

कहते हैं कि मनुष्य की पहचान उसके स्वभाव, सोच–विचार और उसके कर्मों से होते हैं। यहां तक कि बड़े बुजुर्गों ने भी हमेशा यही सलाह दी है कि जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा तो हमेशा अच्छा सोचो और अच्छे कर्म करो। हिंदू धर्म की धार्मिक पुस्तक भी कुछ ऐसा ही कहती है कि मनुष्य का कर्म जैसा होगा उसे वैसी ही फल की प्राप्ति होगी, लेकिन इसके बावजूद कुछ मनुष्य ऐसे हैं जो अपने आदत से मजबूर हैं। उनके पास सभी सुख सुविधाएं हैं, धन दौलत, घर बंगला लेकिन फिर भी उनके कर्म उन्हें पाप करने वाले मनुष्य की श्रेणी में डाल देते हैं। शास्त्रों के अनुसार जो मनुष्य अपने कर्म सही नहीं रखता और सभी सुख सुविधा रहते हुए भी पाप करता है, उसे महापापी कहते हैं। तो चलिए आज हम पांच ऐसे महापापी मनुष्यों के बारे में जानेंगे जिनका जिक्र खुद गरुड़ पुराण (Garuda Purana) में किया गया है।
भगवान श्रीकृष्ण ने भगवद गीता में कहा है कि जो मनुष्य अजन्मे शिशु को गर्भ में ही मार देता है, वह बड़ा महापापी है। इसी पाप के कारण उन्होंने अश्वत्थामा को कलियुग के अंत तक जीवित रहने का श्राप दिया था, क्योंकि अश्वत्थामा (Ashvathama) ने उत्तरा के गर्भ में अभिमन्यु के पुत्र को मारने का प्रयास किया था। गरुड़ पुराण में भी लिखा है कि भ्रूण हत्या करने वाला और गर्भवती स्त्री की हत्या करने वाला व्यक्ति महापापी है। ऐसी आत्मा की मृत्यु के बाद नरक में यातनाएँ सहने का वर्णन मिलता है।
जहां एक तरफ हमारे धार्मिक पुस्तकों में बेटियों को देवी का रूप माना गया है, वहीं दूसरी तरफ कई मनुष्य ऐसे हैं जो बच्चों के लिंग का पता लगते ही उन्हें समाप्त कर देते हैं। एक रिसर्च के अनुसार लगभग 5 लाख कन्या भ्रूण (Female embryo) सिर्फ इसलिए हुआ, क्योंकि वह लड़की थी। हालांकि भारत सरकार ने 1994 में PCPNDT Act लागू किया था ताकि गर्भ में लिंग जांच और उसके आधार पर भ्रूण हत्या (feticide) को रोका जा सके लेकिन इसका पालन पूरी तरह से नहीं हुआ। आज भी डॉक्टर कुछ पैसे के लालच में जांच कर गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग उसके माता-पिता को बता देते हैं। पिछले कई सालों के आंकड़े यह बताते हैं कि भारत में लड़कियों का जन्म पहले की तुलना में कम है जो सामाजिक और नैतिक संकट दोनों को उजागर करता है।
गरुड़ पुराण (Garuda Purana) में कहा गया है कि जो भी मनुष्य शौक या अनावश्यक कारण से किसी पशु या पक्षी की हत्या करता है, वह महापापी है। गीता में भी श्री कृष्ण ने अहिंसा और जीवन के सम्मान पर जोर दिया है और बिना आवश्यकता के हिंसा को पाप बताया है। ऐसी आत्मा के मृत्यु के बाद दुख मिलता है, जैसा धर्मग्रंथों में वर्णित है।
भारत में पशु हत्या (Animal Killing) और मांसाहार एक बड़ा व्यवहारिक विषय है। राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के अनुसार लगभग 80% भारतीयों ने कोई न कोई मांसाहार किया है| वर्तमान में भारत में प्रति व्यक्ति औसतन करीब 7 किलोग्राम मांस साल भर में खाए जाते हैं, और कुछ राज्य जैसे तेलंगाना में यह 20+ किलोग्राम तक है।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल करोड़ों मुर्गे और अन्य जानवर मांस उद्योग के लिए काटे जाते हैं। इससे साफ है कि मांसाहार व्यापक है, लेकिन भारत में हिंसा-रहित भोजन विकल्पों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
जो लोग नॉन-वेज खाते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि जानवरों का जीवन भी महत्वपूर्ण है। धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं में अहिंसा का महत्त्व बताया गया है, और यदि कोई व्यक्ति मांसाहार करता भी है, तो वह दया, संयम और संतुलन से करना बेहतर माना जाता है।
गरुड़ पुराण और धर्मग्रंथों में कहा गया है कि जो मनुष्य अपने माता-पिता को चोट पहुँचाता या मारता है वह महापापी है और उससे ईश्वर प्रसन्न नहीं होते। ऐसे पापों का फल भी मृत्यु के बाद कठिन बताया गया है।
भारत में बुजुर्गों के प्रति हिंसा और प्रताड़ना एक गंभीर सामाजिक समस्या है। कई सर्वे और अध्ययन बताते हैं कि लगभग 30-35% वरिष्ठ नागरिकों ने अपने परिवार में किसी न किसी रूप में दुर्व्यवहार देखा है, जिसमें बेटे और दामाद प्रमुख कारण हैं। 35% लोगों ने कहा कि उनके बेटे ने दुर्व्यवहार किया, और 21% ने दामाद को जिम्मेदार बताया।
न केवल दुर्व्यवहार, बल्कि हत्या जैसे चरम मामलों भी सामने आते हैं। उदाहरण के तौर पर, मध्य प्रदेश में एक बेटे को माँ की हत्या के लिए फांसी की सजा सुनाई गई थी क्योंकि उसने पैसों के लिए अपनी माँ को मारा था। अन्य खबरों में भी एक युवक ने सागर जिले में पैसों के विवाद में माता-पिता की हत्या की और अपराध के बाद वहीं बैठा रहा। ओडिशा में एक 35-साल की बेटी पर अपने माता-पिता की हत्या करने का आरोप भी दर्ज हुआ।
गरुड़ पुराण और धर्मग्रंथों में कहा गया है कि चोरी करना पाप है, लेकिन मंदिर में चोरी करना विशेष रूप से बड़ा पाप माना जाता है, क्योंकि मंदिर को भगवान का घर माना जाता है और वहाँ के दान-पेटी, चढ़ावे व आभूषण लोगों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक हैं। ऐसे लोगों को महापापी कहा जाता है और धर्मग्रंथों में बताया गया है कि उनके कर्म का फल कठिन होता है।
वास्तविक जीवन में भी मंदिरों में चोरी की कई घटनाएँ प्रकाशित हुई हैं:
बिहार के गोपालगंज के थावे दुर्गा मंदिर से चोरों ने देवी का सोने का मुकुट, चांदी की छत्र और आभूषण लाखों में चोरी किए। पुलिस ने जांच के लिए SIT भी गठित की है।
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में अवसनेश्वर महादेव मंदिर से चोरों ने लगभग 25 लाख रुपये के चांदी के आभूषण, नकदी और CCTV सिस्टम चुरा लिए।
दिल्ली के जैन मंदिर में लगभग 40-50 लाख रुपये मूल्य का सोने-चांदी का कलश चोरी हुआ।
झांसी (UP) में एक चोर मंदिर के भीतर चोरी के बाद भगवान के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगता हुआ भी कैमरे में कैद हुआ।
गरुड़ पुराण के अनुसार, गौ माता की हत्या (Cow Killing) को सबसे बड़ा पाप कहा गया है। ऐसा माना जाता है कि गाय में देवी-देवताओं का वास होता है, और उसकी हत्या अपनी माता की हत्या के समान महापाप है। ऐसी आत्मा को नरक में भी कठिन यातनाएँ सहनी पड़ सकती हैं।
भारत में गाय हत्या और अवैध गोवंश हत्या (Cow Slaughter) से जुड़े कई मामले सामने आते रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में गर्भवती गाय को क्रूर तरीके से मारने के तीन आरोपी गिरफ्तार हुए थे। गुजरात के भरुच में गर्भवती गाय चोरी कर उसे मारने के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। 2015 में उत्तर प्रदेश के दादरी में एक व्यक्ति पर गाय हत्या के संदेह में भीड़ ने हमला किया और एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। ऐसे मामलों के कारण सामाजिक तनाव और धार्मिक भावनाएँ भी उभरती हैं।
कई राज्यों में गोवंश संरक्षण कानून लागू हैं, जैसे कि गाय हत्या पर रोक और अवैध गोहत्या के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई। प्रशासन और पुलिस द्वारा कई बार अवैध गोहत्या रैकेटों को रोकने और आरोपी गिरफ्तार करने की कार्रवाई भी हुई है।
भारत जैसे देश में, जहाँ गाय को राष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा माना जाता है, गाय हत्या पर सामाजिक और कानूनी दृष्टि से गंभीर नजर रखी जाती है और इसके खिलाफ कानून भी सख्त हैं। [Rh/SP]