दक्षिण-भारत में शादी के तरीके, उत्तर-भारत से कुछ मामलों में अलग है।
दक्षिण भारत के कुछ समुदायों में मामा की बेटी या पिता की बहन की बेटी (cross-cousin) से विवाह परंपरागत रूप से स्वीकार किया गया है।
हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार निषिद्ध रिश्तों में विवाह अवैध है, पर यदि किसी समुदाय में प्राचीन, निरंतर और स्वीकृत परंपरा के रूप में cross-cousin विवाह प्रचलित रहा हो, तो ऐसे विवाह को कानून सीमित अपवाद के रूप में वैध मानता है।
विविधता भारत की पहचान है। अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है। भारत में हर किसी को अपनी संस्कृति को संरक्षित करने का अधिकार है।
उत्तर (North) से लेकर दक्षिण (South) तक और पूरब से लेकर पश्चिम तक भारतीय विविधता के संदर्भ में कहा जाता है, कोस-कोस पर बदले पानी दस कोस पर बदले वाणी। संस्कृतियों के जन्म लेने में भौगोलिक बनावट का भी बड़ा योगदान होता है। भारत की विभिन्नता भरी संस्कृति के उत्पन्न होने में यहाँ के भौगोलिक बनावट का बहुत योग दान है। भारत में अलग-अलग धर्म के लोग रहते हैं। जीवन यापन का अलग-अलग तरीका होता है। शादी भी इसी संस्कृति का एक हिस्सा है।
प्रायः ये समझा जाता है कि मुस्लिम समुदाय में चचेरे भाई-बहन की आपस में शादी होती है। शादी के मामले में हिन्दू धर्म को इससे अलग समझा जाता है। दक्षिण भारत में चचेरे या ममेरे सम्बन्धी आपस में शादी कर लेते हैं। दक्षिण भारत में मामा की शादी भांजी से हो जाती है। यह बात जब किसी उत्तर भारतीय हिन्दू को पहली बार पता चलता है तो वह चौंक जाता है।
दक्षिण भारत के हिंदुओं के शादी और उत्तर भारतीय हिंदुओं के शादी में काफी अंतर पाया जाता है। दक्षिण भारत में कुछ समुदाय ऐसे भी हैं जहां मामा की शादी भांजी से कर दी जाती है। चचेरे भाई-बहन की शादी भी आपस में कर दी जाती है। हालांकि ऐसे विवाहों की बहुत जगह पर आलोचना भी की जाती है।
मामा की शादी भांजी से-
आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में कुछ ऐसे समुदाय हैं जहां मामा की शादी भांजी से कर दी जाती है। ये शादियाँ कम्मा, रेड्डी, कुछ अन्य समुदायों में भी देखने को मिली हैं। कारण ये बताया जाता है कि घर की संपत्ति घर में रहती है। घर की संपत्ति को बचाए रखने के लिए शादियाँ आपस में ही कर दी जाती है।
चचेरे भाई-बहन की शादी
चचेरे भाई-बहन की शादी भी दक्षिण भारत (South Indian) में कुछ समुदायों में देखी गई है। भाई और बहन के लड़के-लड़कियों की शादी आपस में कर दी जाती है। वोक्कालिगा, लिंगायत (कुछ उपसमुदाय), कुरुबा, गौड़ा इत्यादि समुदायों में इस तरीके की शादियों को स्वीकार्यता प्राप्त है। उनका मानना है कि बहन का पूरा हक उसके परिवार की संपत्ति पर रहता है, इसलिए भाई के लड़के से बहन की लड़की का शादी कर दिया जाता है।
हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act-1955) के तहत सामान्य तौर पर इस तरीके के विवाह को अवैध माना गया है। परंतु यह भी कहा गया है कि अगर यह रस्म प्राचीन परंपराओं का एक हिस्सा है तो फिर शादी की जा सकती है।
अधिनियम की धारा 5 में यह बताया गया है कि शादी के समय दोनों पक्ष के रिश्ते निसिद्ध नहीं होने चाहिए। निसिद्ध से यहाँ तात्पर्य है कि दोनों का खून का संबंध नहीं होना चाहिए। एक खून के अलावा बहुत निकट के संबंध होने पर भी शादी पर रोक है जैसे मामा का लड़का और बुआ की लड़की की शादी नहीं हो सकती परंतु इस तरीके के परंपराओं का प्रचालन समुदाय में प्राचीन समय से चलता आ रहा है तो वो इसे आगे तक बढ़ा सकते हैं।