बलूचिस्तान संस्कृति दिवस, पाकिस्तान से अलग हो रहा बलूचिस्तान! जानें पूरी कहानी

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हर साल 2 मार्च को बलूचिस्तान सांस्कृतिक दिवस मनाया जाता है। यह सांस्कृतिक दिवस बलूचिस्तान की अस्मिता का दिवस है।
बलूचिस्तान और दूसरी तरफ बलूचिस्तान की जनता
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हर साल 2 मार्च को बलूचिस्तान सांस्कृतिक दिवस मनाया जाता है। मार्च 1948 में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्राध्यक्ष मोहम्मद अली जिन्ना ने सैन्य हस्तक्षेप करके बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा बना लिया। बलूचिस्तान के लोगों का मानना है कि यह विलय ज़बरदस्ती हुआ है।X
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  • 2 मार्च को बलूच संस्कृति दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बलूचिस्तान की भाषा, परंपरा, पोशाक, हस्तशिल्प और ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। 17वीं सदी में खानत-ए-कलात की स्थापना हुई, जिसे कई बलूच अपने ऐतिहासिक राज्य के रूप में देखते हैं।

  • 1948 में पाकिस्तान में विलय के बाद से कुछ बलूच समूह इसे ज़बरदस्ती मानते हैं और संसाधनों व राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर असंतोष जताते रहे हैं। समय-समय पर विद्रोह और आंदोलन हुए, जिनमें विभिन्न उग्रवादी संगठनों की भूमिका रही है।

  • आज भी बलूचिस्तान में राजनीतिक तनाव मौजूद है। अलगाव की संभावना पर कई तरह के अनुमान लगाए जाते हैं, लेकिन यह क्षेत्रीय राजनीति, पाकिस्तान की आंतरिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। फिलहाल स्थिति जटिल और अनिश्चित बनी हुई है।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हर साल 2 मार्च को बलूचिस्तान सांस्कृतिक दिवस मनाया जाता है। यह सांस्कृतिक दिवस बलूचिस्तान की अस्मिता का दिवस है। यह दिवस बलूचिस्तान में इसलिए मनाया जाता है कि अपनी पुरानी पहचान आधारित विरासत को नई पीढ़ी के सामने प्रदर्शित करके उनको इस विरासत से अवगत कराया जा सके। अपनी प्राचीन बालुच पहचान को मजबूत करने और एकता को बरकरार रखने के लिए ये दिवस बलूचिस्तान में मनाया जाता है।

क्या है बलूच संस्कृति, क्यों है चर्चा में 

बलूच लोगों के खानपान रहन-सहन इत्यादी बहुत प्राचीन समय के हैं और बहुत ही अनोखे हैं। इनकी अपनी भाषा है जिसे बलूची भाषा कहा जाता है। बलूची के अलावा ब्राहुई और पश्तो भी संवाद के रूप में यहाँ के लोगों द्वारा प्रयोग किया जाता है। बलूच लोगों के बीच में कढ़ाई-सिलाई, पशुपालन और हस्तशिल्प जैसी चीजें आम तौर पर प्रचलित हैं। 

बलूचिस्तान में सिंधु सभ्यता से सम्बंधित केंद्र है जो इसकी प्राचीनता को दर्शाते हैं। मध्यकाल में यह क्षेत्र कभी फ़ारसी साम्राज्य, कभी सिकंदर महान, और बाद में अरब शासकों के अधीन रहा। 7वीं और 8वीं सदी में यहाँ इस्लाम पहुँचा। बदलते समय के साथ बलूच जनजातियाँ मज़बूत हुईं और यहाँ पर स्थानीय शासन उभरा। 17वीं सदी में कलात रियासत (Khanate of Kalat) की स्थापना हुई थी।

औपचारिक रूप से 1666 ई. के आस-पास मीर अहमद ख़ान कलात ने इसकी स्थापना की थी। इसे ही बलूच लोग अपना ऐतिहासिक स्वतंत्र राज्य मानते हैं। 1876 में ब्रिटिश काल में ‘खान ऑफ कालात’ की एक संधि से बलूचिस्तान को एक रियासत के रूप में अधीनस्थ बना लिया गया था।

बलूचिस्तान क्यों पकिस्तान से अलग होना चाहता है ?

भारत जिस समय ब्रिटिश साम्राज्य से आज़ाद हुआ उस समय बलूचिस्तान ने अपने आपको एक अलग राष्ट्र घोषित किया था। कुछ समय पश्चात् मार्च 1948 में पाकिस्तान (Pakistan) के तत्कालीन राष्ट्राध्यक्ष मोहम्मद अली जिन्ना (Muhammad Ali Jinnah) ने सैन्य हस्तक्षेप करके बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा बना लिया।

बलूचिस्तान  के लोगों का मानना है कि यह विलय ज़बरदस्ती हुआ है। वहीं दूसरी तरफ़ बलूचिस्तान के बलूच नेताओं का मानना है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग केंद्र ने किया है, परन्तु पाकिस्तान की राजनीति में बलूचिस्तान के लोगों को हाशिये पर रख दिया गया है।

बलूचिस्तान -पाकिस्तान संघर्ष 

बलूचिस्तान में समय-समय पर पाकिस्तान के विरोध में स्वर उठते रहे हैं। लेकिन बड़े आंदोलनों की बात की जाए तो उसमें 1948 के बाद 1963 में शेर मोहम्मद मर्री के नेतृत्व में गुरिल्ला युद्ध, 1973 में नवाब अकबर बुगती, खैर बख्श मर्री जैसे नेताओं की अगुवाई में संघर्ष और 2004 के आंदोलनों का ज़िक्र प्रमुखता से किया जाता है।

बलूचिस्तान (Balochistan) में इस तरीके के आंदोलनों को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA), बलूच रिपब्लिकन आर्मी (BRA), तथा बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) इत्यादि प्रकार के संगठन संचालित करते हैं।

यह भी पढ़ें :पाकिस्तान के हाथ से निकल जाएगा बलूचिस्तान, रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ का कबूलनामा

क्या बलूचिस्तान हो सकता है पाकिस्तान से अलग 

दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वर्तमान की वैश्विक राजनीति में उथल-पुथल मचा रखा है। शीत युद्ध की समाप्ति और USSR विघटन के पश्चात , बदले हुए वैश्विक व्यवस्था में, अमेरिका का प्रभुत्व स्थापित हुआ।

अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अलग-अलग कारणों से कई बार हस्तक्षेप किया। साल 2003 में इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के खिलाफ अमेरिका का इराक में हस्तक्षेप करना, हाल ही में ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई को 1 मार्च 2026 को मार देना, यह इशारा करता है कि अमेरिका अपने हितों को संरक्षित करने के लिए अब अपनी पूरी शक्ति का पूरा इस्तेमाल कर सकता है।

दूसरी तरफ पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने (Khawaja Muhammad) 2 फरवरी 2026 को पाकिस्तान की संसद मजलिस-ए-शूरा में अपने भाषण के दौरान कहा था कि पाकिस्तान के हाथ से बलूचिस्तान निकल रहा है। अब बलूचिस्तान पर पाकिस्तान का नियंत्रण कमजोर होता जा रहा है। उनका कहना था कि बलूच आर्मी, पाकिस्तान की सेना से भी अधिक हाईटेक हो गई है। बलूच सेना में हर एक विद्रोही लगभग 20,000 डॉलर के पूरे कॉम्बैट गियर पैकेज से सुसज्जित है।

पाकिस्तान फिलहाल वैश्विक व्यवस्था में अमेरिका के खेमे में है। जिस दिन पाकिस्तान, अमेरिका के खेमे से हटने की कोशिश किया, हो सकता है बलूचिस्तान की जनता की मांग पर अमेरिका, बलूचिस्तान में हस्तक्षेप करे।

विद्रोह तीव्र होने पर पाकिस्तान (Pakistan) को शक होगा कि यह सब भारत की तरफ से हो रहा है और पाकिस्तान, भारतीय सीमा पर आक्रमण करने की गलती कर सकता है। भारत की तरफ से जवाबी हमले में जैसा कि पहले कई बार पाकिस्तान (Pakistan) परास्त हुआ है, इस बार भी परास्त हो जाएगा। इसके बाद बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग हो जाएगा, यह अनुमान शायद सही साबित हो जाए। 

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