ओवैसी vs हुमायूं! गठबंधन टूटते ही बदल गया बंगाल चुनाव का खेल, TMC या BJP... जानें किसे होगा फायदा?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में मोदी बनाम ममता की लड़ाई को हुमायूँ और ओवैसी ने एक नया मोड़ दे दिया है। ओवैसी ने हुमायूँ से अपना गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया है। इसका असर बंगाल चुनाव पर पड़ेगा।
हुमायूँ कबीर, ओवैसी
9 अप्रैल 2026 को TMC ने हुमायूँ कबीर का एक वीडियो वायरल कर दिया जिसके माध्यम से हुमायूँ कबीर को बीजेपी का एजेंट बता दिया गया। ओवैसी ने 10 अप्रैल 2026 को हुमायूँ से अपना गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया। दो मुस्लिम नेताओं के बीच मुस्लिम मतदाता अब दुविधा में हैं। AI Generated
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में मोदी बनाम ममता की लड़ाई को हुमायूँ और ओवैसी ने एक नया मोड़ दे दिया है। शुरू में दोनों ने गठबंधन का फैसला किया और साथ में चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। हुमायूँ कबीर का एक वीडियो वायरल हुआ था। TMC ने आरोप लगाया था कि हुमायूँ ने बंगाल में मुसलमानों को भड़काने के लिए बीजेपी से 1000 करोड़ रुपए लिए थे। इसके बाद ओवैसी ने हुमायूँ से अपना गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया है। आइए समझते हैं हुमायूं कबीर और ओवैसी के अलग-अलग चुनाव लड़ने से बंगाल की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा

हुमायूँ-ओवैसी एकसाथ लड़ते तो क्या होता ?

हुमायूँ कबीर ने 6 दिसंबर 2025 को बाबरी मस्जिद की नींव रखी। कबीर द्वारा उठाया गया यह कदम ममता बनर्जी के लिए घातक साबित हो रहा था। हुमायूँ कबीर द्वारा लगातार ऐसा बयान दिया जा रहा था कि बंगाल में धार्मिक ध्रुवीकरण प्रबल होते दिखाई दे रहा था। हुमायूँ का समर्थन ओवैसी ने किया और बंगाल के चुनाव में साथ मिलकर काम करने का वादा कर दिया।

चुनाव नजदीक आने पर 22 मार्च 2026 को हैदराबाद में हुमायूँ और ओवैसी ने गठबंधन करके चुनाव लड़ने का ऐलान किया। इसके बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि बंगाल चुनाव 2026 में मुस्लिम मतदाताओं के बीच हुमायूँ और ओवैसी की लोकप्रियता बढ़ेगी। बीजेपी इस पूरे प्रकरण पर गिद्ध की तरह नजर लगाकर बैठी थी। बीजेपी ने ओवैसी, हुमायूँ और  मुर्शिदाबाद वाली बाबरी मस्जिद को बंगाल चुनावी अभियान का अभिन्न हिस्सा बनाना शुरू कर दिया। बंगाल में धार्मिक ध्रुवीकरण प्रबल होते दिखाई दे रहा था।

बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी, अमित शाह ने बंगाल के राजनीतिक फिजाओं में बाबरी मस्जिद का मुद्दा उछाल दिया था। यह कयास लगाए जा रहे थे कि इससे बीजेपी को बहुत फायदा हो रहा था क्योंकि ध्रुवीकरण जितना प्रबल होता है बीजेपी को उतना अधिक चुनाव में फायदा होता है।

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हुमायूँ-ओवैसी गठबंधन टूटने से बंगाल चुनाव पर असर ?

ओवैसी और हुमायूँ के गठबंधन को बंगाल में मुस्लिम मतदाताओं ने एक अलग मुस्लिम फ्रंट के रूप में देखना शुरू कर दिया था। मुस्लिम मतदाताओं का रुझान हुमायूँ कबीर की तरफ बढ़ रहा था। बीजेपी के लिए TMC को कमजोर करना अब आसान हो रहा था क्योंकि मुस्लिम मतदाता धीरे-धीरे TMC से अपनी निगाहें फेरना शुरू कर दिए थे। इसका असर मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में देखने को मिल रहा था।

इसी बीच 9 अप्रैल 2026 को TMC ने हुमायूँ कबीर का एक वीडियो वायरल कर दिया जिसके माध्यम से हुमायूँ कबीर को बीजेपी का एजेंट बता दिया गया। इस वीडियो में हुमायूँ कबीर यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं है कि उन्होंने मुस्लिमों को भड़काने के लिए बीजेपी से 1000 करोड़ रुपए लिए थे। यह मामला जैसे ही प्रकाश में आया ओवैसी ने 10 अप्रैल 2026 को हुमायूँ से अपना गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया।

अब हुमायूँ और ओवैसी अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। TMC दोनों मुस्लिम नेताओं को अलग करने की रणनीति बहुत दिनों से बना रही थी क्योंकि दोनों ही उसके लिए सिरदर्द बनते जा रहे थे। दोनों को अलग करने में TMC सफल भी हो गई। हुमायूँ कबीर को समर्थन देने वाले मुस्लिम मतदाताओं का विश्वास डगमगाने लगा है क्योंकि उनको यह एहसास होने लगा है कि हुमायूँ बीजेपी की उपज हैं और ओवैसी ने अलग होकर कहीं न कहीं इसपर अप्रत्यक्ष तौर पर मुहर लगा दिया है।

ओवैसी की पार्टी AIMIM ने बंगाल में महज 11 सीट पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। दूसरी तरफ हुमायूँ कबीर ने ओवैसी से गठबंधन टूटने के बाद 149 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया है। हुमायूँ खुद रेजीनगर (Rejinagar) और नवादा से चुनाव लड़ रहे हैं। दो मुस्लिम नेताओं के बीच मुस्लिम मतदाता अब दुविधा में हैं।

मुस्लिम मतदाताओं की दुविधा का फायदा TMC उठा रही है और ममता ने बंगाली अस्मिता के नाम पर बीजेपी को हराने के लिए वोट की अपील कर दिया है। अगर मुस्लिम मतदाता ओवैसी और हुमायूँ को वोट करेंगे तो TMC के वोट बैंक में सेंध लगेगी और बीजेपी को फायदा हो सकता है। अगर मुस्लिम मतदाता अपनी दुविधा को किनारे रखते हुए बंगाली अस्मिता के नाम पर वोट करेंगे तो TMC के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाने वाली बीजेपी की रणनीति असफल हो सकती है और TMC को इसका फायदा हो सकता है। 

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