राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर (Jantar Mantar in Delhi)  Ai
दिल्ली

चाय-पकोड़े नहीं बेचने, छाती पर गोली खाएंगे!' NEET पेपर लीक पर जंतर-मंतर पर फूटा युवाओं का आक्रोश

20 जुलाई की सुबह से ही राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर (Jantar Mantar in Delhi) युवाओं के आक्रोश का केंद्र बना हुआ था। NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धांधली तथा सिलसिलेवार पेपर लीक के विरोध में देश भर से हजारों छात्र और युवा दिल्ली में एकत्रित हुए थें।

Author : Sarita Prasad

20 जुलाई की सुबह से ही राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर (Jantar Mantar in Delhi) युवाओं के आक्रोश का केंद्र बना हुआ था। NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धांधली तथा सिलसिलेवार पेपर लीक के विरोध में देश भर से हजारों छात्र और युवा दिल्ली में एकत्रित हुए थें। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Education Minister Dharmendra Pradhan) का इस्तीफा और पूरी शिक्षा प्रणाली में पारदर्शी सुधार की थी। 20 जुलाई को संसद मार्च होना था और इसलिए जंतर मंतर पर युवाओं की भीड़ मौजूद थी। जंतर मंतर (Jantar Mantar) की इन्हीं परिस्थितियों को जानने और समझने के लिए न्यूज़ ग्राम की टीम (Newsgram Team) 20 जुलाई को जंतर मंतर पहुंची और वहां के कुछ आंदोलनकारी और युवाओं से बातचीत भी की। तो लिए आपको हम थोड़े विस्तार से बताते हैं कि कल जंतर मंतर में क्या-क्या हुआ और वहां के युवाओं का क्या कहना है।

20 जुलाई: ग्राउंड जीरो का आंखों देखा हाल

20 जुलाई को जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर सुबह से ही माहौल काफी गरमाया हुआ था। दिल्ली के जीटीपी नगर से आए युवा गौरव के अनुसार, प्रदर्शनकारी सुबह 6:00 बजे से ही जुटने शुरू हो गए थे। लेकिन सुबह 8:00 बजते ही प्रशासन ने इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह ठप करने के लिए इलाके में जैमर लगा दिए। संसद मार्ग की ओर जाने वाले रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था और बहुस्तरीय (multi-level) बैरिकेडिंग कर दी गई थी, ताकि छात्रों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

इस कड़े पहरे के बीच आंदोलन के मुख्य दीपके (Deepke) और अन्य प्रतिनिधियों ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से संवाद स्थापित करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि इस पूरे आंदोलन का मुख्य मकसद सरकार से सीधे बातचीत करना है; यदि बातचीत से हल निकलता है तो ठीक, वरना संसद मार्च की योजना पर आगे बढ़ा जाएगा। हालांकि, माहौल तब और बिगड़ गया जब छात्रों ने पुलिस पर बर्बरता और तानाशाही रवैये के गंभीर आरोप लगाए।

प्रदर्शन स्थल पर मौजूद युवाओं ने दावा किया कि संसद की तरफ बढ़ते प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई छात्रों के हाथ, पैर और कमर में गंभीर चोटें आईं। एक प्रदर्शनकारी का तो मांस फटने तक का दावा किया गया। पुलिस बल प्रयोग और वाटर कैनन के खतरे के बावजूद, आक्रोशित छात्रों का मनोबल कम नहीं हुआ और वे अपनी मांगों पर अड़े रहे।

प्रदर्शनकारियों की आवाज: "यह पूरे देश के भविष्य का सवाल है"

जंतर-मंतर पर एकत्रित हुए युवाओं के मन में व्यवस्था के खिलाफ गहरा आक्रोश और अपनी मांगों को लेकर अटूट संकल्प साफ दिखाई दिया। दिल्ली के जीटीपी नगर से पहुंचे युवा गौरव ने पेपर लीक के मामले में अपनी राय रखतें हुए को कहा कि भले ही किसी ने खुद NEET की परीक्षा दी हो या न दी हो, यह मुद्दा हर नागरिक से जुड़ा है। उनका तर्क था कि यदि रिश्वत और पेपर लीक के दम पर अयोग्य लोग डॉक्टर या अधिकारी बनेंगे, तो कल वे पूरे समाज का इलाज करेंगे और व्यवस्था चलाएंगे, जिससे अंततः पूरे देश का नुकसान होगा।

प्रदर्शन स्थल पर 21 दिनों से लगातार बैठ रहे युवाओं का दर्द और गुस्सा तब और छलक पड़ा जब उन्होंने प्रशासन की अनदेखी पर तीखे सवाल उठाए। एक प्रदर्शनकारी ने कड़े शब्दों में कहा, "हमें चाय-पकोड़े नहीं बेचने, अपने बच्चों को पढ़ाना-लिखाना है।" महीनों की मेहनत पानी में मिलने और शासन द्वारा सुनवाई न होने से निराश छात्रों ने साफ कर दिया कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे हक के लिए छाती पर गोली खाने तक को तैयार हैं। इन युवाओं की एकजुट मांग है कि नाकाम शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफा दें, पेपर लीक के जिम्मेदार दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और पूरी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी सुधार किए जाएं।

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आज का माहौल

आज भी जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर तनाव और संकल्प दोनों चरम पर हैं। 20 जुलाई को संसद मार्च रोकने के लिए हुए पुलिस बल प्रयोग, बैरिकेडिंग और इंटरनेट ब्लैकआउट के बाद भी छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है। इसके बावजूद छात्रों ने विरोध स्थल पर नए सिरे से बैनर-पोस्टर लगा दिए हैं और अपनी रणनीति को मजबूत कर रहे हैं।

इस आंदोलन को सबसे बड़ा बल शिक्षाविद और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) के अनशन से मिला है। अनशन स्थल से अस्पताल ले जाए जाने के बावजूद सोनम वांगचुक का स्पष्ट संदेश रहा है: "मुझे मत बचाओ, इस मुद्दे और देश के युवाओं के भविष्य को बचाओ''। जब तक परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय नहीं होती और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, यह लड़ाई जारी रहेगी।" वहीं आंदोलन की अगुवाई कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Deepke) ने चेतावनी दी है कि प्रशासन की लाठियां और पुलिस की बर्बरता युवाओं के हौसले को नहीं तोड़ सकती।

पूरे भारत से युवाओं का जंतर-मंतर पर जुटना लगातार जारी है। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होंगी, यह आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।

जंतर-मंतर पर उमड़ा युवाओं का यह सैलाब इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यह लड़ाई केवल NEET या किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। यह देश के पूरे शिक्षा तंत्र की साख और युवाओं के भविष्य में खोते विश्वास की बहाली का सवाल है। महीनों की कड़ी मेहनत के बाद जब पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो उससे न केवल छात्रों का मनोबल टूटता है, बल्कि पूरे समाज में अयोग्यता के पनपने का खतरा भी पैदा होता है। [SP]