M-फैक्टर सुनते ही लोगों के मन में 2 ही बातें पहले आती है l पहला है मुस्लिम और दूसरा है महिला l यही दोनों हर चुनाव में बड़ा उलट-फेर करते हैं l लेकिन बंगाल के चुनाव में 4 M-फैक्टर हैं, जो कि मुस्लिम, मतुआ, मोदी और ममता l अब एक-एक कर के इन सभी के बारे में जानते हैं l  AI Generated
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बंगाल चुनाव से पहले हुआ बड़ा खेल, 'M' फैक्टर का मुद्दा खत्म, इस दांव पेंच से TMC को पटखनी देने की तैयारी में बीजेपी !

M-फैक्टर सुनते ही लोगों के मन में 2 ही बातें पहले आती है l पहला है मुस्लिम और दूसरा है महिला l यही दोनों हर चुनाव में बड़ा उलट-फेर करते हैं l लेकिन बंगाल के चुनाव में 4 M-फैक्टर हैं, जो कि मुस्लिम, मतुआ, मोदी और ममता l अब एक-एक कर के इन सभी के बारे में जानते हैं l

Author : Vikas Tiwari

West Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल के 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा l पहले चरण के 152 सीटों पर 23 अप्रैल वो वोट डाले जायेंगे और वहीँ दूसरे  चरण में बाकी 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होगा aur नतीजे 4 मई को आएंगे l इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच काँटे की टक्कर देखने को मिल रही है l TMC की ओर से ममता बनर्जी मुख्यमंत्री की प्रबल दावेदार हैं और वहीँ भाजपा की ओर से अभी CM उम्मीदवार का कोई ऐलान नहीं हुआ है l लेकिन फिर भी भवानीपुर सीट से भाजपा के सुवेंदु अधिकारी और TMC की ओर से ममता बनर्जी आनमे-सामने हैं l ये मुकाबला अबकी बार चुनाव को और भी  दिलचस्प बना रहा है l 

हर बार बंगाल चुनाव में ध्रुविकरण का मामला एक अहम भूमिका में रहता है l इस चुनाव में भी कुछ ऐसे ही देखने को मिल रहा है l बंगाल की जनता दो धाराओं में बंट गयी है l M-फैक्टर का मतलब सीधे महिला या फिर मुस्लिम से जोड़ कर देखा जाता है l लेकिन इस चुनाव में M-फैक्टर केवल 2 (महिला-मुस्लिम) नहीं है और भी हैं l इस M- Factor फैक्टर के होते हुए भी SIR यानी (Special Intensive Revision) स्पेशल इंटेंसिव रिविजन सबसे बड़ा मुद्दा बन कर उभरा है l TMC के सभी नेता एक ही राग अलापते नजर आ रहे हैं, अपने हर चुनावी सभा या फिर रैली में SIR को एक बड़ा मुद्दा बना कर बंगाल की जनता को केंद्र सरकार के नीतियों के खिलाफ बार-बार भड़का रहे हैं l अब ये देखना मजेदार होगा कि SIR TMC पार्टी को कितने सीट जितवा सकती है l क्या SIR के सहारे TMC की नैया पार हो सकती है ? इन सभी प्रश्नों के उत्तर 4 को सामने आएगा l 

बंगाल की चुनाव में क्या है M-फैक्टर ?

M-फैक्टर सुनते ही लोगों के मन में 2 ही बातें पहले आती है l पहला है मुस्लिम और दूसरा है महिला l यही दोनों हर चुनाव में बड़ा उलट-फेर करते हैं l लेकिन बंगाल के चुनाव में 4 M-फैक्टर हैं, जो कि मुस्लिम, मतुआ, मोदी और ममता l अब एक-एक कर के इन सभी के बारे में जानते हैं l 

  1. मुस्लिम (Muslim): अगर मुस्लिम आबादी की बात करें तो इनकी संख्या पश्चिम बंगाल में करीब 25-27 फीसदी है और ये लोग ममता दीदी के बड़े वोटबैंक माने जाते हैं l मुस्लिम भी ममता बनर्जी को बढ़-चढ़ कर वोट देते हैं और इनकी सरकार बनाने में मुख्या भूमिका निभाते हैं l हर बार की तरह इस चुनाव में भी मुस्लिम फैक्टर बड़ा है लेकिन अब की बार सबकी नजर SIR पर टिकी है l 

  2. मतुआ (Matua): सुनने में ये थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन ये भी इस चुनाव में एक बड़ा M-फैक्टर माना जा रहा है l 50-55 सीटों पर मतुआ जनजाति की पकड़ का लोहा माना जाता है l यही कारण है की भाजपा और TMC दोनों पार्टियां मतुआ जनजाति को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ते और उनके वोट को पाने  की हर मुमकिन कोशिश करते हैं l 

  3. मोदी (Modi) : भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता TMC के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन कर सामने आई है l चाहे किसी राज्य में चुनाव हो हर राज्य में भाजपा मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ती है और जीतती है l यही कारण है कि TMC के नेता बंगाल में  मोदी के बढ़ते लोकप्रियता से घबराए हुए हैं l 

  4. ममता (Mamata) : ममता दीदी बंगाल की राजनीति  में बाकी तीनों M-फैक्टर के मुकाबले सबसे तगड़ी फैक्टर मानी जाती है l भले ही भाजपा कितना भी जोर लगा ले लेकिन आज तक बंगाल में ममता को टक्कर देने वाला नेता BJP के पास नहीं है, और ममता दीदी भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं l

SIR का मुद्दा:

2026 के विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया विवादों में घिरी हुई है। बिहार में वोटों को गलत तरीके से हटाने के मुद्दे पर राजनीतिक रैलियां हुईं और पश्चिम बंगाल में भी यह मुद्दा चुनावी मुद्दा बन गया। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को सही करने के लिए विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया शुरू की। एसआईआर का उद्देश्य डुप्लिकेट, मृत, स्थानांतरित और अमान्य मतदाताओं के नाम हटाना था। जब नवंबर 2025 में पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया शुरू हुई, तो ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया। पश्चिम बंगाल में पहले 76.6 मिलियन मतदाता थे। एसआईआर के बाद कुल 90.66 लाख नाम हटाए गए। पात्र मतदाताओं की संख्या अब घटकर 67.7 मिलियन हो गई है। यह प्रक्रिया नवंबर 2025 में शुरू हुई और अप्रैल 2026 तक चली। एसआईआर के पहले चरण में 58 लाख से अधिक नाम हटाए गए।

[VT]

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