राम मंदिर दानपात्र घोटाला: ट्रस्ट के करीबियों से लेकर बैंककर्मियों तक, जानिए कैसे रचा गया चोरी का चक्रव्यूह।

अयोध्या का राम मंदिर (Ram Mandir, Ayodhya) करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में जब मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की कथित चोरी का मामला सामने आया, तो पूरे देश में हलचल मच गई।
अयोध्या का राम मंदिर (Ram Mandir, Ayodhya)
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अयोध्या का राम मंदिर (Ram Mandir, Ayodhya) करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में जब मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की कथित चोरी का मामला सामने आया, तो पूरे देश में हलचल मच गई। इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से करीब 80 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आखिर चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी कैसे हुई और इसमें कौन-कौन शामिल था। यह मामला केवल पैसों की चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास और मंदिर की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए पुलिस की जांच और इस पूरे मामले के खुलासे पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।

कौन-कौन हुआ गिरफ्तार?

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी (SIT) की जांच के बाद पुलिस ने एक सुनियोजित और संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की पृष्ठभूमि और उनकी भूमिका बेहद चौंकाने वाली है, क्योंकि इसमें ट्रस्ट के रसूखदारों से लेकर बैंक से जुड़े पेशेवर लोग भी शामिल थे। गिरोह का सबसे अहम मोहरा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू (Ramshankar Yadav, Tinnu) है, जो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) का पूर्व ड्राइवर रहा है। टिन्नू की मंदिर के आंतरिक कार्यों, प्रबंधन और दानपात्रों की चाबियों तक सीधी पहुंच थी, जिसका फायदा उठाकर उसने पूरी साजिश के लिए रास्ता तैयार किया। इस पूरे वित्तीय गबन का मुख्य मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्र (Anukalp Mishra) था, जो केनरा बैंक की आउटसोर्स कैश मैनेजमेंट एजेंसी का कर्मचारी था और नोटों की गिनती (Cash Counting) का काम देखता था। जांच के दौरान अकेले अनुकल्प के ठिकाने से ₹20 लाख की भारी नकदी बरामद हुई। अनुकल्प ने इस खेल में अपने सगे संबंधियों को भी शामिल किया था, जिसमें उसका बहनोई लवकुश मिश्र भी शामिल था, जिसे मिलीभगत के तहत ही इस काम में रखवाया गया था और उसके पास से भी भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ।  

साजिश का अगला अहम सिरा मनीष यादव (Manish Yadav) है, जो मुख्य आरोपी टिन्नू यादव का सगा भतीजा है। टिन्नू ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मनीष को कुछ महीने पहले ही कैश काउंटिंग यूनिट में एंट्री दिलाई थी, जो बाद में सीसीटीवी (CCTV) फुटेज में सीधे तौर पर कैश चोरी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया| इस पूरी वित्तीय धांधली को छिपाने और उस पर पर्दा डालने का काम सुभाष श्रीवास्तव कर रहा था। सुभाष केनरा बैंक का एक रिटायर्ड कर्मचारी है, जिसे मंदिर ट्रस्ट ने एक अनुभवी पर्यवेक्षक (Supervisor) के तौर पर कैश काउंटिंग रूम की निगरानी के लिए नियुक्त किया था। हालांकि, उसके पास से कोई नकदी बरामद नहीं हुई, लेकिन जांच में सामने आया कि उसने अपनी देखरेख में हो रही इस चोरी को जानबूझकर नजरअंदाज किया। इन मुख्य किरदारों के अलावा, कैश काउंटिंग टीम के तीन अन्य सक्रिय सदस्य अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र भी इस बड़ी साजिश के बराबर के भागीदार थे। ये तीनों नोटों की गड्डियों में हेरफेर करने और सुरक्षा व्यवस्था व सीसीटीवी की नजरों से बचाकर रकम को बाहर निकालने में सीधे तौर पर लिप्त थे। इस प्रकार, ट्रस्ट के करीबियों और बैंक कर्मियों के इस साझा नेक्सस ने मिलकर राम भक्तों की आस्था की गाढ़ी कमाई पर डाका डाला।  

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चोरी क्यों और कैसे हुई?

अयोध्या राम मंदिर (Ram Mandir, Ayodhya) में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की राशि पर डाका डालने के लिए एक बेहद सोची-समझी और सुनियोजित साजिश रची गई थी। इस वित्तीय धांधली के पीछे मंदिर ट्रस्ट के ताकतवर करीबियों और केनरा बैंक की आउटसोर्स कैश मैनेजमेंट एजेंसी के कर्मचारियों के बीच का एक बेहद मजबूत और गहरा नेक्सस (सांठगांठ) था। इस गिरोह ने ट्रस्ट के रसूख और बैंक की आंतरिक व्यवस्था में अपनी पैठ का दुरुपयोग कर इस आपराधिक घटना को अंजाम दिया।  

चोरी का तरीका बेहद शातिराना था। मंदिर परिसर के यात्री सुविधा केंद्र (PFC) में जब दानपात्रों से निकली नकदी की गिनती (Cash Counting) की जाती थी, तब नोटों की गिनती करने वाली इस टीम के सदस्य चालाकी से नोटों की गड्डियों में हेरफेर कर देते थे। वह 100-100 के नोटों के बंडलों के बीच अतिरिक्त नोट खिसका देते थे या फिर चुपके से नकदी को दबा लेते थे। इसके बाद वे सीसीटीवी कैमरों की नजरों से बचकर या आपसी मिलीभगत से इस चोरी किए गए कैश को सुरक्षा घेरे से बाहर निकाल ले जाते थे।  

इस बेहद संगठित चोरी का पर्दाफाश उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) द्वारा गठित 3 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) की तफ्तीश में हुआ, जिसे लखनऊ के मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार की अगुवाई में तैयार किया गया था। एसआईटी ने मंदिर ट्रस्ट की शिकायत के बाद एक्शन में आते ही कैश काउंटिंग रूम के सीसीटीवी फुटेज, बैंक के वित्तीय दस्तावेजों, सुरक्षा प्रोटोकॉल और डिजिटल रिकॉर्ड्स की गहनता से स्क्रूटनी की। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में एक आरोपी मनीष यादव कई मौकों पर नकदी चुराते हुए साफ तौर पर कैद पाया गया। इस पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक और मौखिक साक्ष्यों के आधार पर ही एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर करीब ₹80 लाख की बड़ी नकदी बरामद की और इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया।  

कानूनी कार्रवाई और धाराएं

अयोध्या पुलिस और एसआईटी (Ayodhya Police and SIT) ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों के पास से ₹79.85 लाख की भारतीय नकदी और इसके साथ ही 1,000 अमेरिकी डॉलर ($1000) की विदेशी मुद्रा भी बरामद की है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा है। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक साजिश, चोरी और अमानत में ख्यानत (विश्वासघात) जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा, बैंककर्मियों और पब्लिक मनी की संलिप्तता के कारण मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 13(1) भी जोड़ी गई है। कोर्ट ने सभी 8 आरोपियों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें न्यायिक और पुलिस हिरासत में भेज दिया है। [SP]

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