

राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर (Jantar Mantar) कई प्रदर्शनों का गवाह बनता रहता है, लेकिन पिछले 20 दिनों से यहाँ जो कुछ भी घट रहा था, वह आम विरोध प्रदर्शनों से बिल्कुल अलग था। न्यूज़ग्राम की टीम (Newsgram Team) सीधे जंतर-मंतर के उसी ग्राउंड जीरो पर पहुँची, यह देखने और समझने कि आखिर हमारे देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य किस मोड़ पर खड़ा है? आखिर क्यों देश के सबसे बड़े इनोवेटर, शिक्षाविद् और इंजीनियर सोनम वांगचुक (Educationist and Engineer Sonam Wangchuk) को कड़ाके की धूप और उमस के बीच 20 दिनों तक 'आमरण अनशन' (भूख हड़ताल) पर बैठना पड़ा?
जब हमारी टीम वहां पहुँची, तो हवा में गुस्सा भी था और एक गहरा दर्द भी। दर्द इस बात का कि जो आवाज सीधे देश के कर्णधारों तक पहुंचनी चाहिए थी, वह जंतर-मंतर के टेंटों और बैरिकेड्स के बीच ही घुटकर रह गई है। आखिर सरकार के कानों तक यह चीख क्यों नहीं पहुंच रही?
लद्दाख की बर्फीली वादियों में पानी के संकट को दूर करने के लिए 'आइस स्तूप' ('Ice Stupa') बनाने वाले और देश को आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाने वाले इंजीनियर सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) आज दिल्ली की सड़कों पर किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं बैठे थे। न्यूज़ग्राम की टीम ने देखा कि वहां मौजूद हर छात्र की आंखों में अपने भविष्य को लेकर डर और आक्रोश था।
सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) और देश के कोने-कोने से आए सैकड़ों छात्र पिछले 20 दिनों से सिर्फ तीन बुनियादी मांगें कर रहे थे:
NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए ऐतिहासिक पेपर लीक और धांधलियों के खिलाफ सख्त एक्शन।
देश के युवा और होनहार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले परीक्षा सिस्टम में बड़ा न्यायिक सुधार।
इन बड़ी नाकामियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
लेकिन न्यूज़ग्राम की पड़ताल में यह कड़वा सच सामने आया कि 20 दिनों तक एक बुजुर्ग देशभक्त का शरीर गलता रहा, उनका वजन 20% तक कम हो गया, लेकिन सत्ता के गलियारों में बैठी सरकार ने इस आवाज को पूरी तरह अनसुना कर दिया।
न्यूज़ग्राम की टीम ने जंतर-मंतर पर कड़कड़ाती धूप और पुलिस के कड़े पहरे के बीच बैठे उन छात्रों से बात की, जो देश के कोने-कोने से यहाँ पहुंचे थे। इस अनशन और सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) के समर्थन को लेकर छात्रों का क्या कहना है, पढ़िए ग्राउंड जीरो से उनके सीधे शब्द:
1. अमन कुमार (नीट एस्पिरेंट, मोतिहारी, बिहार)
"हमारे माता-पिता अपनी जमीन गिरवी रखकर, पेट काटकर हमें दिल्ली-कोटा पढ़ाते हैं। हम दिन-रात एक करके 650-680 नंबर लाते हैं और पता चलता है कि पेपर पहले ही लीक हो चुका था। जब हमारा सिस्टम और नेता चुप थे, तब सोनम वांगचुक सर ने हमारे इस दर्द को समझा। वो हमारे असली हीरो हैं। अगर वो 20 दिन हमारे भविष्य के लिए भूखे रह सकते हैं, तो हम पीछे कैसे हट जाएं?"
2. प्रिया शर्मा (छात्रा और छात्र अधिकार कार्यकर्ता, दिल्ली यूनिवर्सिटी)
"सरकार को लगता है कि यह सिर्फ कुछ हजार बच्चों का प्रदर्शन है। नहीं! यह इस देश के करोड़ों युवाओं के भरोसे की हत्या है। सोनम वांगचुक सर लद्दाख में पर्यावरण की लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन जब उन्होंने देखा कि देश का युवा सड़कों पर रो रहा है, तो वो अपना घर छोड़कर हमारे लिए अनशन पर बैठ गए। आज सरकार ने उन्हें जबरन उठा तो लिया, लेकिन वो हमारे दिलों से उनकी प्रेरणा को कैसे उठाएंगे?"
3. राहुल यादव (छात्र, मुखर्जी नगर)
"सुबह जब पुलिस सोनम सर को ले जा रही थी, तो हमारी रूह कांप गई कि एक बुजुर्ग देशभक्त के साथ ऐसा बर्ताव? लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं। सरकार सोचती है कि वांगचुक सर को अस्पताल में बंद करके आंदोलन खत्म हो जाएगा, तो यह उनकी भूल है। अब हर छात्र खुद सोनम वांगचुक बन चुका है। हम 20 जुलाई के संसद मार्च में और दोगुनी ताकत से शामिल होंगे।"
जब आवाज को दबाने के सारे हथकंडे नाकाम रहे, तो आज यानी 18 जुलाई की सुबह करीब 7 बजे दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने जो किया, उसने लोकतंत्र के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने अचानक पूरे मंच को सफेद चादरों से ढक दिया ताकि कोई वीडियो न बना सके। इसके बाद, 20 दिनों के अनशन से मरणासन्न हो चुके सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल भेज दिया गया।
वहां मौजूद 'कॉकरोच जनता पार्टी' ('Cockroach Janata Party') के युवाओं और छात्रों ने जब शांतिपूर्ण ढंग से इसका विरोध किया, तो उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें हिरासत में ले लिया गया। वांगचुक के हटने के बाद संगठन के अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) ने वहीं दोबारा अनशन शुरू कर दिया है।
जंतर-मंतर (Jantar - Mantar) की जमीनी हकीकत देखने के बाद न्यूज़ग्राम की टीम सरकार से और इस व्यवस्था से कुछ सीधे सवाल पूछती है:
1. क्या इस देश में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात रखने की कोई जगह नहीं बची है?
2. एक तरफ सरकार युवाओं को देश का भविष्य बताती है, तो दूसरी तरफ जब उसी भविष्य के साथ पेपर लीक माफिया खिलवाड़ करते हैं, तो सरकार चुप क्यों हो जाती है?
3. सोनम वांगचुक जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित शख्सियत को 20 दिनों तक भूखा रखने के बाद भी संवाद का एक रास्ता क्यों नहीं निकाला गया?
भले ही पुलिस ने सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) को जंतर-मंतर से हटा दिया हो, लेकिन वहां मौजूद छात्रों का हौसला टूटा नहीं है। आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि 20 जुलाई को होने वाला 'संसद मार्च' ('Parliament March') हर हाल में होकर रहेगा। अब देखना यह है कि जंतर-मंतर से उठी यह चिंगारी सरकार की नींद कब तोड़ती है।