एमबीए छात्र पीयूष धामनोतिया ने अपनी गर्लफ्रेंड की हत्या कर दी और गिरफ्तारी के बाद भी कोई पछतावा नहीं दिखाया।
डेविड फुलर, टेड बंडी और केनेथ डगलस जैसे मामलों में शवों के साथ दुर्व्यवहार जैसी भयावह घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
भारत और विदेशों के पुराने मामलों ने जांच व्यवस्था, क्रूरता और न्याय प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए।
इंसान अगर निशाचर बन जाए, तो दिन के उजाले में किए गए उसके गलत काम भी रात के अंधेरे में छिप नहीं पाते हैं। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आज के समय में इंसानों के भीतर एक अलग ही विकृति देखने को मिल रही है और वो है हवस के प्रति पागलपन। हाल ही में एक ऐसी ही घटना देखने को मिली है। मामला 10 फ़रवरी 2026 का है जब इंदौर के द्वारकापुरी इलाके में हुई एक सनसनीखेज हत्याकांड ने सबके होश उड़ा दिए।
25 वर्षीय एमबीए छात्र पीयूष धामनोतिया (Piyush Dhamnotia) नामक व्यक्ति ने अपनी 24 वर्षीय र्लफ्रेंड की हत्या की और फिर उसके शव के साथ दुर्व्यवहार किया। हैरानी की बात यह है कि जब पीयूष की गिरफ्तारी हुई, तो उसे इस बात का जरा भी पछतावा नहीं था। मीडिया के सामने उसने मुस्कुराते हुए कहा कि "जो हो गया, सो हो गया।" पीयूष के चेहरे पर जरा भी डर का भाव नहीं दिखा।
हालांकि, आपको जानकर हैरानी होगी कि ऐसी कहानी सिर्फ पीयूष जैसे दरिंदों की नहीं है बल्कि दुनिया में 5 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया था। आज उन 5 केस की चर्चा करते हैं।
यह घटना साल 2006 की है जब नोएडा के सेक्टर-31 स्थित व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंडेर की कोठी (D-5) के पीछे नाले से बच्चों के नरकंकाल मिले थे। घटना सामने आते ही बवाल मच गया। इस घटना में करीब 19 बच्चों और महिलाओं के अपहरण, बलात्कार, हत्या और अंगों के व्यापार जैसे गंभीर आरोप लगे थे। उसपर यह आरोप था कि वो बच्चों और महिलाओं को मारने के बाद उनके शव के साथ दरिंदगी करता था। मामले की जाँच जब शुरू हुई तब पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंडेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया।
निचली अदालत ने मोनिंदर सिंह पंडेर को मौत की सजा दी थी लेकिन 16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सबूतों के आभाव के चलते पंडेर को सभी मामलों में बरी कर दिया। वहीं, 20 अक्टूबर 2023 को वो जेल से रिहा हुआ। इसके बाद 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को भी अंतिम मामले में बरी कर दिया। कोर्ट के मुताबिक इस मामले में जांच एजेंसियों ने लापरवाही बरती थी, जिसके कारण सबूत नहीं मिल पाए। दोनों आरोपी रिहा हो चुके हैं लेकिन सवाल आज भी बरकरार है कि असली मुजरिम था कौन?
यह घटना ब्रिटेन की है और आरोपी का नाम डेविड फुलर (David Fuller) है। इस घटना को ब्रिटेन के इतिहास के सबसे भयानक और घृणित अपराधों में से एक गिना जाता है। डेविड एक अस्पताल में इलेक्ट्रीशियन के रूप में काम करता था। उसने अपनी पहुँच का फायदा उठाया और 2008 से 2020 के बीच मुर्दाघर में 100 से अधिक महिला शवों के साथ यौन दुर्व्यवहार किया।
ऐसा कहा जाता है इस घृणित काम का उसने वीडियो भी बनाया। असलियत तब सामने आई, जब 1987 के दो पुराने अनसुलझे हत्या के मामलों में उसे गिरफ्तार किया गया। जब गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके घर की तलाशी ली, तब उसने जो मुर्दाघर में कुकर्म किये थे, उसकी लाखों तस्वीरें और वीडियो बरमाद हुए। अपराधी डेविड इस समय जेल में है और आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। अब वो जेल से कभी बाहर नहीं आ पाएगा।
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अमेरिका का एक अत्यंत कुख्यात सीरियल किलर, बलात्कारी और अपहरण करने वाला था, जिसका नाम था, टेड बंडी (Ted Bundy), जिसपर यह इल्जाम था कि उसने 1974 से 1978 के बीच वाशिंगटन, यूटा, फ्लोरिडा और कोलोराडो सहित कई राज्यों में कम से कम 30 हत्याएं की थी। यह बात उसने खुद स्वीकारी भी थी। हालांकि, अनुमान के मुताबिक ये हत्याएं 100 के करीब हैं।
टेड बंडी (Ted Bundy)अक्सर महिलाओं को मदद के बहाने से बुलाता था और फिर उन्हें मारता था। फिर इसके बाद उनके शव के साथ यौन दुर्व्यवहार करता था। पहली बार वो 1975 में पकड़ा गया था लेकिन 1977 में वो जेल से भागने में कामयाब हुआ। जेल से भागने के बाद उसने कई हत्याएं की। अंत में पुलिस ने उसे 1978 में फ्लोरिडा से पकड़ा। 24 जनवरी 1989 को फ्लोरिडा स्टेट जेल में उसे इलेक्ट्रिक चेयर के माध्यम से मृत्युदंड दिया गया। अब ये दरिंदा इस दुनिया में जीवित नहीं है।
यह घटना अमेरिका की है जहाँ केनेथ डगलस (Kenneth Douglas) नामक व्यक्ति ने महिला शवों के साथ यौन दुर्व्यवहार किया था और उसने खुद यह बात कबूली भी थी। वो अमेरिका के ओहायो का रहने वाला था जहाँ वो हैमिल्टन काउंटी का एक पूर्व मुर्दाघर परिचारक था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1976 से 1992 के बीच उसने 100 से अधिक महिला शवों के साथ गलत काम किया था।
डगलस के इस घिनौने काम का खुलासा 2008 में हुआ जब कैरेन थॉम्पसन हत्याकांड की जाँच के दौरान उस शव पर डगलस का डीएनए मिला। अदालत में उसने खुद इस बात को कबूला था कि वो शराब या ड्रग्स के नशे में इन वारदातों को अंजाम देता था। 2012 में उसे तीन शवों के साथ दुर्व्यवहार के लिए सजा मिली थी। हालांकि 2020 में जेल में उसकी मौत हो गई।
विक्टर अर्दिसन (Víctor Ardisson), एक ऐसा खूंखार अपराधी, जिसे "द वैम्पायर ऑफ़ विलेमुर" (Vampire of Villemur) भी कहा जाता है। ये फ्रांस का एक घिनौना अपराधी था। यह घटना 19वीं सदी के अंत की है और जब इसके कुकर्म सामने आए, तो सबके होश उड़ गए। यह घटना मुख्य रूप से फ्रांस के विलेमुर-सुर-तर्न (Villemur-sur-Tarn) की है।
अर्दिसन कब्रिस्तान में कब्र खोदने का काम करता था जहाँ उसने करीब 100 से अधिक महिलाओं के शवों को कब्र से निकाला और उनके साथ यौन दुर्व्यवहार किया। साल 1901 में उसे रंगे हाथ पकड़ा गया जब वो एक युवा महिला की लाश के साथ आपत्तिजनक हालत में देखा गया। हैरानी की बात यह है कि पहले तो वो महिलाओं के शवों के साथ गलत काम करता था और उसके बाद अर्दिसन महिलाओं के अंगो को काटकर अपने पास स्मृति चिन्ह के रूप में रखता था।चिकित्स्क विशेषज्ञों ने उसे मानसिक रूप से पागल करार देते हुए पागलखाने भेज दिया था जहाँ उसकी 1944 में उसकी मृत्यु हो गई।
तो ये थे वो 5 खूंखार अपराधी, जिनका हाल इंदौर के पीयूष जैसा था और इन लोगों ने भी महिलाओं के साथ गलत कृत्य किया था।