"नर्क का दरवाजा" ("Gate of Hell")  AI
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नर्क का दरवाजा है ये मंदिर, इसके आसपास जाने से ही कट जाता है परलोक का टिकट

दुनिया में कई ऐसी रहस्यमयी (Mysterious) जगहें हैं जो आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। तुर्की के प्राचीन शहर हेरापोलिस में स्थित एक ऐसा ही मंदिर है, जिसे "नर्क का दरवाजा" ("Gate of Hell") कहा जाता है।

Author : Sarita Prasad

दुनिया में कई ऐसी रहस्यमयी (Mysterious) जगहें हैं जो आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। तुर्की के प्राचीन शहर हेरापोलिस में स्थित एक ऐसा ही मंदिर है, जिसे "नर्क का दरवाजा" ("Gate of Hell") कहा जाता है। सदियों से यह स्थान लोगों के बीच भय, रहस्य और आस्था का केंद्र बना हुआ है। कहा जाता है कि इस मंदिर के पास जाने वाले इंसान ही नहीं, बल्कि जानवर भी अचानक मौत का शिकार हो जाते थे। प्राचीन काल के लोग मानते थे कि यहां अधोलोक के देवता का निवास है और यह रास्ता सीधे नर्क की ओर जाता है। हालांकि आधुनिक विज्ञान ने इसके पीछे का कारण खोज लिया है, लेकिन इस जगह का रहस्य और रोमांच आज भी लोगों को आकर्षित करता है। आइए जानते हैं इस रहस्यमयी मंदिर का इतिहास, इसकी मान्यताओं और उन वैज्ञानिक कारणों के बारे में, जिनकी वजह से इसे "नर्क का द्वार" ("Gate of Hell") कहा जाता है।

कहां है यह मंदिर?

तुर्की के दक्षिण-पश्चिम में स्थित प्राचीन शहर हेरापोलिस (Hierapolis) में एक ऐसी जगह मौजूद है, जिसे सदियों तक लोग "नर्क का दरवाजा" मानते रहे। इस रहस्यमयी स्थल का नाम प्लूटोनियम (Ploutonion) या प्लूटो का द्वार है। इसका इतिहास लगभग 2200 साल पुराना माना जाता है। दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में यूनानी और बाद में रोमन सभ्यता के लोगों ने इस स्थान को अधोलोक का प्रवेश द्वार घोषित कर दिया था। दरअसल, उनकी मान्यता थी कि यहां से मृतकों की दुनिया का रास्ता जाता है, जिस पर अधोलोक के देवता प्लूटो का शासन है। इसी वजह से यहां एक विशेष मंदिर और गुफा का निर्माण कराया गया, जहां दूर-दूर से लोग पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचते थे।

हेरापोलिस (Hierapolis)

क्यों डरावनी है यह जगह?

इस जगह का रहस्य और भी डरावना इसलिए बन गया क्योंकि मंदिर के आसपास पहुंचते ही पक्षी, बकरियां और अन्य छोटे जानवर अचानक मर जाते थे। प्राचीन लोगों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। लोगों को लगता था कि नर्क के देवता का क्रोध इन जीवों की जान ले रहा है। रोमन काल में यहां बलि देने की परंपरा भी शुरू हुई और पुजारी लोगों के सामने जानवरों को गुफा के पास ले जाकर उनकी रहस्यमयी मौत दिखाते थे। दिलचस्प बात यह थी कि जहां जानवर कुछ ही मिनटों में मर जाते थे, वहीं पुजारी सुरक्षित बाहर निकल आते थे। इससे लोगों का विश्वास और गहरा हो जाता था कि पुजारियों को देवताओं का विशेष आशीर्वाद प्राप्त है।

क्या है इस रहस्यमई मंदिर की कहानी?

इस मंदिर की कहानी बड़ी ही दिलचस्प थी जिसके कारण यहां लोगों की मौतें हो रही थीं। वास्तव में इस रहस्य के पीछे प्रकृति का एक अनोखा खेल छिपा था। मंदिर के नीचे मौजूद भूगर्भीय दरारों से लगातार कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती थी। यह गैस हवा से भारी होने के कारण जमीन के करीब जमा हो जाती थी। छोटे जानवर इसकी चपेट में आकर दम घुटने से मर जाते थे, जबकि अनुभवी पुजारी ऊंचे स्थानों पर खड़े रहते थे और ऐसे समय में गुफा के पास जाते थे जब गैस का स्तर अपेक्षाकृत कम होता था। इस तरह वे लोगों के सामने स्वयं को अलौकिक शक्तियों वाला साबित कर देते थे।

साल 2013 में पुरातत्वविदों (Archaeologists) ने इस प्राचीन स्थल के अवशेषों को दोबारा खोज निकाला। वैज्ञानिक जांच में यह पुष्टि हुई कि यहां निकलने वाली जहरीली गैस ही सदियों पुराने रहस्य का असली कारण थी। हालांकि विज्ञान ने इस पहेली को सुलझा दिया है, लेकिन आज भी "प्लूटो का द्वार" दुनिया के सबसे रहस्यमयी धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां की कहानियां, प्राचीन मान्यताएं, रहस्यमयी मौतें और अधोलोक से जुड़ी किंवदंतियां इसे इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए बेहद आकर्षक बनाती हैं। यही कारण है कि आज भी हेरापोलिस का यह मंदिर "नर्क का दरवाजा" के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर है। [SP]