स्वर्ण मंदिर के परिसर में एक महिला को बीड़ी पीते पकड़ा गया। धूम्रपान निषिद्ध होने के कारण कुछ सेवादारों ने पूछताछ की, और कथित तौर पर एक सेवादार ने महिला को थप्पड़ मार दिए।
महिला के साथ मौजूद बच्ची ने सिख धर्म में अपनी आस्था जताई और कहा कि उसकी माँ आतंकवादी नहीं है।
घटना सार्वजनिक होने के बाद कई लोगों ने महिला के साथ हुई मारपीट की निंदा की और इसे अनुचित व्यवहार बताया।
हाल ही में एक महिला को गुरुद्वारा के के परिसर में पीटेने की खबर तेजी से वायरल हो रही है। महिला ने हाथ जोड़कर माफी मांगने की कोशिश भी की, लेकिन महिला को चार से पाँच थप्पड़ पड़ चुके थे। यह खबर जैसे ही सार्वजनिक हुई है, लोगों ने महिला को पीटने पर कड़ी निंदा व्यक्त किया। महिला के साथ में एक बच्ची भी थी जिसने सिख धर्म में आस्था व्यक्त करने की बात कही।
दरअसल, बिहार की एक महिला, पंजाब के अमृतसर शहर के स्वर्ण मंदिर में गई थी। उस महिला को स्वर्ण मंदिर के कुछ सेवादारों ने पकड़ लिया। सेवादारों ने महिला से पूछताछ की तो पता चला कि महिला वहाँ परिसर में बीड़ी पी रही थी।
सेवादारों ने महिला से पूछा कि यहाँ धूम्रपान मना है फिर भी आप यहाँ बीड़ी क्यों पी रही हो? जवाब में महिला की छोटी सी बच्ची ने कहा कि मेरी माँ पुराने ख़यालात की है, इसलिए बीड़ी पी रही हैं। लड़की ने आगे कहा कि उसका और उसकी माँ पूरी तरीके से गुरुनानक के सिख धर्म में विश्वास है।
बच्ची ने आगे बोला कि वाहे गुरु में उन सबका विश्वास है, इसलिए उसकी मां वहाँ पर उसको लेकर आई है। लड़की ने यह भी कहा कि उसकी माँ आतंकवादी (Terrorist) नहीं है।
लेकिन इसी बीच एक सेवादार ने महिला को कई थप्पड़ लगा दिए। यह मामला तेजी से सब जगह फैला और बहुत लोगों ने महिला के प्रति सहानुभूति भी व्यक्त की। हालांकि यह मामला साल 2022 का बताया जा रहा है।
इस तरीके के मामले जब सार्वजनिक होते हैं तो समाज में महिला के दोयम दर्जे की बात सच साबित होते दिखाई देती है। एक तरफ समाज में महिलाओं को आगे बढ़ाने और बराबरी की बात की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे मामले समाज को आईना दिखाते हैं कि समाज में अभी कुछ खास बदलाव नहीं हुआ है।
फ़ेसबुक पर एक पंजाबी युवक ने इस मामले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि गुरु नानक साहब ने कभी भी इस तरीके से एक महिला को जलील करने की बात नहीं कही थी। महिला अगर बीड़ी पी भी रही थी तो उसे आराम से परिसर से बाहर जाने के लिए बोला जा सकता था।
वहीं दूसरी तरफ नारीवाद का झण्डा बुलंद करने वालों पर सवाल भी बनता है कि ऐसे मामलों पर शांत क्यों हो जाते हैं? धर्म के मूल्यों को जहां अंगीकार किया जाता है, वहाँ पर इस तरीके की गतिविधि नहीं होनी चाहिए।
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स्वर्ण मंदिर पंजाब (Panjab) के अमृतसर में स्थित है। यह गुरुद्वारा सिखों के पाँचवे सिख गुरु, गुरु अर्जुन देव ने 1588 में बनवाया था। बता दें कि गुरु अर्जुन देव ने यहीं पर अपने गुरु आदि ग्रंथ (ग्रंथ साहिब) की रचना भी की थी।
बाद में महाराज रणजीत सिंह ने 1803-1830 के बीच इस पर सोने की परत चढ़वाया था। इसके बाद से ही इस गुरुद्वारा को स्वर्ण मंदिर कहा जाने लगा। यह गुरुद्वारा सिखों के धार्मिक केंद्र के रूप में जाना जाता है।
बता दें कि सिख धर्म में गुरु गोविंद सिंह (Guru Govind Singh) ने स्पष्ट किया है कि सिखों को तंबाकू सेवन से दूर रहना है। इसलिए गुरुद्वारे के परिसर में किसी भी प्रकार के धूम्रपान का निषेध रहता है।