रडार बंद, रास्ता बदला और... गायब! क्या MH370 का गायब होना महज़ एक हादसा था या कोई खौफनाक साज़िश?

8 मार्च 2014 की रात दुनिया की सबसे रहस्यमयी घटनाओं में से एक बन गई। मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH370 ने कुआलालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरी, लेकिन कुछ ही देर बाद वह अचानक रडार से गायब हो गई।
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8 मार्च 2014 की रात दुनिया की सबसे रहस्यमयी घटनाओं में से एक बन गई। मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH370 ने कुआलालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरी, लेकिन कुछ ही देर बाद वह अचानक रडार से गायब हो गई। विमान में 227 यात्री और 12 क्रू सदस्य सवार थे। हैरानी की बात यह थी कि विमान ने कोई आपातकालीन संदेश नहीं भेजा, कोई दुर्घटना संकेत नहीं मिला और न ही उसका मुख्य मलबा कभी बरामद हो सका। पिछले 12 वर्षों में इस विमान को लेकर सैकड़ों थ्योरी सामने आईं। किसी ने इसे तकनीकी खराबी बताया, किसी ने पायलट की साजिश कहा, तो कुछ लोगों ने अपहरण और सैन्य हस्तक्षेप जैसी संभावनाएं भी जताईं। लेकिन आज तक कोई भी सिद्धांत पूरी तरह साबित नहीं हो पाया है। यही वजह है कि MH370 आधुनिक विमान इतिहास का सबसे बड़ा रहस्य माना जाता है। तो आइए इसके बारे में जानते हैं।

कहां गायब हुआ विमान?

8 मार्च 2014 को स्थानीय समयानुसार रात 12:41 बजे MH370 ने मलेशिया के कुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरी। विमान का गंतव्य चीन का बीजिंग शहर था। उड़ान भरने के लगभग 40 मिनट बाद विमान ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल से अपना अंतिम सामान्य संपर्क किया। इसके बाद अचानक विमान का ट्रांसपोंडर बंद हो गया। आपको बता दें कि ट्रांसपोंडर वह उपकरण होता है जो विमान की स्थिति और पहचान रडार को बताता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि विमान सीधे अपने तय रास्ते पर नहीं गया। सैन्य रडार डेटा से पता चला कि विमान ने अचानक दिशा बदली और मलय प्रायद्वीप के ऊपर से वापस मुड़ गया। इसके बाद वह दक्षिणी हिंद महासागर की ओर बढ़ता हुआ दिखाई दिया और फिर हमेशा के लिए गायब हो गया।

MH370 ने मलेशिया के कुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरी
MH370 ने मलेशिया के कुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरीX

हालांकि विमान सामान्य रडार से गायब हो गया था, लेकिन एक सैटेलाइट कंपनी को विमान से कुछ ऑटोमेटिक "पिंग" सिग्नल मिलते रहे। ये सिग्नल लगभग सात घंटे तक आते रहे। इन्हीं सिग्नलों के आधार पर विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया कि विमान उत्तर की बजाय दक्षिणी हिंद महासागर की ओर गया होगा। बाद में खोज अभियान का केंद्र ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट से हजारों किलोमीटर दूर समुद्री क्षेत्र को बनाया गया।

विमान ढूँढने के लिए चलाया गया अभियान

MH370 को ढूंढने के लिए इतिहास का सबसे बड़ा समुद्री और हवाई खोज अभियान शुरू किया गया। मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और चीन समेत कई देशों ने इसमें हिस्सा लिया। 2014 से 2017 के बीच लगभग 1,20,000 वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र की तलाशी ली गई। समुद्र की गहराई कई जगह 6,000 मीटर से भी ज्यादा थी, जिससे खोज और मुश्किल हो गई।

इस अभियान पर करोड़ों डॉलर खर्च किए गए, लेकिन विमान का मुख्य मलबा नहीं मिल सका। यह असफलता आज भी कई सवाल खड़े करती है। 2015 में फ्रांस के रीयूनियन द्वीप पर विमान के पंख का एक हिस्सा मिला, जिसे "फ्लैपेरॉन" कहा जाता है। जांच में पुष्टि हुई कि यह MH370 का ही हिस्सा था। इसके बाद मोज़ाम्बिक, मेडागास्कर, तंजानिया और हिंद महासागर के अन्य तटीय इलाकों में भी कुछ मलबे मिले। विशेषज्ञों का मानना है कि ये टुकड़े समुद्री धाराओं के कारण वहां पहुंचे थे। हालांकि इन टुकड़ों से यह तो साबित हुआ कि विमान समुद्र में गिरा था, लेकिन दुर्घटना की असली वजह आज भी रहस्य बनी हुई है।

किन कारणों से गायब हुई विमान?

MH370 के गायब होने के बाद अनेक सिद्धांत सामने आए। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विमान में तकनीकी खराबी हुई होगी, जिसके कारण क्रू बेहोश हो गया और विमान ऑटो-पायलट पर उड़ता रहा। दूसरी तरफ कुछ जांचकर्ताओं ने शक जताया कि विमान को जानबूझकर रास्ते से हटाया गया था। इस थ्योरी में पायलट कैप्टन ज़ाहरी अहमद शाह का नाम भी चर्चा में आया, हालांकि इसके कोई ठोस सबूत नहीं मिले। कुछ लोगों ने अपहरण, साइबर हैकिंग और यहां तक कि सैन्य कार्रवाई जैसी थ्योरी भी पेश कीं। लेकिन इनमें से किसी भी दावे को आधिकारिक रूप से साबित नहीं किया जा सका।

MH370 के गायब होने के बाद अनेक सिद्धांत सामने आए।
MH370 के गायब होने के बाद अनेक सिद्धांत सामने आए। X

2018 में अमेरिकी समुद्री रोबोटिक्स कंपनी ओशियन इन्फिनिटी (Ocean Infinity) को विमान की खोज का जिम्मा दिया गया। कंपनी ने अत्याधुनिक पानी के भीतर चलने वाले रोबोट और स्कैनिंग तकनीक का इस्तेमाल किया। कई महीनों तक खोज जारी रही लेकिन विमान का कोई ठोस पता नहीं चल सका। इसके बाद यह मिशन भी बंद कर दिया गया।

क्या था 'नो फाइंड नो फि' समझौता?

करीब एक दशक बाद मलेशिया सरकार ने एक बार फिर MH370 की खोज को मंजूरी दी। ओशियन इन्फिनिटी (Ocean Infinity) ने नए डेटा और बेहतर तकनीक के आधार पर खोज दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव दिया। कंपनी और मलेशिया सरकार के बीच "नो फाइंड, नो फी" समझौता हुआ। इसका मतलब है कि अगर विमान नहीं मिलता तो कंपनी को भुगतान नहीं किया जाएगा। अगर मलबा मिल जाता है तो कंपनी को लगभग 70 मिलियन डॉलर मिल सकते हैं। नई खोज दक्षिणी हिंद महासागर के लगभग 15,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में की जा रही है। यह वह इलाका है जिसे विशेषज्ञों ने सबसे संभावित दुर्घटना स्थल माना है।

ओशियन इन्फिनिटी (Ocean Infinity) अत्याधुनिक Autonomous Underwater Vehicles (AUVs) यानी बिना चालक वाले समुद्री रोबोट का इस्तेमाल कर रही है। ये रोबोट समुद्र की कई किलोमीटर गहराई तक जाकर समुद्र तल की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें और डेटा इकट्ठा कर सकते हैं। 2025-26 के नए खोज अभियान के दौरान हजारों वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र को स्कैन किया गया, लेकिन अब तक विमान का मुख्य मलबा नहीं मिला है। अधिकारियों के अनुसार लगभग 7,500 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा समुद्री तल की जांच की जा चुकी है, फिर भी कोई निर्णायक सुराग हाथ नहीं लगा।

MH370 के गायब होने को अब 12 साल से ज्यादा हो चुके हैं। परिवारों को आज भी इंतजार है कि आखिर उस रात क्या हुआ था। क्या यह एक तकनीकी दुर्घटना थी? क्या विमान को जानबूझकर रास्ता बदलकर कहीं ले जाया गया? या फिर इसके पीछे कोई ऐसी साजिश थी जिसका सच अभी तक दुनिया के सामने नहीं आया? जब तक विमान का मुख्य मलबा और ब्लैक बॉक्स नहीं मिल जाता, तब तक MH370 का रहस्य दुनिया को परेशान करता रहेगा। हर नई खोज के साथ उम्मीद जगती है कि शायद इस बार वह सच सामने आ जाए, जिसने 239 लोगों को हमेशा के लिए दुनिया से छीन लिया। [SP]

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