केरल में 9 अप्रैल 2026 को मतदान होने वाला है। दक्षिण भारत के चुनावी महाभारत में उत्तर भारतीय नेताओं का सियासी प्रवेश शुरू हो चुका है।
लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की तरफ से आरजेडी को 3 सीटें मिली हैं। एक निर्दलीय उम्मीदवार को आरजेडी ने अपना समर्थन दिया है।
31 मार्च 2026 को केरल पहुंचकर तेजस्वी ने सुबह 1 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से मुलाकात की। इसके बाद पोन्नानी (Ponnani) में माकपा प्रत्याशी एम.के. सकीर के समर्थन में एक रैली को संबोधित किया।
केरल में 9 अप्रैल 2026 को मतदान होने वाला है। चुनाव को लेकर सियासी दलों में खींचतान चल रही है। बयानबाजी का सिलसिला जारी है। दक्षिण भारत के चुनावी महाभारत में उत्तर भारतीय नेताओं का सियासी प्रवेश शुरू हो चुका है। बिहार के तेजस्वी यादव ने केरल में एलडीएफ को समर्थन देने के लिए चुनावी रैलियों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया है। तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी केरल चुनाव-2026 में LDF का हिस्सा है। गठबंधन में कुछ सीटें आरजेडी के खाते में आई हैं और आरजेडी ने केरल में अपने उम्मीदवार भी खड़े किए हैं।
केरल में आरजेडी ने 3 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारा है। दरअसल, लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की तरफ से आरजेडी को 3 सीटें मिली हैं। एक निर्दलीय उम्मीदवार को आरजेडी ने अपना समर्थन दिया है। आरजेडी के खाते में वटकरा (Vadakara), कूथुपरंबा (Koothuparamba), कलपेट्टा (Kalpetta) विधानसभा आया है। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट गठबंधन में शामिल आरजेडी ने इन सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।
वटकरा (Vadakara) विधानसभा से एम.के. भास्करन, कूथुपरंबा (Koothuparamba) विधानसभा से पी.के. प्रवीण, कलपेट्टा (Kalpetta) विधानसभा से पी.के. अनिल कुमार को आरजेडी ने अपने उम्मीदवार घोषित किया है। भास्करन के सामने यूडीएफ की तरफ से के.के. ऱेमा (K.K. Rema) को RMPI ने अपना उम्मीदवार बनाया है। कूथुपरंबा (Koothuparamba) विधानसभा में आरजेडी के पी.के. प्रवीण के सामने जयंती राजन (Jayanthi Rajan) को IUML ने उम्मीदवार घोषित किया है, वहीं कलपेट्टा (Kalpetta) विधानसभा में आरजेडी के पी.के. अनिल कुमार के सामने कांग्रेस के टी. सिद्दीकी (T. Siddique) चुनाव लड़ रहे हैं। तीनों सीटों पर लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के आरजेडी उम्मीदवारों और यूडीएफ के उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
दरअसल, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के केरल राज्य महासचिव सलीम मदावूर (Salim Madavoor) इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार हैं। कोडुवल्ली (Koduvally) विधानसभा इस बार के चुनाव में बहुत चर्चित विधानसभा सीट बन चुका है। सलीम मदावूर (Salim Madavoo) एक साफ सुथरी छवि वाले नेता माने जाते हैं। सलीम मदावूर (Salim Madavoo) पेशे से शिक्षक हैं। कोडुवल्ली (Koduvally) विधानसभा में लेफ्ट को मुस्लिम मतदाता बहुत कम समर्थन देते हैं।
सोची समझी रणनीति के तहत आरजेडी के महासचिव सलीम मदावूर (Salim Madavoor) को लेफ्ट ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतारा है। सलीम मदावूर (Salim Madavoo) के सामने मुस्लिम लीग के उम्मीदवार पी.के. फिरोज (P.K. Firoz) इस चुनाव में कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे हैं। सलीम मदावूर (Salim Madavoo) की पकड़ स्थानीय नेताओं के बीच जबरदस्त है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि उनकी उम्मीदवारी की पहचान मुस्लिम लीग से नाराज और लेफ्ट गठबंधन से तटस्थ नेता के तौर पर साबित हो रही है जिसका फायदा चुनाव में मिल सकता है।
बता दें कि मुस्लिम मतदाता पारंपरिक रूप से कांग्रेस समर्थित यूडीएफ को वोट देते आए हैं लेकिन इस चुनाव में लेफ्ट ने रणनीति के तहत इस सीट को जीतने में पूरी ताकत लगा दी है।
दरअसल, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को केरल में साझेदार बनाया गया है क्योंकि यूपी और बिहार से बहुत सारे लोग केरल में रहते हैं। उत्तर भारतीय लोगों को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के माध्यम से लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट अपनी तरफ खींचने का प्रयास कर रहा है।
तेजस्वी यादव गठबंधन धर्म निभाने में पीछे नहीं हैं। 31 मार्च 2026 को केरल पहुंचकर तेजस्वी ने 1 अप्रैल 2026 को सुबह मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से मुलाकात की। इसके बाद पोन्नानी (Ponnani) में माकपा प्रत्याशी एम.के. सकीर के समर्थन में एक रैली को संबोधित किया। इसके साथ ही उन्होंने मलप्पुरम में रोडशो किया और वहाँ पर उत्तर भारत के मजदूरों एवं स्थानीय लोगों से दो चार हुए। बिहार चुनाव में मिली हार से सबक लेकर तेजस्वी यादव अब लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के सहारे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को नए सिरे से खड़ा करना चाहते हैं।
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