

राजनीति (Politics) को हम अक्सर सत्ता, रणनीति और संघर्ष की दुनिया मानते हैं, लेकिन इसके पीछे प्यार और भावनाओं की कहानियाँ भी उतनी ही गहरी रही हैं। इतिहास बताता है कि राजनीति और इश्क़ का रिश्ता काफ़ी मज़बूत रहा है। कई बार नेताओं ने प्यार में पड़कर अपनी कुर्सी छोड़ दी, किसी ने प्रेम के लिए धर्म बदल लिया, तो किसी की प्रेम कहानी देश-विदेश में मशहूर हो गई। वहीं कुछ नेता ऐसे भी रहे जो इश्क़ के कारण विवादों और बदनामी में घिर गए। जब भावनाएँ फैसलों पर हावी हो जाती हैं, तो राजनीति की दिशा भी बदल जाती है। आज हम ऐसे ही 8 नेताओं के बारे में बताएँगे, जिनकी लव स्टोरीज़ ने पूरे देश को हैरान कर दिया।
जब लॉर्ड माउंटबेटन (Lord Mountbatten) और उनका परिवार मार्च 1947 में भारत में रहने आया तब से जिसे भारत की पॉलिटिक्स में प्यार की खुशबू से आने लगी। भारत का आखिरी वायसराय बनने पर लॉर्ड माउंटबेटन (Lord Mountbatten) ने अपने गेस्ट हाउस पर एक पार्टी रखी थी जहां नेहरू (Nehru) कुर्सी ना होने की वजह से ज़मीन पर बैठ गए थे। सोचने वाली बात ये थी कि वे माउंटबेटन की पत्नी एडविना (Edwina) के पैरों के पास बैठे थे।
इसी घटना से नेहरू और एडविना लोगों की नजरों में आ गए। इस पार्टी के बाद अगले ही दिन एडविना अपनी बेटी पामेला को लेकर नेहरू के घर भी गई थीं और वहीं से उनकी दोस्ती की शुरुआत हुई। कई रिपोर्ट के अनुसार नेहरू और एडविना के बीच एक अलग ही रास्ता बन चुका था जो कि भारत की आजादी के बाद तक कायम रहा। नेहरू एडविना के जीवित रहने तक उन्हें पत्र लिखते थे। यहां तक के एडविना की बेटी पामेला ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि नेहरू और एडविना एक दूसरे को काफी पसंद करते थे लेकिन उनके बीच कोई भी शारीरिक संबंध नहीं था।
इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी (Indira And Firoz Gandhi) की प्रेम कहानी भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित रिश्तों में से एक है। इंदिरा और फिरोज की मुलाक़ात युवा दिनों में हुई थी जब वे विदेश में पढ़ रहे थे। इंदिरा ऑक्सफ़ोर्ड में और फिरोज लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में।
धीरे-धीरे दोनों के बीच प्रेम बढ़ा और 26 मार्च 1942 को उन्होंने अनंद भवन, इलाहाबाद में हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली, भले ही इंदिरा के पिता जवाहरलाल नेहरू शुरू में इस रिश्ते के खिलाफ थे लेकिन महात्मा गांधी के सलाह देने के बाद फिरोज को ‘गांधी’ सरनेम दिया गया, जिससे इंदिरा ‘इंदिरा गांधी’ बनीं। शादी के बाद दोनों ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में साथ जेल भी काटी, जिससे उनका बंधन और मजबूत हुआ। शादी से उनके दो बेटे राजीव (1944) और संजय (1946) जन्मे, जिन्होंने बाद में भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि बाद में निजी मतभेद भी आए, उनका रिश्ता इतिहास में आज भी एक मजबूत प्रेम और राजनीतिक पारिवारिक गठजोड़ के उदाहरण के रूप में याद किया जाता है।
राजीव गांधी और सोनिया गांधी (Rajiv And Soniya Gandhi) की प्रेम कहानी किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है। साल 1965 में लंदन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान राजीव की मुलाकात इटली की रहने वाली एडविगे एंटोनिया अल्बिना माइनो, यानी सोनिया से हुई। राजीव एयरलाइन पायलट बनना चाहते थे और राजनीति से दूर थे, जबकि सोनिया एक साधारण जीवन पसंद करती थीं। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। कई सांस्कृतिक और पारिवारिक बाधाओं के बावजूद, 1968 में दोनों ने शादी कर ली। सोनिया ने भारत आकर भारतीय संस्कृति को अपनाया और राजीव के साथ हर मुश्किल में खड़ी रहीं। यह प्रेम कहानी त्याग, समझ और विश्वास की मिसाल बन गई।
अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) की प्रेम कहानी रहस्यमयी और बेहद संवेदनशील मानी जाती है। कहा जाता है कि वह जिस महिला से प्रेम करते थे, वह राजकुमारी कौशल्या देवी (Princess Kaushalya Devi) थीं, लेकिन इस रिश्ते को कभी आधिकारिक नाम नहीं मिला। अटल जी ने आजीवन अविवाहित रहकर अपने प्रेम को मौन में जीया।
माना जाता है कि सामाजिक परिस्थितियों और राजनीति के कारण यह रिश्ता आगे नहीं बढ़ सका। इसके बावजूद अटल जी ने उस परिवार से हमेशा आत्मीय संबंध बनाए रखे और उनकी बेटी नमिता भट्टाचार्य को अपनी पुत्री की तरह अपनाया। यह प्रेम कहानी त्याग, गरिमा और चुपचाप निभाए गए रिश्ते की मिसाल बन गई, जो बिना विवाह के भी पूरी ज़िंदगी निभाई गई।
उत्तर प्रदेश के सियासी दिग्गज मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) की लव स्टोरी भारतीय राजनीति की सबसे चर्चित और अनोखी कहानियों में से एक है। मुलायम करीब 20 साल बड़े थे और उनका रिश्ता साधना गुप्ता (Sadhna Gupta) से लगभग चार दशकों पहले शुरू हुआ। दोनों की मुलाकात उस समय हुई जब साधना ने मुलायम की मां की बीमारी के दौरान उनकी देखभाल की और इसी बीच दोनों के बीच नज़दीकियाँ बढ़ीं।
साधना खुद राजनीति में रुचि रखती थीं और मुलायम की जिम्मेदारियों के बीच हमेशा उनके साथ रहीं। 1988 में साधना ने एक बेटे प्रतीक को जन्म दिया। जब मुलायम की पहली पत्नी मालती देवी का निधन 2003 में हुआ, तो 23 मई 2003 को मुलायम ने साधना को अपनी पत्नी का दर्जा दिया। यह रिश्ता कई सालों तक छिपा रहा और बाद में यह तब सार्वजनिक हुआ जब साधना और प्रतीक का प्रमाण कोर्ट में सामने आया। साधना गुप्ता और मुलायम सिंह दोनों का 2022 में निधन हो गया, लेकिन उनकी प्रेम कहानी आज भी राजनीति की अनकही दास्तान के रूप में याद की जाती है।
एच.डी. देवगौड़ा और चन्नम्मा (HD Deve Gowda and Channamma) की लव स्टोरी भले ही सुर्खियों में न रही हो, लेकिन यह भरोसे, त्याग और साथ की एक मिसाल है। दोनों की शादी 1952 में पारंपरिक तरीके से हुई थी, जब देवगौड़ा राजनीति में अपने संघर्ष की शुरुआत कर रहे थे। उस दौर में न पैसा था, न पद, बस सपने और कठिनाइयाँ थीं। चन्नम्मा ने हर हाल में अपने पति का साथ निभाया।
गांव की सादगी, सीमित साधन और लगातार बदलती ज़िंदगी के बीच उन्होंने परिवार और घर को संभाले रखा। जब देवगौड़ा विधायक, मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री बने, तब भी चन्नम्मा ने लाइमलाइट से दूरी बनाए रखी। वह कभी सत्ता या शोहरत का हिस्सा नहीं बनीं, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर देवगौड़ा की सबसे बड़ी ताकत बनी रहीं। उनकी प्रेम कहानी दिखावे की नहीं, बल्कि समर्पण और स्थिरता की कहानी है, जो आज भी प्रेरणा देती है।
चंद्रशेखर और दुर्गा देवी (Chandrashekhar and Durga Devi) की प्रेम कहानी दिखावे से दूर, सादगी और विश्वास पर टिकी हुई थी। चंद्रशेखर एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए थे और उनकी शादी भी पूरी तरह पारंपरिक तरीके से हुई थी। जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा, तब न उनके पास बड़ी पहचान थी और न ही सुविधाएँ।
ऐसे समय में दुर्गा देवी ने हर हाल में उनका साथ दिया। राजनीतिक संघर्ष के दौरान चंद्रशेखर को जेल जाना पड़ा, विरोध झेलना पड़ा और लगातार अस्थिर हालात से गुजरना पड़ा। इन सब परिस्थितियों में दुर्गा देवी घर और परिवार की जिम्मेदारी संभालती रहीं। उन्होंने कभी शिकायत नहीं की और न ही राजनीति में दखल दिया। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी चंद्रशेखर ने सादगी नहीं छोड़ी और दुर्गा देवी भी हमेशा शांत और सरल रहीं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि सच्चा प्रेम शोर नहीं करता, बल्कि मुश्किल समय में साथ खड़ा रहता है।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) की लव स्टोरी अपने आप में काफी चर्चा में रही है। दिग्विजय सिंह, जो मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव हैं, ने 2014 में टीवी एंकर अमृता राय के साथ अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से कबूल किया था।
दोनों के कुछ निजी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उन्होंने अपने संबंध स्वीकार किए। अमृता ने बताया कि उन्होंने अपने पति से अलग हो कर तलाक के लिए आवेदन किया था और इसके बाद उन्होंने दिग्विजय के साथ अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने का फैसला किया था। बाद में सितंबर 2015 में दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज़ से शादी कर ली और इसे बाद में पंजीकृत भी कराया गया। अमृता ने स्पष्ट किया कि वे पैसों या संपत्ति के लिए नहीं बल्कि प्यार के लिए शादी कर रही हैं। उनके रिश्ते में उम्र के अंतर और सामाजिक आलोचना दोनों का सामना हुआ, लेकिन उन्होंने अपने फैसले और प्यार के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लिया। [Rh/SP]