

यूजीसी के नए नियमों पर सवर्ण समाज में नाराज़गी, लेकिन भाजपा सहित अन्य दलों के सवर्ण सांसदों की चुप्पी पर सवाल; कारण—नियम बनाने वाली संसदीय समिति में भाजपा के सवर्ण सांसदों का बहुमत।
दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों पर बने नियम; 30 सदस्यीय समिति में भाजपा के 16 सांसद शामिल, विपक्ष के भी कई चेहरे रहे मौजूद।
2027 की जातिगत जनगणना और आगामी चुनावों से जुड़ा यूजीसी नियमों का राजनीतिक गणित, विश्लेषकों की नज़र इस पर कि भाजपा आगे हिंदुत्व या जातिगत एजेंडे में से किसे प्राथमिकता देगी।
हाल ही में यूजीसी के नए नियम आने के बाद सवर्ण समाज के नेताओं से सवाल किया जा रहा है कि इस मामले पर सवर्ण समाज के सांसद या विधायक आवाज क्यों नहीं उठाते हैं। सत्ताधारी दाल भाजपा के ही कार्यकर्ता इस मामले पर अपने नेताओं से नाराज दिखाई दिए। बहुत सारे कार्यकर्ताओं ने अपने नेताओं से नाराज़ होकर पार्टी तक छोड़ने की बात कह डाली। असल में भाजपा सहित अन्य दलों के सवर्ण नेताओं के न बोलने के पीछे की वजह ये है कि यूजीसी (UGC) ने जिस समिति की सिफारिश पर ये नियम बनाया है उसमें ज्यादातर सवर्ण सांसद ही हैं और इस समिति के अध्यक्ष मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह थे। समिति में कुल सदस्यों की संख्या तीस थी। यह समिति शिक्षा महिला बच्चे युवा और खेल (Parliamentary Standing Committee on Education, Women, Children, Youth and Sports) पर बनाई गई स्थायी समिति है।
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इस समिति में भाजपा (BJP) के अलावा अन्य विपक्षी दलों के संसद सदस्य शामिल थे। इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 9 सदस्य थे। समिति में दलों के अनुसार सदस्यों की संख्या कुछ इस प्रकार है -
भाजपा के 16 सदस्य, कांग्रेस के 4 सदस्य, समाजवादी पार्टी के 3 सदस्य, टीएमसी के 2 सदस्य, सीपीएम से 1 सदस्य, डीएमके से 1 सदस्य, आम आदमी पार्टी से 1 सदस्य, एनसीपी(शरद गुट) से 1 सदस्य, एनसीपी (अजित गुट) से एक सदस्य थे।
लोकसभा सदस्य जो समिति में शामिल रहे
1 अभिजित गंगोपाध्याय. भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल की तमलुक सीट से सांसद.
2. अमर शरदराव काले. एनसीपी (शरद पवार गुट) नेता. महाराष्ट्र की वर्धा सीट से सांसद.
3. अंगोमचा बिमोल अकोईजाम. कांग्रेस पार्टी के नेता और मणिपुर से सांसद.
4. बांसुरी स्वराज. भाजपा नेता और नई दिल्ली सीट से सांसद.
5. बृजमोहन अग्रवाल. छत्तीसगढ़ से भाजपा के नेता और रायपुर लोकसभा सीट से लोकसभा सांसद.
6. दग्गुबाती पूरनदेश्वरी. आंध्र प्रदेश में भाजपा की कद्दावर नेता और राजमुंद्र सीट से सांसद.
7. दर्शन सिंह चौधरी. भाजपा नेता और मध्य प्रदेश की होशंगाबाद सीट से सांसद.
8. डीएन कुरियाकोसे. कांग्रेस नेता और केरल की इडुक्की सीट से सांसद.
9. वर्षा एकनाथ गायकवाड़. कांग्रेस पार्टी की नेता और मुंबई की उत्तर-मध्य सीट से सांसद.
10. हेमांग जोशी. भाजपा नेता और गुजरात की वडोदरा सीट से सांसद.
11. जितेंद्र कुमार दोहरे. समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की इटावा सीट से सांसद.
12. कालिपाड़ा सरेन खेरवाल. तृणमूल कांग्रेस के नेता और पश्चिम बंगाल की झारग्राम सीट से सांसद.
13. कामाख्या प्रसाद तासा. भाजपा नेता और असम की काजीरंगा सीट से सांसद.
14. करण भूषण सिंह. भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट से सांसद.
15. रचना बनर्जी. तृमणूल कांग्रेस की नेता और पूर्व अभिनेत्री. पश्चिम बंगाल की हुगली सीट से सांसद.
16. राजीव राय. समाजवादी पार्टी के नेता. उत्तर प्रदेश की घोसी सीट से सांसद.
17. रविशंकर प्रसाद. भाजपा के कद्दावर नेता. बिहार की पटना साहिब सीट से सांसद.
18. संबित पात्रा. भाजपा के नेता और प्रवक्ता. ओडिशा की पुरी सीट से सांसद.
19. शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया. भाजपा की नेत्री. गुजरात की साबरकांठा सीट से सांसद.
20. थमिझाची थंगापांडियन उर्फ टी. सुमथि. तमिलनाडु में डीएमके की नेत्री. चेन्नै दक्षिण सीट से सांसद.
21. जियाउर्रहमान बर्क. समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की संभल सीट से सांसद.
राज्यसभा के सदस्य जो समिति में शामिल रहे
1 दिग्विजय सिंह. समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस के दिग्गज नेता. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, एमपी से ही राज्यसभा सांसद हैं.
2. भीम सिंह. यह भाजपा के नेता हैं और बिहार से राज्यसभा के सांसद हैं.
3. बिकास रंजन भट्टाचार्य. यह सीपीएम के नेता हैं और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद हैं.
4. घनश्याम तिवाड़ी. भाजपा नेता और राजस्थान कोटे से राज्यसभा सांसद.
5. रेखा शर्मा. भाजपा की नेता और हरियाणा से राज्यसभा सांसद. महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष.
6. सी. सदानंदन मास्टर. भाजपा नेता और केरल बीजेपी यूनिट के उपाध्यक्ष. केरल से राज्यसभा सांसद.
7. सिकंदर कुमार. भाजपा नेता और हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद. शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के कुलपति रह चुके हैं.
8. सुनेत्रा पवार. एनसीपी नेता और अजीत पवार की पत्नी. महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद.
9. स्वाती मालीवाल. आम आदमी पार्टी की पूर्व नेता, आम आदमी पार्टी से जुड़ी रहीं (अब आम आदमी पार्टी से सम्बन्ध नहीं )
समिति को ठीक ढंग से देखा जाए तो इसमें आधे से ज्यादा सदस्य भारतीय जनता पार्टी से हैं। यूजीसी के द्वारा बनाए गए नियम भविष्य के चुनाव पर भी असर डाल सकते हैं। शायद इसीलिए भारतीय जनता पार्टी के सदस्य इस मामले पर खुलकर बोलने से बचते रहे। वहीं जो सांसद समिति के सदस्य नहीं थे उन्होंने कुछ बयान दिए और मामले को शांत करने की अपील की।
बता दें कि साल 2027 में जातिगत जनगणना हेतु केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर दिया है। जातिगत जनगणना के पश्चात भारतीय राजनीति में बहुत कुछ बदलने के आसार दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक पार्टियाँ भविष्य के चुनाव को देखते हुए वर्तमान की नीतियों पर मुहर लगा रही हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि यूजीसी (UGC) के नियम भी साल 2027 में उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में होने वाले चुनाव में राजनीति के चौसर को तैयार करने में मदद करेंगे। वहीं भाजपा पर राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र बनी हुई है कि चुनावी मैदान में हिंदुत्व का राग अलापने वाली पार्टी अब जातिगत जनगणना के पश्चात् जातिगत मुद्दों का सहारा लेगी या फिर कोई और एजेंडा बनाएगी।
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