जापान से लेकर एपस्टीन फाइल तक : बिहार के शिवानंद तिवारी ने खोले हरदीप सिंह पुरी के राज!

शिवानंद तिवारी ने हरदीप सिंह पुरी से जुड़ी एक पुरानी घटना का ज़िक्र किया है। इस घटना के माध्यम से शिवानंद तिवारी ने बहुत सारी बातें संकेत में ही कहा है, और वर्तमान में हरदीप सिंह पुरी के ऊपर लग रहे आरोप पर अप्रत्यक्ष तौर पर बहुत कुछ कह दिया है।
हरदीप सिंह पुरी और शिवानंद तिवारी एक कार में।
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Summary
  • शिवानंद तिवारी ने हरदीप सिंह पुरी के साथ जापान यात्रा की एक पुरानी घटना साझा कर सीधे आरोप न लगाते हुए यह संकेत दिया कि नियमों को हल्के में लेने और यह सोचने की प्रवृत्ति कि “पकड़े नहीं जाएंगे”, हरदीप के स्वभाव का हिस्सा रही है।

  • इस स्मृति के ज़रिए तिवारी ने मौजूदा एपस्टीन फाइल विवाद की ओर अप्रत्यक्ष इशारा किया—कि जैसे जापान में यह भरोसा था कि समय निकल जाएगा और बात दब जाएगी, वैसे ही आज आरोप तब सामने आए हैं जब करियर का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है।

  • तिवारी का असल संदेश यह है कि धब्बे देर से लगें तो भी लगते ज़रूर हैं—उस समय जो चूक “नज़र से ओझल” रह गई थी, वही प्रवृत्ति आज सार्वजनिक जांच और सवालों के घेरे में है, चाहे सफाई कितनी भी दी जाए।

भारतीय राजनीति में खास बात यह है कि यहाँ के नेता स्पष्ट रूप से कुछ कहने से बचते हैं। उनके बयानों में काफी कुछ छिपा रहता है। राजनेता अक्सर संकेत भरे बयानों का प्रयोग करते हैं। हरदीप सिंह पुरी का नाम एपस्टीन फाइल में आया है। राहुल गाँधी ने इसको लेकर काफी तीखी बयानबाज़ी की है। वहीं दूसरी तरफ हरदीप सिंह पुरी ने मामले से सम्बंधित बात, विस्तार से मीडिया के सामने रखी और राहुल गाँधी पर कटाक्ष भी किया था।

अब हरदीप सिंह के मित्र रहे शिवानंद तिवारी (आरजेडी के वरिष्ठ नेता) ने हरदीप सिंह पुरी से जुड़ी एक पुरानी घटना का ज़िक्र किया है। इस घटना के माध्यम से शिवानंद तिवारी ने बहुत सारी बातें संकेत में ही कहा है, और वर्तमान में हरदीप सिंह पुरी के ऊपर लग रहे आरोप पर अप्रत्यक्ष तौर पर बहुत कुछ कह दिया है।

क्या कहा है शिवानंद तिवारी ने ? 

शिवानंद तिवारी (Shivanand Tiwari) ने अपने फेसबुक पर हरदीप पुरी के साथ जापान यात्रा का ज़िक्र करते हुए कहा कि आजकल हरदीप पुरी जी चर्चा में हैं। इस चर्चा से उन्हें लेकर एक पुरानी स्मृति ताज़ा हो गई लेकिन वह स्मृति हरदीप जी की कोई सकारात्मक छवि नहीं उजागर करती है। उन्होंने आगे कहा कि जब जनता पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह हुआ करते थे, तो उनकी अनुमति से जापान (Japan) जाने का अवसर मिला।

तिवारी कहते हैं कि जब वो जापान में भारतीय दूतावास पहुंचे तो वहां उनकी मुलाकात हरदीप सिंह पुरी से हुई थी। हरदीप सिंह की नई-नई नियुक्ति हुई थी। वो उस समय युवावस्था में ही थे। अपने इस यात्रा की कहानी में शिवानंद ने जापान को एक अनुशासित देश की संज्ञा दी है। शिवानंद कहते हैं कि ट्रैफिक हो या सार्वजनिक जीवन, नियमों का पालन वहाँ लोगों के जीवन का स्वाभाविक हिस्सा था।

शिवानंद ने स्मृति (Memory) को साझा करते हुए बताया कि उस समय हरदीप पुरी (Hardeep Singh Puri) ने अनजाने में एक ‘नो एंट्री (No Entry)’ वाले रास्ते में गाड़ी मोड़ दिया था। उन्हें तुरंत अपनी गलती का अहसास हुआ। बाद में शिवानंद ने मुड़कर देखा तो मोड़ पर पुलिस जैसा आदमी दिखा।  शिवानंद ने हरदीप जी से कहा कि मोड़ पर पुलिस वाला था।शायद उसने आपकी गाड़ी का नंबर देख लिया हो।

लेकिन हरदीप सिंह ने उस समय हंस कर शिवानंद से कहा कि वह नम्बर नोट नहीं कर पाया होगा, क्योंकि पहले तो उसे लगा होगा कि वह सपना देख रहा है कि 'नो इंट्री' वाली सड़क में कोई गाड़ी घुस गई है। हरदीप सिंह ने आगे कहा, जब तक उसको यकीन होगा कि सचमुच ऐसा हुआ है तब तक हम लोग उसकी नजर से इतना आगे निकल चुके होंगे जहां से पुलिस वालों को गाड़ी का नंबर ही पता नहीं चलेगा। 

शिवानंद ने उस समय यही सोचा कि इतने बड़े अनुशासन वाले देश में हरदीप की गाड़ी का नंबर अगर नोट हो गया होता, तो करियर की शुरुआत में ही उनके चरित्र अभिलेख पर एक अनचाहा धब्बा लग जाता। शिवानंद ने इशारों-इशारों में ही बहुत कुछ कहने का प्रयास किया है। उनके इशारे वर्तमान की एपस्टीन फाइल पर भी बहुत कुछ कह रहें हैं।

शायद शिवानंद यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि हरदीप (Hardeep) ने जिस तरीके से उस समय यह कहकर बात टाल दिया कि किसी को यह विश्वास नहीं हो सकता, कि इतना बड़ा अधिकारी, कोई गलती कर सकता है। अगर कोई पहचान भी सकेगा तब तक समय निकल चुका होगा।

ठीक वैसे ही, आज एपस्टीन फाइल (Epstein File) में हरदीप सिंह के नाम की चर्चा है। हरदीप सिंह को अपने करियर (Career) में जो कुछ हासिल करना था, वो हासिल हो चुके हैं। आरोप लग रहें हैं और हरदीप सफाई भी पेश कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ हरदीप के करियर बनाने का समय भी लगभग बीत चुका है। ये ठीक वैसे ही हुआ है, जैसा हरदीप ने जापान में शिवानंद तिवारी से कहा था।

शिवानंद के इशारों में यह भी नज़र आ रहा है कि शायद हरदीप सिंह पुरी, जब एपस्टीन के साथ बातचीत किए होंगे, तो उस समय भी यही सोचे होंगे कि किसी को इस बात की बिल्कुल खबर नहीं होगी, कि उनकी बात एपस्टीन से हुई है और जब तक किसी को यह बात पता चलेगा तब तक समय काफी आगे निकल (बीत चुका) चुका हुआ होगा।

जिस धब्बे कि बात शिवानंद तिवारी अपने जापान (Japan) यात्रा में हरदीप के लिए सोच रहे थे, वो धब्बा देर से ही, लेकिन हरदीप के जीवन यात्रा पर लग ही गया। हालांकि हरदीप सिंह लगातार एपस्टीन फाइल वाले मामले में अपनी सफाई पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। देखना यह है कि समय के साथ उनके ऊपर लगा ये धब्बा, कभी धुल पाएगा, या फिर आजीवन उनके साथ यह धब्बा चिपका रहेगा।   

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कौन हैं शिवानंद तिवारी ?

शिवानंद तिवारी भारतीय राजनीति में समाजवादी नेता (Socialist Leader) के तौर पर जाने जाते हैं। शिवानंद तिवारी का जन्म बिहार (Bihar) के भोजपुर जिला में साल 1943 में हुआ था। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह (Chandrashekhar Singh) को जब भारतीय राजनीति में युवा तुर्क का प्रमुख चेहरा माना जाता था, उस समय शिवानंद तिवारी चंद्रशेखर सिंह के समाजवादी विचारों (Socialist Ideology) से प्रभावित हुए और बड़ी ही स्पष्टता से उनके साथ लम्बे समय तक काम किया था।

शिवानंद तिवारी ने चंद्र शेखर के बागी और जनपक्षधर वाली छवि का खुलकर समर्थन किया। बाद के दिनों में जनता दल के समय- समय पर कई हिस्से बनते चले गए। शिवानंद ने बाद में बिहार को अपना राजनीतिक कर्मभूमि मानते हुए समाजवादी दलों से अपना सम्बन्ध बनाए रखा।

शिवानंद कुछ समय नितीश और शरद यादव कि जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के साथ काम किया, बाद में लम्बे समय तक लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ बने रहे। शिवानंद तिवारी, साल 2008-2014 तक आरजेडी (RJD) की तरफ से राज्यसभा सांसद भी रहे चुके हैं। 

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