अयोध्या का भव्य राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) Ai
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अयोध्या राम मंदिर दान विवाद: 40-60 किलो चांदी और ऐतिहासिक दीपक गायब, जाने क्या है पूरा मामला?

अयोध्या का भव्य राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) दुनिया भर के करोड़ों सनातनियों की अटूट आस्था और समर्पण का प्रतीक है, जहां पैर रखते ही भक्तों का मन श्रद्धा से भर जाता है। हालांकि, हाल ही में मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दानों के रखरखाव और कथित वित्तीय घोटाले को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

Author : Sarita Prasad

अयोध्या का भव्य राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) दुनिया भर के करोड़ों सनातनियों की अटूट आस्था और समर्पण का प्रतीक है, जहां पैर रखते ही भक्तों का मन श्रद्धा से भर जाता है। हालांकि, हाल ही में मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दानों के रखरखाव और कथित वित्तीय घोटाले को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला तब गरमाया जब इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के उत्तर भारत प्रमुख, अनुराग रस्तोगी ने रामलला को दान की गई करीब 40-60 (40kg + Others) किलो चांदी और एक विशेष दीपक के गायब होने पर गंभीर सवाल उठाए। ऐसे में यह देखना बेहद चिंताजनक है कि एक तरफ जहां इस पावन स्थल से देश-विदेश के करोड़ों भक्तों की आस्था जुड़ी है, वहीं दूसरी तरफ श्रद्धा से अर्पित किए गए दानों का मुख्य रिकॉर्ड में न मिलना एक बड़े प्रशासनिक और नैतिक विवाद को जन्म दे रहा है।

क्या-क्या हुआ गायब?

इस पूरे विवाद के केंद्र में भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक दान की गई बहुमूल्य वस्तुएं और उनके आधिकारिक आंकड़े हैं, जिनमें मुख्य रूप से दो बड़े दानों के रिकॉर्ड में न होने की बात सामने आई है। पहला मामला अनुराग रस्तोगी के व्यक्तिगत दान से जुड़ा है| मार्च 2020 में जब रामलला को टेंट से हटाकर अस्थाई फाइबर ढांचे में शिफ्ट किया गया था, तब रस्तोगी परिवार ने 3 किलो वजन का चांदी का दीपक 'गुप्त दान' के रूप में दिया था, जिससे मंदिर की अखंड ज्योत जलाई गई थी। दूसरा मामला इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के सामूहिक दान का है। 5 अगस्त 2020 को हुए ऐतिहासिक भूमि पूजन से पहले, एसोसिएशन ने देश भर के सर्राफा व्यापारियों से 34.64 किलोग्राम चांदी इकट्ठा की थी, जिसे 30 पीस चांदी की ईंटों के रूप में ढाला गया था। इसके अलावा कुछ अन्य चांदी की ईंटें और कलश भी सौंपे गए थे, जिससे दान की गई कुल चांदी का वजन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 40 से 60 किलोग्राम के बीच पहुंच जाता है।

रामलला को दान की गई करीब 40-60 (40kg + Others) किलो चांदी और एक विशेष दीपक गायब

इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात रसीद और मंदिर की इन्वेंट्री के बीच का अंतर है। दानकर्ताओं के पास श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जारी की गई बकायदा आधिकारिक रसीदें और प्रमाण आज भी सुरक्षित मौजूद हैं। इसके बावजूद, मंदिर के वर्तमान आधिकारिक इन्वेंट्री रिकॉर्ड में इस भारी-भरकम चांदी और ऐतिहासिक दीपक का कोई अता-पता नहीं है। रसीद होने के बाद भी सरकारी या ट्रस्ट के बही-खातों में इस दान का दर्ज न होना इस पूरे मामले को एक गहरे रहस्य और गंभीर जांच के दायरे में खड़ा करता है।

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कब और कैसे शुरू हुआ संदेह?

दान की गई इतनी बड़ी मात्रा में चांदी के गायब होने का यह संदेह अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि इसकी शुरुआत साल 2020 में मंदिर के भूमि पूजन समारोह के दौरान ही हो गई थी। अनुराग रस्तोगी के अनुसार, उन्हें और एसोसिएशन के तमाम सर्राफा व्यापारियों को पूरी उम्मीद थी कि उनके द्वारा दान की गई इस पवित्र चांदी का उपयोग मंदिर की नींव (Foundation) की खुदाई या मुख्य अनुष्ठान में किया जाएगा। हालांकि, प्रधानमंत्री के कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल या किसी अन्य प्रशासनिक वजह से उस ऐतिहासिक समारोह में इस चांदी को कहीं भी नहीं देखा गया। चूंकि दानकर्ताओं को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की निष्पक्षता और पवित्रता पर पूरा भरोसा था, इसलिए उन्होंने लंबे समय तक इस विषय पर कोई सवाल नहीं उठाया। लेकिन हाल ही में जब मंदिर की आंतरिक ऑडिट और इन्वेंट्री सूची सामने आई, जिसमें इस दान का कोई उल्लेख नहीं मिला, तब जाकर डोनर्स की चिंताएं अचानक बढ़ गईं और यह पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।

राजनीतिक विश्लेषक डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला

राम मंदिर में हुए कथित चंदा गबन के मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार को घेरते हुए राजनीतिक विश्लेषक डॉ. मुनीश कुमार रायजादा ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि फंड की हेराफेरी के मामलों में कानूनी तौर पर पहला कदम FIR होना चाहिए, लेकिन सरकार ने सीधे SIT का ऐलान कर दिया जो बिना FIR और बिना किसी गजट नोटिफिकेशन (राजपत्र अधिसूचना) के कानूनी रूप से मान्य ही नहीं है। रायजादा के अनुसार, इस तथाकथित SIT में न तो कोई कानूनी व्यक्ति (जैसे जज) शामिल है और न ही जनता के लिए कोई आधिकारिक फोन नंबर या ईमेल जारी किया गया है जहां लोग जानकारी रिपोर्ट कर सकें। लिहाजा, यह कोई वास्तविक एसआईटी नहीं बल्कि केवल एक सामान्य 'जांच समिति' है जो महज एक दिखावा (Eyewash) है। अंत में उन्होंने "राम लल्ला हम आयेंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे, फिर बांट मलाई खाएँगे!" का नारा देते हुए पूरे घटनाक्रम पर कड़ा राजनीतिक कटाक्ष किया।

डोनर का रुख और राजनीतिक हलचल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच दानकर्ताओं ने एक संतुलित रुख अपनाया है। अनुराग रस्तोगी और एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट या उसके महासचिव चंपत राय की नीयत पर कोई संदेह नहीं है, बल्कि उन्हें अंदेशा है कि मंदिर प्रशासन ने इस गड़बड़ी को अंजाम दिया है। दूसरी तरफ, इस संवेदनशील मुद्दे ने तुरंत राजनीतिक मोड़ ले लिया है। विपक्ष इसे मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार का बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रहा है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि विपक्ष आस्था के इस बड़े केंद्र को बदनाम करने के लिए राजनीति कर रहा है। [SP]