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अयोध्या: राम मंदिर (Ram Mandir) में चंदा चोरी मामले में कुल 8 लोगों को अदालत में पेश किया गया। वहीं दूसरी तरफ चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ FIR दर्ज न होने से कई सवाल खड़े किये जा रहे हैं। राम मंदिर ट्रस्ट के तीन मुख्य सदस्यों के ऊपर FIR न होने से सरकार पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है।
दरअसल, चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव तीनों ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं। ये तीनों राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य भी रहे हैं, साथ में चंपत राय को इन सबमें सबसे वरिष्ठ माना जाता था। राम मंदिर में हुई चोरी से आरएसएस और भाजपा सरकार सवालों के कटघरे में है। इसी बीच खबर निकलकर आ रही है कि चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन SIT ने इस खबर से किनारा किया है।
राम मंदिर (Ram Mandir) में हुई चोरी के मामले में यह आरोप लग रहा है कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव जैसी बड़ी मछलियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। कुल आठ लोगों को हिरासत में लेकर अदालत के समक्ष लाया गया है। दूसरी तरफ राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक तूफान में बदल चुका है। तीन रसूखदार नामों को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है और विपक्ष का आरोप है कि बड़ी मछलियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
आपको बता दें कि सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, लवकुश मिश्रा, अनुपम/अनुपक्ल मिश्र, मनीष कुमार, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला, रमाशंकर मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को अदालत में लाया जा चुका है। वहीं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ अब तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई है। आपको बता दें कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव ये तीनों ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के कद्दावर चेहरे हैं, जो ट्रस्ट के सदस्य हैं। इनमें चंपत राय को सबसे वरिष्ठ और रसूखदार माना जाता है।
इस पूरी घटना में जिन तीन लोगों के नाम सामने निकलकर आ रहे हैं, उनमें ज्यादातर लोग आरएसएस से जुड़े रहे हैं। चंपत राय स्वयं आरएसएस से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं। बता दें कि चंपत राय ने आरएसएस के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी। संघ का प्रचार करते हुए वो साल 1975 में पूर्णकालिक संघ प्रचारक बने। चंपत राय उस वक्त भी चर्चा में आए थे जब राम मंदिर बनाने के लिए चंदा इकट्ठा किया जा रहा था। साल 2019 में राम मंदिर के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया था। उस समय चंदा जुटाने का रोडमैप बनाने में चंपत राय की अहम भूमिका थी।
वहीं अनिल मिश्रा भी आरएसएस के लंबे समय तक प्रचारक रहे हैं। साल 2017-2020 तक अवध प्रांत के प्रांत कार्यवाह रहे हैं। वहीं गोपाल राव भी आरएसएस से जुड़े रहे हैं। गोपाल राव ने भी आरएसएस में लंबा वक्त बिताया है। साल 1980 में परास्नातक पूर्ण करने के बाद उन्होंने आरएसएस के लिए काम करना शुरू कर दिया। साल 2008 से 2013 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में 'कर्नाटक उत्तर प्रांत' के मुख्य प्रांत प्रचारक (Pranth Pracharak) भी रह चुके हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सत्ता का इस्तेमाल इन लोगों को बचाने में किया जा रहा है? यह कयास लगाए जा रहे हैं कि SIT जांच प्रक्रिया जारी है, हो सकता है समय आने पर कार्रवाई इन लोगों पर हो। हालांकि अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। विपक्ष का कहना है कि इन रसूखदारों के खिलाफ अभी तक कोई FIR न होना सरकार की मंशा की तरफ इशारा है कि सरकार इस मामले को किसी और दिशा में ले जाना चाहती है।
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