रात का सन्नाटा, पुरानी इमारत की लंबी गलियां और हर तरफ पसरा रहस्यमयी माहौल...कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी (National Library) सिर्फ किताबों का खजाना ही नहीं, बल्कि भूत-प्रेतों और अनसुलझे रहस्यों की कहानियों के लिए भी मशहूर है। कई लोगों का दावा है कि रात के समय यहां अजीब आवाजें सुनाई देती हैं, कदमों की आहट महसूस होती है और कुछ अनदेखी शक्तियां आसपास मौजूद होने का एहसास कराती हैं। आखिर क्या है इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी का खौफनाक सच? क्या वाकई यहां किसी आत्मा का साया है या फिर ये सिर्फ लोगों की कल्पना है? आइए जानते हैं कोलकाता नेशनल लाइब्रेरी से जुड़ी रहस्यमयी कहानियों और उनके पीछे की सच्चाई।
कोलकाता के बेल्वेडियर एस्टेट (Belvedere Estate) में स्थित नेशनल लाइब्रेरी (National Library) न केवल भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक लाइब्रेरी है, बल्कि ऐतिहासिक धरोहर और रहस्यों का एक अनूठा संगम भी है। इस आलीशान इमारत का इतिहास करीब 250 साल पुराना है, जो मूल रूप से बंगाल के नवाब मीर जाफ़र (Mir Jafar, the Nawab of Bengal) का हुआ करता था।
बाद में उन्होंने इसे भारत के पहले गवर्नर-जनरल वारन हेस्टिंग्स (Warren Hastings) को सौंप दिया और ब्रिटिश काल में यह लेफ्टिनेंट गवर्नरों का आधिकारिक निवास स्थान बन गया। ज्ञान के इस केंद्र की नींव साल 1836 में 'कलकत्ता पब्लिक लाइब्रेरी' (Culcutta Public Library) के रूप में रखी गई थी, जिसे आगे चलकर साल 1903 में लॉर्ड कर्जन ने 'इम्पीरियल लाइब्रेरी' (The Imperial Library) में मिला दिया और इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया। देश की आजादी के बाद, साल 1948 में इसका नाम बदलकर 'नेशनल लाइब्रेरी' किया गया और 1953 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने इसे पूरी तरह से राष्ट्र को समर्पित कर दिया।
इतने लंबे और इतिहास के कारण इस इमारत के साथ कई रहस्यमयी और भूतिया कहानियां (Ghost Stories) भी जुड़ गईं, जिसने स्थानीय लोगों और यहां काम करने वाले कर्मचारियों को हमेशा कौतूहल में रखा है। लोगों और स्टाफ का मानना है कि रात के सन्नाटे में लाइब्रेरी के खाली गलियारों में किसी के चलने की रहस्यमयी आवाजें सुनाई देती हैं। एक बेहद लोकप्रिय धारणा यह भी है कि वारन हेस्टिंग्स या लॉर्ड मेटकॉफ की पत्नी (लेडी मेटकॉफ) की आत्मा आज भी यहां भटकती है, और देर रात तक काम करने वाले कई बाबुओं व छात्रों ने दावा किया है कि उन्हें अपनी पीठ के पीछे किसी की मौजूदगी या ठंडी सांसें महसूस होती हैं। इस रहस्य को तब और हवा मिली जब साल 2010 में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) को इस इमारत के भीतर एक ऐसा गुप्त कमरा मिला जिसका कोई दरवाजा या खिड़की नहीं थी हालांकि बाद में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यह केवल इमारत की नींव को मजबूत रखने वाला एक ढांचा था। आज यह लाइब्रेरी लाखों दुर्लभ किताबों और ऐतिहासिक दस्तावेजों का घर है, जहां दिन में ज्ञान का समंदर बहता है और रात होते ही इतिहास की पुरानी कहानियां जिंदा हो उठती हैं।
वर्तमान समय में भी नेशनल लाइब्रेरी (National Library) को लेकर भूतिया किस्से सुनने को मिल जाते हैं, लेकिन अब तक किसी वैज्ञानिक जांच या आधिकारिक रिपोर्ट में यहां भूत-प्रेत होने की पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि विशाल और सुनसान इमारत, पुरानी वास्तुकला, कम रोशनी वाले गलियारे और सदियों पुरा इतिहास लोगों के मन में डर पैदा कर सकता है। फिर भी रहस्य प्रेमियों और पैरानॉर्मल कहानियों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह जगह आज भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि दिन में हजारों पाठक यहां अध्ययन करने आते हैं, लेकिन रात होते ही इसकी भूतिया कहानियां फिर से चर्चा में आ जाती हैं, जिससे नेशनल लाइब्रेरी का रहस्य आज भी लोगों के बीच जिंदा है। [SP]