

दोहरी नागरिकता की मांग तेज़: भारतीय मूल के लोगों के लिए समावेशी दोहरी नागरिकता की मांग वैश्विक स्तर पर तेज़ हो रही है। समर्थकों का मानना है कि OCI जैसी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं और पूर्ण नागरिक अधिकारों से भारत व प्रवासी समुदाय के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध मजबूत होंगे।
डॉ. मुनीश रायज़ादा का अभियान: भारतीय लिबरल पार्टी (BLP) के अध्यक्ष डॉ. रायज़ादा ने ‘डबल रूट्स, वन आइडेंटिटी’ अभियान शुरू किया है। अब तक 1,000 से अधिक लोग याचिका पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, जिसमें प्रवासी भारतीयों को पूर्ण दोहरी नागरिकता देने की मांग की गई है।
संवैधानिक बाधा और राजनीतिक बहस: भारतीय संविधान एकल नागरिकता का प्रावधान करता है, जबकि OCI सीमित अधिकार देता है। गोवा फ़ॉरवर्ड पार्टी और कांग्रेस के कुछ नेताओं (जैसे शशि थरूर) के बयानों के बाद यह मुद्दा अब एक नीतिगत और संवैधानिक बहस का रूप ले चुका है।
भारतीय मूल के लोगों के लिए समावेशी दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) की मांग को लेकर वैश्विक स्तर पर समर्थन बढ़ता दिखाई दे रहा है। समर्थकों की मांग है कि इससे भारत और उसके विशाल प्रवासी समुदाय के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे। वर्तमान में ओवरसीज़ सिटिजन ऑफ इंडिया (Overseas Citizen of India) जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि वे पूर्ण नागरिक अधिकारों का विकल्प नहीं हैं। अब यह मुद्दा नीतिगत बहस का रूप लेता जा रहा है।
भारतीय लिबरल पार्टी (BLP) के अध्यक्ष डॉ. मुनीश रायज़ादा ने दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) को लेकर एक मुहीम शुरू की है, दुनिया भर से 1,000 से अधिक लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर कर भारत सरकार से अपील की है कि प्रवासी भारतीयों को पूर्ण दोहरी नागरिकता का अधिकार दिया जाए। आइये समझते हैं कि डॉ. रायज़ादा ने क्या कहा है और ये दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) है क्या?
डॉ. मुनीश रायज़ादा, जो अमेरिका (America) में पिछले 23 वर्षों से कार्यरत एक बोर्ड-प्रमाणित नियोनैटोलॉजिस्ट (नवजात शिशु विशेषज्ञ) हैं, वर्तमान में भारतीय लिबरल पार्टी (BLP) के अध्यक्ष भी हैं। वे भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों के एक प्रमुख और सशक्त समर्थक माने जाते हैं। सितंबर 2025 में डॉ. रायज़ादा ने भारतीयों के लिए दोहरी नागरिकता के समर्थन में एक विश्वभर में अभियान की शुरुआत की।
इस अभियान का शीर्षक है ‘डबल रूट्स, वन आइडेंटिटी’ (भारत मेरा दिल, दो पासपोर्ट मेरा हक!)। इस पहल का उद्देश्य दुनिया भर में बसे भारतीयों को सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने मूल देश भारत से अपने संबंधों को बनाए रखते हुए वैश्विक स्तर पर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठा सकें।
दोहरी नागरिकता से आशय यह है कि एक व्यक्ति दो देश की नागरिकता (Citizenship) हासिल कर सकता है। भारत से बाहर बहुत सारे लोग रहते हैं। बहुत सारे लोग जो कई वर्षों से भारत से बाहर रह रहें हैं और इनका अपने देश के प्रति प्रेम सांस्कृतिक जुड़ाव बना रहता है और समय-समय पर भारत आना जाना बना रहता है।
ऐसे लोगों की मांग होती है कि उन्हें दोहरी नागरिकता मिलनी चाहिए। इससे उनको, दोनों देशों में रहने और काम करने का अधिकार, दोनों देशों के पासपोर्ट रखने की सुविधा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएँ संपत्ति खरीदने और व्यवसाय करने का अधिकार इत्यादि में सहूलियत मिल जाती है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद (5 -11 ) में नागरिकता का वर्णन है। भारतीय संविधान में एकल नागरिकता का प्रावधान किया गया है। एकल नागरिकता का तातपर्य यह है कि एक व्यक्ति, एक समय में, केवल एक ही देश का नागरिक हो सकता है। कोई व्यक्ति भारत के साथ किसी दूसरे देश की नागरिकता नहीं ले सकता है, अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है, तो फिर उसकी नागरिकता खत्म हो जाती है। वहीं भारतीय मूल के विदेशी लोगों के लिए ओसीआई (OCI) का प्रावधान किया गया है।
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ओसीआई (OCI) से आशय है, ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (Overseas Citizen of India), यह भारत सरकार द्वारा दिया गया एक विशेष दर्जा है, जो भारतीय मूल के कुछ विदेशी नागरिकों को प्रदान किया जाता है। बता दें कि OCI कार्ड धारक पूर्ण रूप से भारत का नागरिक नहीं माना जा सकता है, बल्कि इसके माध्यम से नागरिकता से जुड़ी सुविधाओं का एक विस्तार किया जाता है।
जिनके माता-पिता या फिर दादा-दादी में से कोई एक भारतीय नागरिक रहा हो तो उनलोगों हेतु OCI का प्रावधान किया गया है। या फिर जिनका विवाह किसी भारतीय नागरिक / OCI धारक से हुआ हो उनको भी इसका लाभ मिलता है। बता दें कि OCI धारक को भारत में आजीवन वीज़ा (Life-long Visa) की सुविधा होती है, परन्तु उनके पास सामान्य भारतीय नागरिक की भांति राजनीतिक अधिकार नहीं मिलते हैं। यहीं से OCI धारक और भारतीय नागरिक में अंतर हो जाता है।
दोहरी नागरिकता से दो देशों में रहने और काम करने की आज़ादी,निवेश, बैंकिंग और संपत्ति खरीदने में सहूलियत वैश्विक व्यवसाय को बढ़ावा मिले, इसके लिए दोहरी नागरिकता की मांग की जा रही है।
भारत में अलग अलग समय अनेक राजनीतिक दलों ने दोहरी नागरिकता की मांग उठाई है। गोवा फ़ॉरवर्ड पार्टी (Goa Forward Party) GFP (गोवा फ़ॉरवर्ड पार्टी) की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दोहरी नागरिकता की अनुमति का अनुरोध किया गया है, विशेषकर गोवा के लोगों के लिए।
उनका मानना है कि पुर्तगाली नागरिकता रखने वाले गोअन लोगों को भारत के साथ जुड़ाव बनाए रखने में समस्या आती है, इसलिए दोहरी नागरिकता की आवश्यकता है। कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं की तरफ से भी इस समस्या को संज्ञान में लेने की बात की गई है।
कांग्रेस पार्टी की तरफ से शशि थरूर ने कहा है कि बहुत से भारतीय जो विदेशों में रहते हैं, उन्होंने प्रैक्टिकल कारणों से दूसरे देश का पासपोर्ट लिया है, लेकिन उनका दिल भारत से जुड़ा हुआ है। ऐसे लोगों को भारत का पासपोर्ट रखने का अवसर मिलना चाहिए और इसके लिए उचित कानूनी फ़ॉर्मूला खोजा जाना चाहिए।
वहीं दिल्ली में सक्रीय, भारतीय लिबरल पार्टी की तरफ से दोहरी नागरिकता हेतु एक अभियान चलाया जा रहा है। अभियान की शुरुआत के बाद से इसे व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ है। अब तक इस याचिका पर 1,000 से अधिक हस्ताक्षर हो चुके हैं और भारत के भीतर तथा विदेशों में रहने वाले भारतीयों ने इसमें उत्साहपूर्वक भागीदारी की है। अभियान से जुड़े समर्थकों का कहना है कि दोहरी नागरिकता विभाजन नहीं, बल्कि एकता, अवसर और शक्ति का प्रतीक है।
डॉ. मुनीश रायज़ादा ने कहा कि आज के परस्पर जुड़े हुए विश्व में भारतीयों को अपने मूल और वैश्विक अवसरों के बीच किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि दोनों का साथ-साथ अस्तित्व संभव ही नहीं, बल्कि आवश्यक भी है।
अभियान की टैगलाइन “कनेक्टेड वर्ल्ड, कनेक्टेड आइडेंटिटीज़ – डबल रूट्स, वन आइडेंटिटी” एक ऐसे वैश्विक रूप से सक्रिय भारत की परिकल्पना को मज़बूती देती है, जहाँ नागरिक देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने महत्वपूर्ण संबंधों को बनाए रख सकें।
डॉ. रायज़ादा इस पहल का नेतृत्व करते हुए सभी नागरिकों से इस आंदोलन से जुड़ने का आह्वान कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “भारत को उसके वैश्विक परिवार से जोड़िए—अब दोहरी नागरिकता की माँग कीजिए।”
“भारत मेरा दिल, दो पासपोर्ट मेरा हक!”
भारत सरकार (Government of India) से इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई है। इन राजनीतिक दलों की दलीलों को भारत सरकार कितनी गंभीरता से स्वीकार करती है, ये आगे देखना बाकी है।