

चुनाव आयोग द्वारा अब की बार बुजुर्गों और दिव्यंगों को ध्यान में रखकर चुनावी प्रक्रिया को और सरल एवं सुलभ बनाने के लिए घर बैठे वोट देने की प्रक्रिया को बहाल किया है l जो कि होम वोटिंग के नाम से जाना जाता है l इस पहल में ख़ास तौर पर उन वृद्धों और दिव्यांगों को फायदा होगा जो किसी कारण से मतदान केंद्र तक नहीं पहुँच सकते हैं l
क्या है होम वोटिंग:
होम वोटिंग (Home Voting) एक संवैधानिक प्रक्रिया है जो इस बार होने वाले 4 राज्य (असम, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु) और 1 एक केन्द्रशासित प्रदेश (पुडुचेरी) के विधानसभा चुनावों (assembly elections) में अमल किया जा रहा है l जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) 1951 की धारा 60 (c) के तहत जनता को दी जाती है l इस प्रक्रिया से बुजुर्ग और दिव्यांग (senior citizen and PWDs) घर बैठे ही चुनाव में वोट दे सकते हैं l मुख्य रूप से इसी वर्ग के लिए यह सुविधा दी जाती है l इस प्रक्रिया के तहत ऐसे मतदाता घर बैठे पोस्टल बैलेट (postal ballot) के माध्यम से अपना वोट देंगे l इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग ने कड़ा दिशा-निर्देश जारी किया है. देश में जिन पार्टियों को मान्यता प्राप्त है उन्हें मतदाता सूची पहले दे दी जाती है जो मतदाता इस विकल्प का चयन करते हैं l इसके साथ-साथ अगर पार्टी वाले चाहे तो अपने दल के किसी कार्यकर्ता को भी चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ भेज सकते हैं l
चुनाव आयोग (Election Commission) ने यह भी बताया कि जो बुजुर्ग और दिव्यांग होम वोटिंग सुविधा का इस्तेमाल नहीं करना चाहते उनके लिए मतदान केंद्र पर विशेष सुविधाओं का प्रबंध किया गया है, जैसे कि व्हीलचेयर, प्रतीक्षा केंद्र, वालंटियर्स आदि सुविधाएं ख़ास तौर पर 85+ वर्ष वृद्ध और दिव्यंगों के लिए तैनात रहेंगे, और किसी कारण मतदाता को कोई परेशानी न हो l
असम, पुडुचेरी, और केरल में 9 अप्रैल को चुनाव योग द्वारा मतदान की घोषणा हो चुकी है l पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भी चुनावी कार्यक्रम चल रहे हैं और पहले चरण की अधिसूचना 30 मार्च को जारी हुई थी l दूसरे चरण की अधिसूचना 2 अप्रैल को जारी होगी l
अगर होम वोटिंग की सुविधा के बारे में बात करें तो चुनाव आयोग इसे एक बेहतरीन कदम बता रहा है जहाँ कोई भी वोटर अपने मतदान से वंचित नहीं हो सकता और घर बैठे ही मतदान कर सकता है l चुनाव आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया से चुनाव को और भी समावेशी बनाया जा सकता है l
भारतीय चुनाव में होम वोटिंग का प्रयोग:
पहली बार वर्ष 2023 के राजस्थान चुनाव में होम वोटिंग को एक पायलट प्रोग्राम के तौर पर शूरू किया गया l अगर राष्ट्रीय स्तर की बात करें तो साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पूरे देश में लागू किया गया l उसके बाद दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों में भी इसका प्रयोग किया गया l इस पहल का मकसद चुनाव में बुजुर्ग और दिव्यांगों की भागीधारी बढ़ाना है l
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