ममता बनर्जी पिछले 15 वर्षों से बंगाल की सत्ता में हैं। यदि वे 2026 में मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी को तीसरी बार (2016, 2021 और अब 2026 के संदर्भ में) हराने में सफल होती हैं, तो वे राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के लिए एक चुनौती बनकर सामने आ सकती हैं। यह जीत उनके लिए दिल्ली का रास्ता आसान कर सकती है।
पश्चिम बंगाल में चुनावी पारा सातवें आसमान पर है। बंगाल चुनाव में नरेंद्र मोदी ने जनसभाओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया है। मोदी बनाम ममता की लड़ाई का असर सिर्फ बंगाल चुनाव तक नहीं रहेगा। पश्चिम बंगाल चुनाव से लोकसभा चुनाव 2029 का रास्ता तय हो रहा है। इस चुनाव से यह तय हो जाएगा कि बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर इसके आगे चुनाव लड़ेगी या नहीं।
23 अप्रैल 2026 को बंगाल में मतदान होने वाला है। नेताओं से लेकर पत्रकारों तक सब लोग पश्चिम बंगाल के चुनावी त्यौहार का आनंद ले रहे हैं। ममता बनर्जी पिछले 15 साल से लगातार बंगाल की मुख्यमंत्री हैं। इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से देश की राजनीति को नई दिशा मिल सकती है। दरअसल, 2014 से लेकर 2024 तक बीजेपी नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लगभग सारे चुनाव लड़ी है। विपक्ष की तरफ से कोई मजबूत चेहरा नरेंद्र मोदी के सामने नहीं था। राहुल गांधी ने पिछले दस सालों में नरेंद्र मोदी का मुकाबला करने की कोशिश की है लेकिन अच्छी सफलता हाथ नहीं लगी है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के वक्त यह कयास लगाए जा रहे थे कि विपक्ष नरेंद्र मोदी को पटकनी दे सकता है लेकिन बहुत मामूली अंतर से नरेंद्र मोदी ने फिर से जीत हासिल की। लोकसभा चुनाव-2024 के बाद से नरेंद्र मोदी का चेहरा 2014 की तुलना में बहुत कमजोर साबित हुआ है। लोकसभा चुनाव 2024 में उनकी जीत के वजहों में से एक वजह यह भी था कि विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया गया था। लेकिन जो बीजेपी 2019 में 303 सीट जीतकर अकेले ही बहुमत में थी वह 2024 के लोकसभा चुनाव में 240 सीट पर सिमटकर रह गई।
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल चुनाव-2026 में पूरी ताकत लगा दी है। नरेंद्र मोदी के सामने ममता ने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ तो ममता बंगाल में चुनाव जीतने के लिए हर रणनीति पर काम रही हैं तो दूसरी तरफ वह अपने लिए दिल्ली का रास्ता भी तैयार कर रही हैं। मोदी के नाम पर बंगाल में बीजेपी चुनाव लड़ रही है। अगर पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में बीजेपी को सफलता हासिल नहीं होती तो यह तीसरी बार होगा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रथ बंगाल में ममता बनर्जी के सामने नतमस्तक हो जाएगा अर्थात नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह तीसरी बार होगा जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी बंगाल में ममता के सामने हारेगी। इससे पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में यह संदेश जाएगा कि नरेंद्र मोदी के मुकाबले ममता एक मजबूत चेहरा हैं। अगर ममता बनर्जी यह चुनाव हारती हैं तो फिर उनके लिए दिल्ली का रास्ता थोड़ा मुश्किल हो जाएगा और नरेंद्र मोदी फिर से एक मजबूत चेहरा साबित होंगे जिसका असर 2029 के लोकसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है।
ममता बनर्जी अगर पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 हार जाती हैं तो फिर देश की राजनीति में उनका कद घट सकता है। वहीं अगर वह चुनाव जीतने में सफल होती हैं तो देश की अन्य विपक्षी पार्टियां मोदी का मुकाबला करने के लिए ममता पर अपनी सहमति दर्ज करा सकते हैं। पूरे देश में ममता बनर्जी एकमात्र वरिष्ठ राजनेता हैं जो नरेंद्र मोदी को चुनाव में बार-बार शिकस्त दे रही हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव, बिहार से राष्ट्रीय जनता दल, तमिलनाडु से स्टालिन, तेलंगाना से KCR, महाराष्ट्र में उद्धव व शरद पवार से ममता बनर्जी के संबंध अच्छे हैं। कुछ राजनीतिक दल नॉन कांग्रेस और नॉन बीजेपी गठबंधन सरकार की वकालत करते रहे हैं। यदि कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियां ममता के नाम सहमत नहीं होती हैं तो ममता तीसरा फ्रंट तैयार कर सकती हैं जो बिना कांग्रेस का हो सकता है लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस बाद में उनके नाम पर सहमत हो जाएगी क्योंकि सोनिया गांधी से ममता बनर्जी के संबंध आज भी बरकरार हैं।
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बीजेपी अगर बंगाल चुनाव 2026 जीतने में सफल रही तो पूरे देश में दो प्रकार का संदेश जाएगा। एक संदेश यह जाएगा कि बीजेपी में नरेंद्र मोदी का चेहरा आज भी उतना ही कारगर है जितना पहले था क्योंकि ममता बनर्जी 15 साल से वहाँ मुख्यमंत्री हैं और मोदी के सामने बड़ी चुनौती हैं। अगर ममता बनर्जी चुनाव जीतने में सफल होती हैं तो फिर इसका प्रचार अन्य राज्यों में होगा जैसे कि उत्तर प्रदेश चुनाव-2027, गोवा विधानसभा चुनाव-2027, पंजाब विधानसभा चुनाव-2027। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में बीजेपी का ग्राफ लगातार गिर रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 80 में से महज 33 सीटों पर ही जीत हासिल हुई। बीजेपी के हाथ से राम मंदिर वाली अयोध्या (फैजाबाद) सीट भी निकल गई। इस सीट पर समाजवादी पार्टी के दलित प्रत्याशी अवधेश प्रसाद ने बीजेपी को हराकर जीत हासिल की।
ममता बनर्जी ने अभी तक बंगाल में अपना वोट प्रतिशत बरकरार रखा है। 2014 में नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने, इसके बावजूद बंगाल में ममता का वोट प्रतिशत लगातार बढ़ता जा रहा है। लोकसभा चुनाव के हिसाब से देखा जाए तो 2014 में ममता का वोट प्रतिशत बंगाल में लगभग 39.8% था। यह वोट प्रतिशत 2019 में बढ़कर 43.3% और 2024 में बढ़कर 46.2% हो गया। वहीं विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2016 में 44.9% और 2021 में 48.0% ममता बनर्जी का वोट प्रतिशत दिखाई पड़ता है। 2014 और 2019 में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता चरम पर थी इसके बावजूद बंगाल में ममता बनर्जी के सामने नरेंद्र मोदी का जादू नहीं चल सका। दूसरी तरफ बंगाल में ममता का ग्राफ लगातार बढ़ता हुआ दिखाई दिया है। अगर इस बार भी बंगाल में बीजेपी चुनाव जीतने में असफल होती है तो ममता बीजेपी के सामने राष्ट्रीय स्तर पर एक राजनीतिक चुनौती बन जाएंगी। इसके बाद इस बात में कोई संदेह नहीं है कि उत्तर प्रदेश से अखिलेश यादव सहित देश के अन्य विपक्षी दलों का साथ लेकर ममता बनर्जी 2029 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कड़ी टक्कर देते हुए नजर आ सकती हैं। हालांकि बंगाल चुनाव परिणाम 4 मई 2026 को आएगा जिसके बाद देश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होगा।
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