दिल्ली वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) के प्रथम चरण की प्रक्रिया के बाद 31 अगस्त को जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कई खामियां पाई गईं। इस लिस्ट के आधार पर चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा 33.1 लाख से अधिक लोगों को नोटिस भेजा गया है। नोटिस भेजने का मुख्य कारण इन लोगों के पिछले SIR रिकॉर्ड से डेटा का लिंक न हो पाना है। इस लिस्ट में कई बड़े चेहरे भी शामिल हैं, जैसे कांग्रेस के सीनियर नेता व सांसद कपिल सिब्बल, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, विदेश सचिव विक्रम मिस्री, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी (L.K. Advani), विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) और चुनाव आयुक्त एसएस संधू। जानिए पूरा मामला!
न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई सूची में कांग्रेस के सीनियर नेता व सांसद कपिल सिब्बल (Kapil Sibal), कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhvi) और विदेश सचिव विक्रम मिस्री (Vikram Misri) के भी नाम हैं। इन सभी नेताओं को वोटर लिस्ट रिकॉर्ड सत्यापन के लिए नोटिस भेजा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसएस संधू के मामले में वोटर लिस्ट में उनके नाम की स्पेलिंग गलत होने के कारण नोटिस भेजा गया है। वहीं, कपिल सिब्बल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री के नाम भी पुराने SIR दस्तावेज़ के डेटा से भिन्न हैं। इसके साथ ही कई अन्य नेताओं को भी नोटिस भेजा गया है।
SIR का अर्थ 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (special intensive revision) है। यह चुनाव आयोग द्वारा संचालित किया जाने वाला एक अभियान है, जिसके तहत वोटर लिस्ट को सटीक और स्पष्ट बनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य 18 वर्ष के नए मतदाताओं का नाम जोड़ना, घर बदल चुके लोगों या मृत लोगों के नाम हटाना और गलत जानकारियों (जैसे नाम की स्पेलिंग, पता या अन्य गड़बड़ियों) में सुधार करना है। इसके साथ ही, वोटर लिस्ट में पारदर्शिता बनाए रखना और फर्जी व दोहरे वोटों को सूची से हटाना भी इसका उद्देश्य है।
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चुनाव आयोग (Election Commission) का यह नोटिस वोटर लिस्ट के सत्यापन और रिकॉर्ड की दुरुस्ती के लिए जारी किया गया है, न कि नाम हटाने के लिए। स्पेलिंग में अंतर या पिछले SIR रिकॉर्ड से नाम न मिलने के कारण कई राजनीतिक व प्रशासनिक हस्तियों को भी यह नोटिस मिला है। आयोग ने जून 2025 में इसकी शुरुआत बिहार से की थी। दूसरे चरण (अक्टूबर 2025 – अप्रैल 2026) में इसे UP, MP, राजस्थान, बंगाल और तमिलनाडु सहित 9 राज्यों व 3 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया। फिलहाल तीसरे चरण (2026) में ओडिशा, हरियाणा, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश समेत 16 राज्यों व 3 केंद्र शासित प्रदेशों में यह जांच अभियान जारी है।(VR/MK)
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