

दिल्ली पुलिस ने एक महिला आश्मा बेगम को गिरफ्तार किया, जो लंबे समय से खुद को विदेशी दूतावास की सलाहकार बताकर नीली राजनयिक नंबर प्लेट का इस्तेमाल कर रही थी; यह मामला देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा माना जा रहा है।
आरोपी महिला ने खुद को रामदास आठवले की पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया का राष्ट्रीय सचिव बताकर प्रभाव जमाने की कोशिश की; मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार करोड़ों रुपये के घपले की भी जांच चल रही है।
ऐसे मामलों ने प्रशासनिक निगरानी और सरकारी गंभीरता पर सवाल खड़े किए हैं ।
दिल्ली में एक महिला ने फर्ज़ी राजनयिक बनकर सबको चौंका दिया है। महिला ने काफी समय तक राजनयिक बनकर लोगों के आँखों में धूल झोंकने का कार्य किया। बाद में दिल्ली पुलिस द्वारा महिला को गिरफ्तार कर लिया गया। महिला ने पहले तो पुलिस को चकमा देने का प्रयास किया, परन्तु बाद में पुलिस की सख्ती के आगे उसकी दाल नहीं गल पाई और महिला ने अपने गाड़ी पर फर्ज़ी नंबर प्लेट वाली बात को स्वीकार किया। महिला का नाम डॉ आश्मा बेगम (Dr Ashma Begum) बताया जा रहा है। महिला द्वारा इस तरीके से फर्ज़ी राजनयिक के रूप में कार्य करना, देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर एक खतरा माना जा रहा है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से एक महिला के फर्ज़ी राजनयिक (Diplomat) वाली कहानी काफी चर्चे में है। महिला असम (Assam) की रहने वाली है, जिसका नाम आश्मा बेगम है। आश्मा काफी लम्बे समय से दिल्ली में रह रही थी। वह अपने आपको एक विदेशी दूतावास का सलाहकार बताती रही। दिल्ली के बसंत विहार इलाके के लोग आश्मा को एक बड़ी अधिकारी के रूप में पहचानते थे।
आश्मा (Ashma Begum) की गाड़ी पर नीली राजनयिक प्लेट लगा रहता था। वहीं आश्मा (Ashma) ने अपना सम्बन्ध रामदास आठवले की पार्टी से भी बताया। उन्होंने अपने आपको केंद्र की भाजपा (BJP) सरकार में मंत्री रहे रामदास आठवले (Ramdas Bandu Athawale) की पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) का राष्ट्रीय सचिव भी बताया। इसी बीच यह महिला दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के हत्थे चढ़ गई और 15 जनवरी 2026 को गिरफ्तार कर ली गई।
जानकारी के अनुसार, आश्मा का सम्बन्ध भाजपा (BJP) के सहयोगी दल से रहा था। बता दें कि केंद्र में भाजपा की सरकार फिलहाल 2014 से लगातार बनी हुई है। अगर महिला का सम्बन्ध सत्ताधारी पार्टी से था, तो क्या उसने सत्ता का दुरुपयोग करने की कोशिश की ? लोगों की तरफ से यह सवाल किया जा रहा है कि इतने बड़े पद का दुरुपयोग कैसे किया जा सकता है। कानून का ढोल पीटने वाली भाजपा सरकार की नाक के नीचे ही फर्जीवाड़ा का सिलसिला लम्बे समय तक जारी रहा। महिला को गिरफ्तार किया जा चुका, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक महिला ने करोड़ों रूपए का घपला भी किया है। फिलहाल महिला से पूछताछ जारी है।
इस तरीके के अन्य मामले भी आते रहे हैं। कुछ समय पहले, साल 2024 में गुजरात की राजधानी गाँधी नगर में एक फर्ज़ी जज का मामला प्रकाश में आया था। गांधीनगर में मॉरिस क्रिश्चियन नाम का शख्स एक फर्ज़ी कोर्ट बना लिया था। वह 9 साल से फर्ज़ी कोर्ट बनाकर काम करता रहा। काफी समय बाद, जब गुजरात के प्रशासन को मामले की भनक लगी तो उसको गिरफ्तार किया गया। इस फर्ज़ी कोर्ट में उसने मात्र एक साल में लगभग 500 फैसले करने की बात को कबूल किया था।
इस तरीके की घटनाएं यह दिखाती हैं कि देश के अंदर अलग-अलग जगहों पर प्रशासन कितना ढीला हो चुका है। कहीं कोई शख्स फर्ज़ी जज बन जा राजा है, तो कोई फर्ज़ी कोर्ट ही बना ले रहा है, और कोई फ़र्ज़ी राजनयिक बन जा रहा है। इस तरीके की घटनाएं सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े करते हैं।
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भारत में इस तरीके के आपराधिक कृत्य के लिए अलग-अलग तरीके के प्रावधान है। जैसे कि बीएनएस (BNS) की की धारा धारा 205 के तहत पहचान बदलकर धोखा देने के मामले में तीन से पांच साल की सज़ा हो सकती है। वहीं अन्य मामलों जैसे फर्ज़ी दस्तावेज या फिर जालसाजी के आरोप में सात से दस साल की जेल हो सकती है और साथ में जुर्माने का भी प्रावधान है। फर्जी तरीके से पद धारण करने वाले मामले में दस साल तक की सजा का भी प्रावधान किया गया है।