एक राज्यपाल, दो राज्य और दो अलग रुख IANS
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'एक राज्यपाल, दो राज्य और दो अलग रुख', मुल्लापेरियार बांध विवाद पर तमिलनाडु-केरल के बीच अनोखी स्थिति

तमिलनाडु सरकार के नीति वक्तव्य में कहा गया कि राज्य मुल्लापेरियार बांध पर अपने अधिकारों की रक्षा करता रहेगा और मौजूदा बांध को हटाकर नया बांध बनाने के हर प्रयास का विरोध करेगा।

IANS

मुल्लापेरियार बांध विवाद को लेकर गुरुवार को एक अनोखी संवैधानिक और राजनीतिक स्थिति देखने को मिली, जब केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने तमिलनाडु विधानसभा में नई टीवीके सरकार का नीतिगत अभिभाषण पढ़ा। वह फिलहाल तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।

इस अभिभाषण में तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट रूप से दोहराया कि वह मुल्लापेरियार बांध को सुरक्षित मानती है और केरल द्वारा नए बांध के निर्माण की किसी भी मांग का कानूनी और राजनीतिक स्तर पर विरोध जारी रखेगी।

राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर चर्चा रही कि वही राज्यपाल, जो केरल के संवैधानिक प्रमुख भी हैं, तमिलनाडु विधानसभा में ऐसा नीति वक्तव्य पढ़ रहे थे जो मुल्लापेरियार विवाद पर केरल के आधिकारिक रुख के बिल्कुल विपरीत है।

तमिलनाडु सरकार के नीति वक्तव्य में कहा गया कि राज्य मुल्लापेरियार बांध पर अपने अधिकारों की रक्षा करता रहेगा और मौजूदा बांध को हटाकर नया बांध बनाने के हर प्रयास का विरोध करेगा।

दूसरी ओर, केरल लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि 100 वर्ष से अधिक पुराने मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं और नीचे रहने वाली आबादी की सुरक्षा के लिए नया बांध बनाया जाना आवश्यक है।

इस घटनाक्रम ने उस विशेष संवैधानिक स्थिति को भी उजागर किया है, जिसमें एक ही राज्यपाल दो पड़ोसी राज्यों का दायित्व संभालते हुए ऐसे दो निर्वाचित सरकारों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिनके बीच एक अंतरराज्यीय विवाद पर बिल्कुल अलग-अलग मत हैं।

संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार राज्यपाल का दायित्व अपने व्यक्तिगत विचार व्यक्त करना नहीं, बल्कि निर्वाचित सरकार की नीतियों और निर्णयों को विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत करना होता है। इसके बावजूद इस स्थिति ने राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि एक ही राज्यपाल सार्वजनिक रूप से दो विपरीत पक्षों का प्रतिनिधित्व कैसे कर रहे हैं।

मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा लंबे समय से केरल और तमिलनाडु के बीच सबसे संवेदनशील जल विवादों में से एक रहा है। जहां तमिलनाडु अपने दक्षिणी जिलों की जलापूर्ति के लिए इस बांध पर निर्भर है, वहीं केरल लगातार इसकी पुरानी संरचना को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताता रहा है।

विजय के नेतृत्व वाली नई टीवीके सरकार के नीति वक्तव्य से यह भी स्पष्ट हो गया है कि तमिलनाडु में राजनीतिक नेतृत्व बदलने के बावजूद मुल्लापेरियार बांध को लेकर राज्य की पारंपरिक नीति में कोई बदलाव नहीं होगा।

केरल के लिए यह घटनाक्रम संकेत है कि भविष्य में मुल्लापेरियार मुद्दे पर किसी भी कानूनी या राजनीतिक पहल का सामना तमिलनाडु के एकजुट और सख्त रुख से करना पड़ेगा। [SP]

(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)