

पश्चिम बंगाल का जलपाईगुड़ी (Jalpaiguri in West Bengal) एक ऐसा जिला है, जहां हर चुनाव सिर्फ वोटों का खेल नहीं, बल्कि सियासत की असली परीक्षा बन जाता है। हरे-भरे चाय बागानों और शांत प्राकृतिक सुंदरता के बीच बसा यह इलाका राजनीतिक रूप से इतना अहम है कि यहां का जनादेश पूरे राज्य की दिशा तय कर सकता है। खास बात यह है कि इसकी पहचान सिर्फ आज की राजनीति तक सीमित नहीं है स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक इसका जुड़ाव प्राचीन महाकाव्य महाभारत से भी जोड़ा जाता है, जो इसे और भी रहस्यमयी बनाता है। यही कारण है कि जलपाईगुड़ी (Jalpaiguri) सिर्फ एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और सत्ता की टकराहट का संगम बन चुका है। जैसे-जैसे चुनाव करीब आते हैं, यहां सियासी पारा चढ़ने लगता है और मुकाबला सीधा होता है तृणमूल कांग्रेस बनाम भारतीय जनता पार्टी जहां हर वोट की कीमत सत्ता तय करती है।
जलपाईगुड़ी (Jalpaiguri) को चुनावी खेल का केंद्र इसलिए माना जाता है क्योंकि यहां की सामाजिक और जनसांख्यिकीय विविधता बहुत ज्यादा है। आदिवासी, राजबंशी और चाय बागान के मजदूरों की बड़ी आबादी यहां रहती है। यही वर्ग चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाता है। राजनीतिक पार्टियां इन्हीं वोटरों को साधने के लिए खास रणनीति बनाती हैं, जिससे यहां का हर वोट बेहद कीमती हो जाता है।
महाभारत से इसका कनेक्शन स्थानीय मान्यताओं पर आधारित है। माना जाता है कि इस क्षेत्र को प्राचीन समय में “प्राग्ज्योतिष” और कामरूप क्षेत्र का हिस्सा माना जाता था, जिसका उल्लेख महाभारत में मिलता है। कुछ लोग इसे राजा भगदत्त के राज्य से भी जोड़ते हैं, जिन्होंने महाभारत युद्ध में भाग लिया था। हालांकि यह पूरी तरह ऐतिहासिक प्रमाणों से सिद्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय आस्था और लोककथाओं में यह जुड़ाव आज भी मजबूत है।
अगर हालिया चुनावी आंकड़ों की बात करें, तो जलपाईगुड़ी (Jalpaiguri) में मुकाबला काफी टक्कर का रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party, BJP) ने यहां शानदार प्रदर्शन किया था और सीट पर कब्जा जमाया था, जहां उसे करीब 50% वोट शेयर मिला था। वहीं तृणमूल कांग्रेस को लगभग 38–40% वोट मिले थे। लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) में तस्वीर थोड़ी बदली, जहां TMC ने कई सीटों पर वापसी की और अपना वोट शेयर बढ़ाया। अब 2026 के चुनाव से पहले दोनों पार्टियां पूरी ताकत झोंक रही हैं। BJP चाय बागान मजदूरों और आदिवासी वोट बैंक पर फोकस कर रही है, जबकि TMC सरकारी योजनाओं और स्थानीय विकास को मुद्दा बना रही है। कुल मिलाकर, जलपाईगुड़ी में इस बार भी सीधी लड़ाई TMC और BJP के बीच है, और यहां का नतीजा एक बार फिर पूरे बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
जलपाईगुड़ी क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास पश्चिम बंगाल विधानसभा (West Bengal Assembly Election) के संदर्भ में भी काफी दिलचस्प रहा है और समय के साथ इसमें बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। आज़ादी के बाद शुरुआती वर्षों में यहाँ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of India (CPI) का प्रभाव देखने को मिला, जहां वामपंथी विचारधारा को जनता का अच्छा समर्थन प्राप्त था। इसके बाद 1977 से लेकर 2011 तक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (Communist Party of India (Marxist) (CPI-M) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा का इस क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर मजबूत कब्जा रहा। इस दौरान वामपंथी सरकार ने लगातार कई चुनाव जीते और यह इलाका उनका मजबूत गढ़ बन गया।
हालांकि, 2011 के विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक बदलाव आया, जब अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) ने वाम मोर्चा को सत्ता से बाहर कर दिया और इस क्षेत्र में भी अपनी पकड़ मजबूत की। इसके बाद TMC ने कई वर्षों तक विधानसभा चुनावों में बढ़त बनाए रखी। वहीं हाल के वर्षों में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party, BJP) ने भी इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत की है, जिससे अब राजनीति TMC और BJP के बीच सीधी टक्कर की ओर बढ़ती नजर आ रही है।[SP]