पटना में 2 छात्राओं की मौत  X
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पटना का जानलेवा हॉस्टल! NEET की तैयारी कर रहीं 2 छात्राओं की मौत, कटघरे में सुसाशन बाबू की कानून व्यवस्था

जनवरी 2026 में बिहार के पटना से 2 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिसने यह सवाल करने को मजबूर कर दिया कि क्या प्रदेश में लड़कियां सच में सुरक्षित हैं? खबर है कि 2 छात्राएं जो पटना में रहकर NEET की तैयारी कर रही थीं, उनकी मौत संदिग्ध परिस्तिथि में हो गई।

Author : Mayank Kumar

  • पटना की दो छात्राओं की संदिग्ध मौत से कानून-व्यवस्था कटघरे में।

  • दोनों मामले गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े, परिजनों ने साजिश का आरोप लगाया।

  • बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं।

'बिहार में बहार है क्योंकि शासन में नीतीश कुमार हैं', लगता है सुशासन बाबू वाली छवि बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री की अब धूमिल होती जा रही है। एक समय था जब नीतीश कुमार (Nitish Kumar) शासन व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जाने जाते थे। विपक्षी दल के नेता भी उनके कायल थे। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) भी उनके शासन व्यवस्था की तारीफ करते नहीं थकते थे लेकिन आज आलम ऐसा है कि बिहार में अपराधी फिर से सक्रिय हो गए हैं और जघन्य अपराधों को अंजाम देने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

ऐसा प्रतीत होता है कि उनके भीतर कानून का खौफ खत्म हो गया है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि बिहार (Bihar) में नए साल की शुरुआत अपराध से ही हुई है। इसी महीने जनवरी 2026 में पटना (Patna) शहर से 2 ऐसी घटनाएं सामने आईं हैं, जिसने सुसाशन बाबू की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया और यह पूछ रहा है कि क्या प्रदेश में लड़कियां सुरक्षित हैं? क्या है मामला आइये समझते हैं।

2 घटनाओं ने पटना को झकझोड़ा

जनवरी 2026 में बिहार के पटना से 2 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिसने यह सवाल करने को मजबूर कर दिया कि क्या प्रदेश में लड़कियां सच में सुरक्षित हैं? खबर है कि 2 छात्राएं जो पटना में रहकर NEET की तैयारी कर रही थीं, उनकी मौत संदिग्ध परिस्तिथि में हो गई। इन 2 लड़कियों की मौत में एक बात सामान्य है और वो है 'हॉस्टल।' ऐसे में शासन व्यवस्था पर सवाल उठने लाजमी हैं। इन दोनों गुत्थियों को एक-एक करके समझते हैं।

जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत

यह मामला 6 जनवरी 2026 का बताया जा रहा है, जब एक रश्मि (बदला हुआ नाम) नामक छात्रा अपने कमरे में बेहोश पाई गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पटना के कंकड़बाग में एक शंभू गर्ल्स हॉस्टल है। यही पर वो छात्रा रहकर NEET की तैयारी कर रही थीं। वो NEET की परीक्षा एक बार निकाल चुकी थी लेकिन रैंकिंग सुधारने के लिए एक बार और प्रयास करना चाहती थी। उसकी उम्र 18 वर्ष बताई गई। इलाज के दौरान 11 जनवरी 2026 को उसकी मृत्यु हो गई।

रश्मि (बदला हुआ नाम) के परिजनों को इस पूरी घटना के पीछे साजिश की आशंका है क्योंकि मृतका के भाई का कहना है कि 5 जनवरी को फोन आया कि उसकी बहन की तबियत ख़राब है। हॉस्टल वालों ने बताया कि ठंड लगी, तो उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। वहीं, अस्पताल में डॉक्टर्स ने उन्हें रश्मि (बदला हुआ नाम) से मिलने नहीं दिया। जबरदस्ती करने पर उन्होंने 9 जनवरी को रेफर करने की बात कही।

मेदांता अस्पताल में भर्ती कराने पर जानकारी दी गई कि हालत बहुत खराब है और बचने की उम्मीद कम है। मां का कहना है कि 5 जनवरी को बेटी पटना वापस गई और रात 9 बजे उसके दोस्त का फोन आया कि आपकी बेटी बेहोश हो गई है और अस्पताल में भर्ती है। मां ने यह भी कहा कि जब तक आरोपी को फांसी नहीं हो जाती, तब तक सुकून नहीं मिलेगा।

परिजनों ने यह भी बताया कि पुलिस के मुताबिक मृतक छात्रा ने नींद की गोलियों की दवाई का ओवरडोज लिया था लेकिन ये झूठ है। वो 18 साल की भी नहीं थी और बिना प्रिस्क्रिप्शन के एक नाबालिग कैसे नींद की इतनी सारी गोलियों ले सकती है? पुलिस डिप्रेशन की बात कर रही है जबकि उनकी बेटी ऐसी नहीं थी। 26 दिसंबर 2025 को वो उनके साथ घर लौटी थी और 5 जनवरी को हॉस्टल वापस चली गई थी।

परिवार वालों ने यह भी बताया कि जब वो 7 जनवरी को छात्रा का कमरा देखने गए तो सब कुछ पहले से साफ़ कर दिया गया था। 8 जनवरी को वो होश में आई थी और इशारों से बताया था कि उसके साथ गलत हुआ है लेकिन अस्पताल वालों ने मोबाइल से रिकॉर्ड करने नहीं दिया। वहीं, जब प्रभात मेमोरियल के एक डॉक्टर ने उन्हें यह बताया कि आपकी बेटी के साथ गलत हुआ है, तब उन्होंने FIR दर्ज कराई।

बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पोस्टमार्टम में छात्रा के शरीर पर कई चोटें हैं। गर्दन पर कई खरोच के निशान हैं। सूखी खून की पपड़ी मिली। साथ ही बाएं हाथ, घुटने, छाती और पीठ पर चोट के साथ नीला रंग देखने को मिला है। छात्रा के प्राइवेट पार्ट्स के पास भी चोट के निशान मिले हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि जबरन शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किया गया है।

वहीं, पुलिस ने इस मामले में 13 जनवरी को प्रेस रिलीज जारी किया था, जिसमे यह बताया गया कि छात्रा के यूरीन में नींद की गोलियों का डोज मिला है और उसने 24 दिसंबर को सुसाइड और 5 जनवरी को नींद की दवा के संबंध में सर्च किया था। ये बात मृतका के मोबाइल की सर्च हिस्ट्री से पता चली।

पुलिस ने इस मामले में SIT का गठन किया है और हॉस्टल मालिक को गिरफ्तार कर हॉस्टल सील कर दिया गया। साथ ही 3 लोग हिरासत में लिए गए हैं, जिसमे से एक रिश्ते में मृतका का मामा भी लगता है। बता दे कि परिजन CBI जाँच की भी मांग कर रहे हैं। फिलहाल अभी मामले की जाँच चल रही है।

औरंगाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत

अभी कंकड़बाग के शंभू गर्ल्स हॉस्टल का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक और मामले ने पटना को हैरान कर दिया। ये छात्रा भी एग्जीबिशन रोड में स्थित परफेक्ट गर्ल्स पीजी हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। ज्योति (बदला हुआ नाम) की उम्र 15 साल बताई जा रही है। 6 जनवरी 2026 को संदिग्ध हालत में उसकी मौत हो गई। मृतका डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी लेकिन ये सपना उसके साथ ही चला गया।

ज्योति (बदला हुआ नाम) औरंगाबाद जिले के गोह बाजार निवासी धर्मेंद्र कुमार की बेटी थी। परिजनों ने बेटी की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार किया और इसे हत्या की साजिश बताया। उन्होंने आरोप लगाया है कि हॉस्टल के संचालक विशाल अग्रवाल, रणजीत मिश्रा और वार्डन खुशबू कुमारी सहित अन्य लोगों ने उनकी बेटी को प्रताड़ित कर उसकी हत्या कर दी। पिता ने सबके ऊपर FIR दर्ज करवाई है।

पिता का कहना है कि पुलिस और परिजनों की गैरमौजूदगी में ही उनकी बेटी के शव को बेड पर रखा गया। कहा गया कि बेटी ने फांसी लगाई थी। जब पुलिस मौकाए वारदात पर पहुंची, तो शव को PMCH अस्पताल ले जाया गया। जब परिजन ने अस्पताल में बेटी की शव और वीडियो रिकॉर्डिंग देखी, तो उन्हें लगा कि ये आत्महत्या नहीं बल्कि साजिश के तहत उसकी हत्या की गई है।

परिजनों ने ज्योति (बदला हुआ नाम) की हत्या के लिए मुशाहिद रेजा और मुकर्रम रेजा को जिम्मेदार ठहराया है और इनके खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई है। मुकर्रम बंगाल में उत्तरी दिनाजपुर के थाना दालकोला का रहने वाला है जबकि मुशाहिद पूर्णिया जिले का रहने वाला है।

बता दें कि पिता धर्मेंद्र कुमार ने यह भी बताया कि ज्योति (बदला हुआ नाम) 23 जून 2025 से इस हॉस्टल में रह रही थी। 30 दिसंबर 2025 को वह घर आई थी और 4 जनवरी 2026 को दोबारा उन्होने बेटी को हॉस्टल छोड़ा था। 5 जनवरी को बेटी से सामान्य बातचीत भी हुई थी लेकिन 6 जनवरी को यह खबर आई कि बेटी ने फांसी लगा ली। इस मामले की भी जाँच पुलिस कर रही है।

कटघरे में सुसाशन बाबू की कानून व्यवस्था

नीतीश कुमार की कानून व्यवस्था इस समय कटघरे में भी है। नीतीश 2005 से बिहार की सत्ता में काबिज हैं लेकिन उनके राज में महिलाओं के साथ आपराधिक मामले बढ़ते ही दिखे हैं। 2005 में महिलाओं के खिलाफ कुल दर्ज मामले लगभग 10,000 से 11,000 के बीच थे। 2022-2023 तक यह संख्या बढ़कर 20,000 से अधिक हो गई है।

2018-2022 के बीच महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 16.3% की बढ़ोतरी हुई है। बलात्कार के मामले 1000 से 1400 के बीच देखे गए हैं। वहीं, अपहरण जैसे मामले भी ज्यादा दिखते हैं। 2002 से 2004 के बीच मामले 400 के करीब होते थे, तो 2021 में ये 655 तक हो गए। ऐसे में बिहार सरकार को इस मामले पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।