दोहरी नागरिकता मांग काफी समय से चल रही है। इसी बीच डॉ. मुनीश कुमार रायज़ादा ने एक अभियान चलाया है। उनके अभियान का नाम “भारतीयों के लिए दोहरी नागरिकता” है। इस अभियान के माध्यम से मुनीश कुमार रायज़ादा ने कहा, “भारतीयों के लिए दोहरी नागरिकता” एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। अमेरिका में 22 वर्षों से अधिक अनुभव वाले नियोनेटलॉजिस्ट डॉ. मुनीश कुमार रायज़ादा ने ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड को लेकर चल रही गलतफहमियों और भारतीयों के लिए दोहरी नागरिकता के अधिकार न होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
डॉ. मुनीश रायज़ादा ने कहा कि दुनिया के 150 से अधिक देशों में दोहरी नागरिकता की अनुमति है, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। भारत में विदेशी नागरिकता लेने पर एनआरआई को अपना भारतीय पासपोर्ट छोड़ना पड़ता है, जिससे उनकी औपचारिक भारतीय पहचान खत्म हो जाती है।
ओसीआई (ओवरसीज सिटिजन ऑफ़ इंडिया) के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे अक्सर ग्रीन कार्ड के समान समझा जाता है, लेकिन यह भारतीय नागरिकता नहीं देता। ओसीआई (OCI) धारकों के पास प्रमुख अधिकार नहीं होते, जैसे वोट देने का अधिकार, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी और कृषि भूमि खरीदने की क्षमता। इसलिए यह पूर्ण नागरिकता का विकल्प नहीं बन सकता।
उन्होंने वर्तमान व्यवस्था को अन्यायपूर्ण भी बताया और कहा कि विदेश में रहने वाले भारतीय हमेशा भारत को अपनी मातृभूमि मानते हैं। वे आर्थिक रूप से भारी योगदान करते हैं, जैसे रेमिटेंस और विदेशी निवेश, फिर भी उन्हें पूर्ण नागरिकता के अधिकार नहीं मिलते।
इसलिए इस अभियान के जरिए भारत सरकार से आग्रह किया गया है कि वह दोहरी नागरिकता को मान्यता दे और विदेश में रहने वाले लाखों भारतीयों के राष्ट्रीय अधिकार बहाल करे।
डॉ. रायज़ादा ने इस पहल का नेतृत्व जारी रखा है और उन्होंने सभी नागरिकों से इस आंदोलन में जुड़ने का आह्वान भी किया है।
उनके इस अभियान का नारा है , “भारत को अपने वैश्विक परिवार के साथ जोड़ें – अब दोहरी नागरिकता की मांग करें! भारत मेरा दिल, दो पासपोर्ट मेरा हक!”
उन्होंने एक लिंक के माध्यम से इस अभियान का हिस्सा बनने का आह्वान किया है।
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