते हुए क्रॉस करना है। इस दौरान बाईं बाजू को दाईं बाजू के ऊपर रखना है। फिर आपको दोनों हथेलियों को नमस्कार मुद्रा में लाने की कोशिश करनी है। जब तक संभव हो इस मुद्रा में रहें और धीरे-धीरे अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं। इस तरह गरुड़ासन के तीन से पांच चक्र किए जा सकते हैं।
यह आसन शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन इसके नियमित अभ्यास से कई तरह के लाभ मिलते हैं। घुटने, टखने या कंधे में हाल ही में कोई चोट लगी हो तो यह आसन न करें।(VR)
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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)