देश के 6 ऐसे प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में, जहां अलग-अलग समय में वित्तीय या प्रशासनिक गड़बड़ी के आरोप (6 temples where irregularities were alleged) चर्चा का विषय बने। Ai
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वैष्णो देवी से लेकर तिरुपति बालाजी तक...अयोध्या की तरह इन 6 मंदिरों में भी लग चुके गड़बड़ी के आरोप

भारत के बड़े मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना की जगह नहीं हैं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और हजारों करोड़ रुपये के दान का भी केंद्र हैं। हर साल इन मंदिरों में नकद, सोना, चांदी और कीमती सामान के रूप में भारी चढ़ावा आता है।

Author : Sarita Prasad

भारत के बड़े मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना की जगह नहीं हैं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और हजारों करोड़ रुपये के दान का भी केंद्र हैं। हर साल इन मंदिरों में नकद, सोना, चांदी और कीमती सामान के रूप में भारी चढ़ावा आता है। ऐसे में समय-समय पर दान, प्रसाद, आभूषण, जमीन और वित्तीय लेनदेन को लेकर विवाद भी सामने आते रहे हैं। हाल ही में अयोध्या राम मंदिर में दान से जुड़ी कथित गड़बड़ी के आरोपों ने एक बार फिर मंदिरों की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि कई मामलों में जांच हुई, कुछ में कार्रवाई भी हुई, जबकि कई आरोप साबित नहीं हो सके। आइए जानते हैं देश के 6 ऐसे प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में, जहां अलग-अलग समय में वित्तीय या प्रशासनिक गड़बड़ी के आरोप (6 temples where irregularities were alleged) चर्चा का विषय बने।

श्री माता वैष्णो देवी मंदिर, कटरा

वैष्णो देवी मंदिर (Vaishno Devi Mandir)

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के रियासी जिले की त्रिकुट पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर (Vaishno Devi Mandir) देश के सबसे पवित्र और अमीर तीर्थस्थलों में से एक है। इस मंदिर में पारंपरिक रूप से किसी बाहरी चोरी या डकैती की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है और न ही गहने या नकदी सीधे तौर पर गायब हुए हैं। इसके बजाय, यहाँ वर्ष 2016-17 के दौरान वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक गड़बड़ी के आरोप सुर्खियों में आए थे। उस समय कुछ सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने मंदिर बोर्ड (श्राइन बोर्ड) की खरीद प्रक्रियाओं, ठेकों (Contracts) के आवंटन और वित्तीय प्रबंधन में करोड़ों रुपये के हेरफेर के गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, किसी निश्चित राशि की चोरी या नुकसान की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, क्योंकि यह पूरा विवाद करोड़ों रुपये के खर्चों के ऑडिट से जुड़ा था। श्राइन बोर्ड ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए सभी लेनदेन को नियमों के अनुसार बताया था, और बाद में हुई जांच व ऑडिट में भी किसी बड़े घोटाले या चोरी की पुष्टि नहीं हुई।

सबरीमाला मंदिर सोना चोरी विवाद

केरल के पठानमथिट्टा जिले (Pathanamthitta district of Kerala) की पेरियार टाइगर रिजर्व पहाड़ियों पर स्थित प्रसिद्ध सबरीमाला अयप्पा मंदिर (Sabarimala Ayyappa Temple) देश के सबसे बड़े और प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। इस मंदिर में सोना चोरी होने का एक बड़ा और बेहद संवेदनशील मामला तब सुर्खियों में आया जब साल 2019 में मूर्तियों की मरम्मत के बाद गड़बड़ी की बात सामने आई।

सबरीमाला अयप्पा मंदिर (Sabarimala Ayyappa Temple)

जांच में यह खुलासा हुआ कि 1998-99 में कारोबारी विजय माल्या द्वारा दान किए गए सोने से बनी गर्भगृह की सोने की परतों, द्वारपालकों की मूर्तियों और दरवाजों के फ्रेम से जानबूझकर सोने की परतें हटाई और चुराई गईं। विशेष जांच दल (SIT) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पड़ताल के अनुसार, मरम्मत के लिए चेन्नई भेजी गई मूर्तियों के लौटने पर उनका वजन काफी कम हो गया था, जिसे कागजी हेरफेर कर छुपाने की कोशिश की गई। इस पूरे मामले में करीब 4.5 किलो सोने के गायब होने की आधिकारिक पुष्टि हुई है, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई है। इस सिलसिले में मंदिर के मुख्य पुजारी (तंत्री) कंदरारू राजीवरु, पूर्व विधायक और त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के पूर्व सदस्यों सहित मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, और हाल ही में 2026 में एसआईटी ने इस पर अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत को सौंपी है।

श्री जगन्नाथ मंदिर

ओडिशा के पुरी (Puri, Odisha) में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) देश के सबसे पवित्र चार धामों में से एक है। इस मंदिर में किसी बाहरी डकैती की घटना तो नहीं हुई है, लेकिन इसके ऐतिहासिक खजाने यानी 'रत्न भंडार' (Ratna Bhandar) की सुरक्षा और वहां से बेशकीमती चाबियों व आभूषणों के गायब होने (चोरी) को लेकर एक बहुत बड़ा और रहस्यमयी विवाद सामने आया था।

भगवान जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple)

साल 2018 में यह खुलासा हुआ कि मंदिर के आंतरिक रत्न भंडार (Inner Treasury) की मूल चाबियां रहस्यमयी तरीके से गायब हो गई हैं, जिसके बाद देश भर में यह आशंका फैल गई कि खजाने से कीमती गहने और रत्न चोरी हो चुके हैं। इस खजाने में सदियों पुराने सोने के मुकुट, हीरे, नीलम, पन्ना और चांदी के सैकड़ों भारी बर्तन मौजूद हैं, जिनकी कीमत आज के समय में अरबों-खरबों रुपये आंकी जाती है। इसके अलावा, साल 2019 में मंदिर की हजारों एकड़ जमीन के आधिकारिक रिकॉर्ड गायब होने और संपत्तियों के प्रबंधन में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए थे। रत्न भंडार की चाबियां गायब होने के इस गंभीर मामले पर भारी राजनीतिक और सामाजिक बवाल होने के बाद ओडिशा सरकार ने जांच के लिए एक विशेष न्यायिक आयोग का गठन किया, और लंबे समय बाद खजाने की सुरक्षा सुनिश्चित करने व गायब संपत्तियों का पता लगाने के लिए रत्न भंडार को दोबारा खोलने और गहनों की नई सूची (डिजिटल ऑडिट) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

श्री सिद्धिविनायक मंदिर

मुंबई के प्रभादेवी में स्थित भगवान गणेश का ऐतिहासिक सिद्धिविनायक मंदिर (Siddhivinayak Temple) देश के सबसे प्रसिद्ध और अमीर मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में किसी बाहरी डकैती या मंदिर के खजाने से सीधे तौर पर सोने-चांदी के गायब होने की कोई घटना दर्ज नहीं हुई है, बल्कि यहाँ साल 2004 से 2008 के बीच मंदिर ट्रस्ट के अंदरूनी प्रबंधन और दान के पैसों के दुरुपयोग (वित्तीय अनियमितता) को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया था।

सिद्धिविनायक मंदिर (Siddhivinayak Temple)

बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombe High Court) द्वारा गठित एक जांच समिति (केकर समिति) की रिपोर्ट में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि मंदिर ट्रस्ट ने बिना किसी पारदर्शी नीति के, वीआईपी लोगों, राजनेताओं और रसूखदार संगठनों से जुड़ी संस्थाओं को चैरिटी के नाम पर करोड़ों रुपये बांटे थे, और साथ ही स्क्रैप (नीलामी) की बिक्री व निर्माण ठेकों में भी नियमों की जमकर अनदेखी की गई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, नियमों को ताक पर रखकर लगभग ₹10 करोड़ से अधिक का फंड ऐसी संस्थाओं को ट्रांसफर किया गया था जो वित्तीय सहायता पाने के योग्य ही नहीं थीं। इस बड़े प्रशासनिक और वित्तीय विवाद के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट और महाराष्ट्र सरकार के हस्तक्षेप पर मंदिर के ट्रस्टियों को बदला गया, और भविष्य में फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त नियम व ऑडिट व्यवस्था लागू की गई।

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श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर

केरल के तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram, Kerala) में स्थित ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (Sree Padmanabhaswamy Temple) अपनी अकूत संपत्ति और रहस्यमयी तहखानों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में सीधे तौर पर कोई बाहरी डकैती नहीं हुई थी, लेकिन साल 2015-16 में पूर्व नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) विनोद राय की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई एक ऑडिट रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी और सोने के गायब होने (चोरी) का सनसनीखेज खुलासा हुआ।

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (Sree Padmanabhaswamy Temple)

इस आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के गुप्त तहखानों (विशेषकर वॉल्ट-बी और अन्य स्रोतों) से लगभग 769 सोने के बर्तन (Gold Pots) गायब पाए गए थे, जिनका वजन करीब 186 किलोग्राम था। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस गायब हुए सोने की कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई थी। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि शुद्ध सोने के बदले चढ़ाया गया कुछ सोना गायब कर उसकी जगह नकली या कम मूल्य का सोना मिला दिया गया था। हालांकि मंदिर के पूर्व शाही परिवार और ट्रस्ट ने इन प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को खारिज किया था, लेकिन इस खुलासे ने मंदिर के खजाने की सुरक्षा और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

श्री तिरुपति बालाजी मंदिर

आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के तिरुमला की पहाड़ियों पर स्थित भगवान वेंकटेश्वर (Lord Venkateswara) मंदिर दुनिया के सबसे अमीर और प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक है। इस मंदिर में किसी बाहरी डकैती की कोई बड़ी घटना तो नहीं हुई है, लेकिन मंदिर के अंदरूनी खजाने से कीमती सामान गायब होने और वित्तीय अनियमितताओं के कुछ बेहद चौंकाने वाले मामले सामने आ चुके हैं। साल 2019 में एक बड़े खुलासे के तहत मंदिर प्रशासन (TTD) ने यह स्वीकार किया था कि प्रशासनिक भवन के लॉकर से तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के चांदी के तीन बेशकीमती सिक्के (जिन्हें 'डोलर' कहा जाता है) गायब यानी चोरी हो गए हैं।

भगवान वेंकटेश्वर (Lord Venkateswara)

इसके अलावा, साल 2018 में मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी रमना दीक्षितुलु ने मंदिर के प्राचीन खजाने और रसोई (पोटू) की खुदाई के दौरान सदियों पुराने गुलाबी हीरे (Pink Diamond) और कीमती आभूषणों के गायब होने के गंभीर आरोप लगाए थे। इन गायब हुए सिक्कों और आभूषणों की ऐतिहासिक व बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई थी, जिसमें सिक्कों की चोरी के मामले में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों से TTD ने बाद में करीब ₹8.15 लाख से अधिक की वसूली भी की। हाल के वर्षों (2023-2024) में मंदिर के प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी के इस्तेमाल और करोड़ों रुपये के टेंडर (ठेकों) के आवंटन में भारी भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आए, जिसने देशव्यापी विवाद का रूप ले लिया। इन लगातार सामने आए विवादों, सोने-चांदी के हेरफेर और प्रसाद की शुद्धता पर उठे सवालों के बाद, आंध्र प्रदेश सरकार और कोर्ट के हस्तक्षेप पर मंदिर प्रशासन में बड़े बदलाव किए गए और सुरक्षा व ऑडिट व्यवस्था को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया। [SP]