दिल्ली के ऐतिहासिक हुमायूँ के मकबरे के परिसर में स्थित नया हुमायूँ म्यूज़ियम (Humayun Museum) इतिहास के कई अनकहे रहस्यों को सामने ला रहा है। यह संग्रहालय अंडरग्राउंड (Underground) यानी भूमिगत रूप में बनाया गया है और मुगल काल (Mughal) के अनगिनत 500 से अधिक कलाकृतियों को प्रदर्शित करता है, जिनमें मुगल काल के सिक्के, पांडुलिपियाँ, खगोलीय यंत्र, नक्काशी और दुर्लभ दस्तावेज़ शामिल हैं। सबसे रोचक बात यह है कि कुछ अकबर के सिक्कों पर एक ओर ‘अल्लाहु अकबर’ और दूसरी ओर ‘राम’ लिखा हुआ पाया गया है, जो उस समय की सांस्कृतिक सहिष्णुता और विविधता का संकेत देता है।
यह संग्रहालय हमें सिर्फ़ मुगल वास्तुकला और कला देखने का मौका नहीं देता बल्कि उस समय की संस्कृति, धार्मिक संवाद और कला के साझा इतिहास को भी समझने में मदद करता है। इसी हुमायूँ म्यूजियम (Humayun Museum) में यह भी बात सामने आई है मुगलों के समय विष्णु पूजा की जाती थी। तो चलिए इसके बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं।
इसी हुमायूं म्यूजियम (Humayun Museum) में कुछ ऐसे यंत्र और सामान रखे हुए हैं, इसके बारे में बताया गया है कि यह 18वीं शताब्दी के हैं। यह भी बताया जा रहा है कि इनको देखकर ऐसा लगता है कि यह हिंदू देवी-देवताओं (Hindu Gods) की पूजा में इस्तेमाल किए जाने वाले यंत्र हों। हुमायूं म्यूजियम में एक बड़ा चिराग भी देखने को मिला है जो 18 वीं सदी में देखने को मिलते थे और आश्चर्य की बात यह है कि इस चिराग का इस्तेमाल हिंदू देवी देवताओं की पूजा करने में किया जाता था। सिर्फ इतना ही नहीं यहां कई ऐसे सामान और यंत्र मिले हैं जो यह दर्शाते हैं कि शायद मुगल भगवान विष्णु की पूजा किया करते थें।
हुमायूं म्यूजियम में जहां हिंदू देवी देवताओं की पूजा के लिए कुछ यंत्र या सामान रखे हुए हैं ठीक उसके ऊपर ही एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने लोगों को चौंका दिया। इस तस्वीर में एक मुस्लिम को भगवान विष्णु की पूजा करते हुए दिखाया गया है। इस फोटो में लिखा हुआ है कि 18वीं शताब्दी में भगवान विष्णु को नमन करते हुए रहीम।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर रहीम कौन है? तो आपको बता दें कि रहीम इस्लाम के अनुयाई होते हुए भी सूफियों और भक्ति आंदोलन के कवियों की विचारधारा से बेहद प्रभावित थे। आपको बता दें कि 18वीं शताब्दी में मौजूद कई रहीम थे, लेकिन सबसे प्रमुख अब्दुल रहीम खान-ए-खाना (1556-1627) थे, जो मुगल बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक महान कवि और सेनापति थे, जिन्होंने हिंदी दोहे लिखे और वह संस्कृत और फारसी के विद्वान भी थे।
इस फोटो को भले ही म्यूजियम के एक कोने में लगाया गया हो, लेकिन यह फोटो पूरे म्यूजियम की जान है और लोगों को काफी आकर्षित करती है। खास तौर पर जो हिंदू धर्म को मानते हैं, वो जब इस फोटो को देखते हैं, तो हैरान हो जाते हैं और जब कैप्शन पढ़ते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि मुगल काल में भी भगवान विष्णु की पूजा होती थी।
Also Read: पशुपतिनाथ शिव का रहस्य: महादेव किन-किन पशु रूपों में प्रकट हुए? सच जानकर चौंक जाएंगे!
दिल्ली के ऐतिहासिक हुमायूँ का मकबरा परिसर में भारत का पहला भूमिगत म्यूज़ियम यानी हुमायूँ म्यूज़ियम 29 जुलाई 2024 को आधिकारिक रूप से खोला गया, और 1 अगस्त 2024 से आम लोगों के लिए खुला। इसे आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर (AKTC) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मिलकर बनाया है। यह म्यूज़ियम दुनिया भर के इतिहास प्रेमियों को मुगल काल के जीवन, कला और संस्कृति को करीब से समझने का मौका देता है। इसमें 500 से भी ज़्यादा अनदेखी कलाकृतियाँ प्रदर्शित हैं जैसे मुगल मिनिएचर पेंटिंग, पांडुलिपियाँ, सिक्के, खगोलीय यंत्र (astrolabe), आकाशीय गोले, पत्थर के शिलालेख, कांच और वस्त्र आदि।
यह संग्रहालय हुमायूँ के मकबरे और सुँदर नेर्सरी को जोड़ता है और दर्शकों को डिजिटल अनुभव, 270-डिग्री स्क्रीन तथा आकर्षित गैलरी के माध्यम से मुगल इतिहास की कहानी महसूस करने का अवसर देता है। ऐसा आधुनिक संग्रहालय भारत में किसी भी विश्व धरोहर स्थल के परिसर में पहली बार बनाया गया है। [Rh/SP]