ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) पिछले 15 साल से बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री हैं और उन्हें एक मजबूत महिला नेता के रूप में देखा जाता है। बंगाल में चुनावी माहौल गर्म है और जब भी चुनाव आता है तो एक हर पॉलीटिकल पार्टी का एक वादा महिलाओं की सुरक्षा का भी होता है। लेकिन सवाल ये है कि एक महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद क्या बंगाल की महिलाएं सुरक्षित महसूस करतीं हैं?
एक तरफ सरकार महिलाओं के लिए कई योजनाएं चला रही है, तो दूसरी तरफ आए दिन सामने आने वाले अपराध, खासकर रेप के मामले, चिंता बढ़ाते हैं। अब जब राज्य में फिर से चुनाव का माहौल बन रहा है, तो यह मुद्दा और भी ज्यादा अहम हो गया है। लोग सिर्फ विकास नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी जवाब चाहते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि ममता बनर्जी का कार्यकाल महिलाओं के लिए कितना सुरक्षित रहा है और चुनाव के समय यह मुद्दा कितना असर डाल सकता है।
ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का जन्म 5 जनवरी 1955 को कोलकाता में हुआ। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत छात्र जीवन में की और बाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) से जुड़ गईं। ममता बनर्जी पहली बार 1984 में लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बनीं, जब उन्होंने जादवपुर सीट से जीत हासिल की। इसके बाद वे कई बार सांसद रहीं और केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण पदों पर रहीं। उन्होंने 1991 से 1993 तक मानव संसाधन विकास, युवा मामले और खेल मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया। साल 1997 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर All India Trinamool Congress (TMC) की स्थापना की, जिससे उन्हें पश्चिम बंगाल में एक मजबूत पहचान मिली। वे 1999 से 2001 और 2009 से 2011 तक रेल मंत्री भी रहीं और कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू कीं।
उनका सबसे बड़ा राजनीतिक मुकाम 20 मई 2011 को आया, जब उन्होंने वाम मोर्चा की 34 साल पुरानी सरकार को हराकर पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद वे 2016 और 2021 में भी जीतकर लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बनीं।
ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की सरकार ने महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें “कन्याश्री” और “रूपश्री” जैसी योजनाएं काफी लोकप्रिय रही हैं, जिनका मकसद लड़कियों की शिक्षा और शादी में आर्थिक मदद देना है। इसके अलावा महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए भी कई पहल की गई हैं। ममता बनर्जी पर आरोप लगते हैं कि जब-जब चुनाव आता है इनकी सारी योजनाएं सक्रिय हो जाती हैं और चुनाव खत्म होते ही सभी योजनाओं की हवा निकल जाती है। लेकिन इन सबके बावजूद बंगाल (West Bengal) में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। आए दिन सामने आने वाले रेप और छेड़छाड़ के मामले लोगों के मन में डर पैदा करते हैं। बंगाल में महिला डॉक्टर के साथ हुआ रेप का मामला अब तक ठंडा नहीं हुआ है। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि रेप जैसे मुद्दों पर कानून बनाने के बजाय बंगाल की सरकार यह ऐलान करती है कि जिस भी महिला का रेप होगा उसे 2 लाख रुपए दिए जाएंगे। और इस प्रकार की घोषणा 21वीं सदी में हर एक महिला को अपनी सुरक्षा के लिए सोचने पर मजबूर कर देती है।
भारत के विभिन्न राज्यों में अपराध के आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) द्वारा जारी किए जाते हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल (West Bengal) में भी महिलाओं के खिलाफ अपराध, खासकर बलात्कार के मामलों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है। NCRB की 2022 रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में बलात्कार के लगभग 1,100 से अधिक मामले दर्ज किए गए। वहीं 2021 में यह संख्या करीब 1,120 के आसपास थी। ये आंकड़े दिखाते हैं कि मामलों में बहुत ज्यादा कमी नहीं आई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामले सामाजिक दबाव और डर के कारण दर्ज ही नहीं होते। सरकार और पुलिस द्वारा सुरक्षा बढ़ाने, जागरूकता अभियान चलाने और सख्त कानून लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी भी स्थिति में सुधार की जरूरत है।
आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (RG Kar Medical College and Hospital) में हुई यह घटना पूरे देश को झकझोर देने वाली थी। यह मामला 9 अगस्त 2024 को सामने आया, जब एक महिला जूनियर डॉक्टर का शव अस्पताल परिसर के अंदर संदिग्ध हालत में मिला। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि उनके साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉक्टर रात की ड्यूटी खत्म करने के बाद अस्पताल के सेमिनार हॉल में आराम करने गई थीं, जहां यह वारदात हुई। अगले दिन सुबह जब उनका शव मिला तो पूरे बंगाल में हड़कंप मच गया और मेडिकल स्टाफ ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच पहले राज्य पुलिस ने शुरू की, लेकिन बाद में इसे Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दिया गया। जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी संजय रॉय (Civic Volunteer) को गिरफ्तार किया। जांच में उसके खिलाफ कई सबूत मिले, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और मामला अदालत में विचाराधीन है।
दुर्गापुर (Durgapur) में सामने आया यह मामला भी काफी गंभीर और चिंताजनक था। यह घटना 2023 (मध्य वर्ष के दौरान रिपोर्ट) में सामने आई, जब एक महिला डॉक्टर/इंटर्न ने अस्पताल परिसर में अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म का आरोप लगाया। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह डॉक्टर रात की शिफ्ट में ड्यूटी कर रही थीं और उसी दौरान अस्पताल के अंदर ही एक व्यक्ति ने उनके साथ जबरदस्ती की।
घटना के बाद पीड़िता ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर जांच शुरू की गई। पुलिस ने शुरुआती जांच में एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया और बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, इस मामले में आरोपी का नाम आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया, क्योंकि जांच जारी थी और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा था।
इस घटना के सामने आने के बाद अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया और मामले की जांच आगे बढ़ाई।
इन घटनाओं और आंकड़ों से यह साफ दिखाई देता है कि पश्चिम बंगाल भी अब महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह गया है। बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामले यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ चुनावी मुद्दा बनकर रह गई है? क्या सख्त कानून और उनकी सही तरीके से पालन हो रहा है? क्या अस्पताल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान भी अब असुरक्षित हो गए हैं? आखिर कब तक महिलाएं डर के साए में जीने को मजबूर रहेंगी? ये सवाल आज भी जवाब मांग रहे हैं और समाज व सरकार दोनों की जिम्मेदारी तय करते हैं। [SP/MK]