राम मंदिर चोरी मामले में लवकुश मिश्रा की खूब चर्चा हो रही है। 12-15 हजार रुपये की नौकरी करने वाले शख्स ने 25 लाख का एक आलीशान बंगला खड़ा कर दिया। यह मामला ऐसे समय में उजागर हुआ है, जब राम मंदिर में हुई चोरी चारों तरफ चर्चा का विषय बनी हुई है।
राम मंदिर के मामले में मिश्रा ब्रदर्स की कहानी उस समय से शुरू होती है, जब 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद कैश-काउंटिंग (नकद गणना) टीम की जरूरत पड़ी। मार्च 2024 में अनिल मिश्रा की सिफारिश पर अनुकल्प मिश्रा को राम मंदिर में पैसे गिनने वाली टीम में रख लिया गया।
वहीं, अनुकल्प मिश्रा ने अपनी नियुक्ति के महज 6 महीने के भीतर लवकुश मिश्रा को भी टीम में शामिल करवा लिया। इसके बाद लवकुश मिश्रा ने भी बहुत सारा चढ़ावा इधर-उधर कर दिया। लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा के बीच जीजा-साले का रिश्ता बताया जा रहा है, हालांकि यह रिश्ता दूर का है।
लवकुश मिश्रा (LavKush Mishra) की नौकरी लगे ज्यादा समय नहीं हुआ था कि इसी बीच लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर अयोध्या में एक आलीशान मकान बनाने का काम शुरू हो गया। इस मकान की कीमत लगभग 25 लाख रुपये से ऊपर बताई जा रही है। वहीं, जबसे राम मंदिर का यह मामला उजागर हुआ है, तबसे मकान बनाने का काम बंद हो गया है।
बता दें कि मकान पर संदेह इसलिए जाता है क्योंकि लवकुश मिश्रा की मासिक आय लगभग 12-15 हजार रुपये बताई गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी कम मासिक आय वाला शख्स इतनी जल्दी बंगला कैसे खड़ा कर सकता है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले ऐसा नहीं था, लेकिन जब मकान बनना शुरू हुआ तो लोगों को बिल्कुल आभास नहीं था कि राम मंदिर से चोरी का पैसा यहाँ तक पहुँचाया जा रहा है। हालांकि, इस बंगले के लिए पैसा कहाँ से लाया गया, इसकी जांच सीबीआई (CBI) कर रही है।
बता दें कि एसआईटी (SIT) ने जब जांच-पड़ताल शुरू की तो हैरान करने वाली बातें सामने आईं। SIT की जांच में सामने आया कि लवकुश मिश्रा ने लगभग 12 लाख रुपये गोबर के उपलों (कंडों) में छुपाकर रखे थे। यह मामला जैसे ही मीडिया में उजागर हुआ, लोगों के होश उड़ गए।
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राम मंदिर में चोरी का यह मामला अब एक बहुत बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विपक्ष का कहना है कि सरकार 'बड़ी मछलियों' को बचाने की कोशिश कर रही है। बता दें कि इस पूरे मामले में सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला, रमाशंकर मिश्रा और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के ऊपर कार्रवाई जारी है।
वहीं चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव ये तीनों ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कद्दावर चेहरे हैं, जो ट्रस्ट के सदस्य भी हैं। इनके ऊपर अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं होने से राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि आरएसएस के दबाव में सरकार इन लोगों पर किसी भी तरह की प्राथमिकी (FIR) से परहेज कर रही है। वहीं, कुछ जानकारों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में जांच आगे बढ़ने पर आगे और कार्रवाई की जा सकती है।
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