असम विधानसभा चुनाव 2026 (Assam Assambly Election 2026) के लिए मतदान 09 अप्रैल 2026 (Thursday) को है। यानी अब चुनाव में बहुत कम समय बचा है और सभी राजनीतिक दलों के साथ-साथ उम्मीदवार भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुके हैं। जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, चुनावी माहौल और भी गर्म होता जा रहा है। इस बार चुनावी मैदान में ऐसे उम्मीदवार नजर आ रहे हैं, जिनकी प्रोफाइल एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है कोई करोड़ों की संपत्ति का मालिक है, तो कोई बेहद सीमित संसाधनों के साथ चुनाव लड़ रहा है।
वहीं, कुछ उम्मीदवार उच्च शिक्षित हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं जिनकी पढ़ाई बहुत कम या लगभग नहीं के बराबर है। इसके अलावा, कई उम्मीदवारों पर आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड भी दर्ज है, जो चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि जिन लोगों को हम अपना प्रतिनिधि चुनने जा रहे हैं, उनका बैकग्राउंड क्या है। यह डेटा न सिर्फ पारदर्शिता लाता है, बल्कि वोटर्स को सही निर्णय लेने में भी मदद करता है।
असम चुनाव 2026 (Assam Assambly Election 2026) इस बार काफी दिलचस्प और अहम माना जा रहा है। राज्य की कुल 126 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान होना है, और इन्हीं सीटों पर तय होगा कि अगली सरकार किसकी बनेगी। इस चुनाव में कई बड़ी राजनीतिक पार्टियाँ आमने-सामने हैं। इनमें मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस, असम गण परिषद (AGP), AIUDF, AAP और अन्य क्षेत्रीय दल शामिल हैं। साथ ही, गठबंधन राजनीति भी इस बार अहम भूमिका निभा रही है, जिससे मुकाबला और भी रोचक हो गया है। अगर उम्मीदवारों की बात करें तो इस बार चुनावी मैदान काफी बड़ा है। खास बात यह है कि 258 से ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं, जो इसे और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाते हैं। कुल मिलाकर सैकड़ों उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें अनुभवी नेता, नए चेहरे और अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग शामिल हैं।
असम चुनाव 2026 (Assam Assambly Election 2026) में उम्मीदवारों की संपत्ति को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ADR रिपोर्ट के अनुसार, कुल 722 उम्मीदवारों में से 285 यानी लगभग 39% उम्मीदवार करोड़पति हैं अगर पार्टी के हिसाब से देखें तो सबसे ज्यादा अमीर उम्मीदवार बड़ी पार्टियों से आते हैं। बीजेपी के लगभग 88% उम्मीदवार करोड़पति हैं, जबकि कांग्रेस के 61%, AIUDF के 53% और असम गण परिषद के करीब 69% उम्मीदवार करोड़पति हैं। टॉप रिच उम्मीदवारों की बात करें तो कांग्रेस के राहुल रॉय (₹261 करोड़+), AIUDF के बदरुद्दीन अजमल (₹226 करोड़+) और बीजेपी के हिमंत बिस्वा सरमा (₹35 करोड़+) जैसे नाम सामने आते हैं।
अब सवाल यह है कि पैसा चुनाव को कैसे प्रभावित करता है? दरअसल, ज्यादा संपत्ति वाले उम्मीदवार प्रचार, संसाधन और नेटवर्क पर अधिक खर्च कर सकते हैं, जिससे उनकी पहुंच मतदाताओं तक ज्यादा होती है। यही कारण है कि राजनीति में “मनी पावर” (Money Power) का असर साफ दिखाई देता है। हालांकि, यह भी सच है कि सिर्फ पैसा ही जीत तय नहीं करता, जनता का भरोसा सबसे बड़ी ताकत होती है।
असम चुनाव 2026 (Assam Assambly Election 2026) में जहां बड़ी संख्या में करोड़पति उम्मीदवार हैं, वहीं कई ऐसे उम्मीदवार भी हैं जिनकी संपत्ति बेहद कम है। ADR रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पार्टियों जैसे राइजोर दल और छोटे क्षेत्रीय दलों के कई उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 1 करोड़ से भी कम है, जो उन्हें अपेक्षाकृत “गरीब” श्रेणी में रखता है। ऐसे उम्मीदवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है चुनाव प्रचार के लिए संसाधनों की कमी। जहां अमीर उम्मीदवार बड़े स्तर पर कैंपेन चला सकते हैं, वहीं गरीब उम्मीदवार ग्राउंड लेवल कनेक्शन, जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों के भरोसे चुनाव लड़ते हैं। यही असली लोकतंत्र की तस्वीर भी दिखाता है।
अगर शिक्षा की बात करें तो असम चुनाव में उम्मीदवारों की प्रोफाइल काफी विविध है। करीब 45% उम्मीदवार 5वीं से 12वीं तक पढ़े-लिखे हैं, जबकि 53% उम्मीदवार ग्रेजुएट या उससे अधिक शिक्षित हैं। वहीं, कुछ उम्मीदवार ऐसे भी हैं जो सिर्फ साक्षर (literate) हैं। हालांकि, कम पढ़े-लिखे उम्मीदवार अक्सर छोटे दलों या निर्दलीय रूप में ज्यादा नजर आते हैं, जबकि बड़ी पार्टियों में शिक्षित उम्मीदवारों की संख्या अधिक होती है। अब सवाल उठता है क्या शिक्षा जीत तय करती है? जवाब सीधा नहीं है। कई बार जमीनी पकड़, लोकप्रियता और सामाजिक काम शिक्षा से ज्यादा असर डालते हैं। यानी चुनाव में डिग्री नहीं, बल्कि जनता का भरोसा सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आता है।
असम चुनाव 2026 (Assam Assambly Election 2026) में उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर भी चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। ADR रिपोर्ट के अनुसार, कुल उम्मीदवारों में से लगभग 22% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि करीब 15% उम्मीदवारों पर गंभीर अपराधों (जैसे हत्या, हत्या का प्रयास, आदि) के मामले चल रहे हैं। अगर पार्टीवार आंकड़ों की बात करें तो AIUDF के लगभग 35% उम्मीदवारों पर केस दर्ज हैं, जबकि कांग्रेस के करीब 28%, बीजेपी के लगभग 20% और असम गण परिषद (AGP) के करीब 18% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले हैं।
यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि राजनीति और अपराध का रिश्ता पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई उम्मीदवार जिन पर गंभीर आरोप हैं, वे भी चुनावी मैदान में सक्रिय हैं। अब सवाल यह है कि इसका चुनाव पर क्या असर पड़ता है? कई बार ऐसे उम्मीदवार अपनी स्थानीय पकड़ और प्रभाव के कारण चुनाव जीत भी जाते हैं। लेकिन यह लोकतंत्र के लिए एक चुनौती है, क्योंकि इससे सिस्टम की पारदर्शिता और साफ छवि पर सवाल उठते हैं। इसलिए वोटर्स को उम्मीदवारों का बैकग्राउंड जानकर ही सोच-समझकर वोट देना चाहिए। [SP/MK]