स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट में बाल यौन शोषण और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर याचिका दाखिल की गई है; शिकायत आशुतोष ब्रह्मचारी ने 8 फरवरी 2026 को दर्ज कराई, जबकि 10 फरवरी को शंकराचार्य पक्ष ने जवाब दाखिल किया।
यह मामला उस समय सामने आया है, जब शंकराचार्य और योगी आदित्यनाथ सरकार के बीच गौ हत्या को लेकर पहले से टकराव चल रहा था; माघ मेले के दौरान भी दोनों पक्षों में तीखी बयानबाजी हुई थी।
शंकराचार्य ने आरोपों को राजनीतिक साज़िश बताते हुए खारिज किया है और कहा है कि उनकी आवाज़ दबाने के लिए यह कदम उठाया गया है; वहीं मामला फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया में है और आरोपों पर अदालत का फैसला आना बाकी है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के ऊपर बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया है। वो पिछले दिनों लगातार चर्चा में इसलिए बने रहे कि प्रयागराज में उनकी बहस उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन से हो गई थी। उस समय शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर जमकर हमला बोला था। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच बहस लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच एक महंत ने शंकराचार्य के ऊपर बाल यौन शोषण का आरोप लगाया है। महंत का नाम आशुतोष ब्रह्माचारी है, जो कि रामभद्राचार्य के शिष्य हैं। मामले को लेकर आशुतोष ब्रह्माचारी ने 8 फरवरी 2026 को प्रयागराज के स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में में इसकी शिकायत दर्ज़ कराई है। 10 फरवरी को शंकराचार्य के वकील ने इसके जवाब को दाखिल किया था।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में स्थित श्री तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्माचारी ने 8 फरवरी 2026 को प्रयागराज के स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एक याचिका दायर की थी। आशुतोष ब्रह्माचारी का कहना है कि उनके पास ऐसे बहुत सारे बच्चों की सूचि है जिन्होंने यह कहा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उनके साथ अत्याचार किया है। आशुतोष का कहना है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पास आय से अधिक संपत्ति है। उनके शिविर में बच्चों का यौन शोषण हुआ है। इसकी शिकायत बच्चों ने की है।
बता दें कि माघ मेले के दौरान शंकराचार्य (Shankaracharya) और रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्माचारी आमने-सामने हो गए थे। दोनों ने काफी तीखी बयानबाजियां भी की। बाद में किसी तरह मामला शांत हुआ। अब आशुतोष ब्रह्माचारी ने शंकराचार्य के खिलाफ शिकायत दर्ज़ करके एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Swami Avimukteshwaranand Saraswati) के पास जब शिकायत की खबर पहुंची तो उन्होंने फिर योगी आदित्यनाथ पर साज़िश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार, दोनों ने उनको साज़िश के तहत बदनाम करने की कोशिश की है। गौ-माता को राष्ट्र-माता बनाने के लिए जिस तरीके से मुद्दे उठाए जा रहे हैं, केंद्र से लेकर राज्य तक की भाजपा सरकार से यह बिल्कुल सहन नहीं हो रहा है। उनके अंदर इतनी क्षमता नहीं बची है कि गौ-माता को राष्ट्र-माता घोषित कर सकें। मेरे ऊपर आरोप इसलिए लगाए जा रहे हैं कि मेरी आवाज को दबाया जा सके।
बता दें कि साल 2014 में भाजपा ने लोकसभा के चुनाव में गौ हत्या का मामला बड़े ही उग्र तरीके से उठाया था। भाजपा (BJP) तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रही लेकिन अब तक गौ हत्या का मामला नहीं रुका और गौ हत्या लगातार बढ़ता चला गया। दूसरी तरफ भाजपा ने अल्लाना ग्रुप से दो करोड़ का चंदा लिया जो कि हलाल बोनलेस भैंस के मांस के सबसे बड़े उत्पादक और निर्यातक कंपनी है।
शंकराचार्य का कहना है कि पहले हमारे लोगों को मारा गया, पीटा गया, अपमानित करने की हजार कोशिश की गई, लेकिन जब उससे बात नहीं बनी तो इस तरीके का घिनौना आरोप लगाया गया। उन्होंने कहा कि यह ऐसा आरोप है जिसे सभ्य समाज कभी भी स्वीकार नहीं करेगा, पर कोई बात नहीं कहते हैं ना कि 'साँच को आंच क्या'।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती फिलहाल उत्तराखंड स्थित ज्योतिर्मठ पीठ (Jyotirmath Pitha) के शंकराचार्य हैं। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में 15 अगस्त 1969 को हुआ था। उन्होंने काशी (Kashi) के सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय ( Sampurnanand Sanskrit Vishwavidyalaya) से शास्त्री और आचार्य की डिग्री हासिल की है।
काशी में ही उनकी मुलाकात स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से हुआ था। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को अपना गुरु मानकर उनसे सन्यास की दीक्षा ली और इसके बाद नाम बदलकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हो गया।
स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती का निधन साल 2022 में हो गया। इसके बाद उनकी वसीयत के आधार पर इनको ज्योतिर्मठ पीठ पर स्वरूपानंद के उत्तराधिकारी के रूप में जाना गया। इसके बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पीठ की कमान संभल ली।