"मेरे पति यहाँ काम करते हैं..." पीएम हाउस की पार्टी में जब इस महिला ने दी अपनी पहचान, तो मच गया हड़कंप!

भारतीय राजनीति के इतिहास में डॉ. मनमोहन सिंह का नाम न केवल एक अर्थशास्त्री और कुशल प्रधानमंत्री के रूप में दर्ज है, बल्कि उन्हें उनकी अगाध विनम्रता और सादगी के लिए भी जाना जाता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनके जीवन से जुड़ा एक पुराना किस्सा पुनः चर्चा में है, जो यह दर्शाता है कि सत्ता के शिखर पर पहुँचने के बाद भी इस परिवार ने अपनी जड़ों और सहजता को कभी नहीं छोड़ा।
वहाँ उपस्थित अन्य महिलाओं को लगा कि शायद यह महिला किसी छोटे कर्मचारी के परिवार से है जो गलती से यहाँ आ गई है। जिज्ञासा और थोड़े अभिमान के साथ कुछ महिलाओं ने उनके पास जाकर उनका परिचय पूछा। उस महिला ने बड़ी सहजता से उत्तर दिया, "मेरे पति यहाँ काम करते हैं।"
भारतीय राजनीति के इतिहास में डॉ. मनमोहन सिंह का नाम न केवल एक अर्थशास्त्री और कुशल प्रधानमंत्री के रूप में दर्ज है, बल्कि उन्हें उनकी अगाध विनम्रता और सादगी के लिए भी जाना जाता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनके जीवन से जुड़ा एक पुराना किस्सा पुनः चर्चा में है, जो यह दर्शाता है कि सत्ता के शिखर पर पहुँचने के बाद भी इस परिवार ने अपनी जड़ों और सहजता को कभी नहीं छोड़ा।Wikimedia Commons
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भारतीय राजनीति के इतिहास में डॉ. मनमोहन सिंह का नाम न केवल एक अर्थशास्त्री और कुशल प्रधानमंत्री के रूप में दर्ज है, बल्कि उन्हें उनकी अगाध विनम्रता और सादगी के लिए भी जाना जाता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनके जीवन से जुड़ा एक पुराना किस्सा पुनः चर्चा में है, जो यह दर्शाता है कि सत्ता के शिखर पर पहुँचने के बाद भी इस परिवार ने अपनी जड़ों और सहजता को कभी नहीं छोड़ा।

एक अविस्मरणीय किस्सा: "मेरे पति यहाँ काम करते हैं"

यह वाकया एक आधिकारिक भोज (Dinner) के दौरान का है, जो प्रधानमंत्री (Prime Minister Manmohan Singh) के सम्मान में आयोजित किया गया था। इस भव्य कार्यक्रम में देश के बड़े-बड़े अधिकारी और उनकी पत्नियाँ महंगे परिधानों और गहनों से सुसज्जित होकर पहुँची थीं। इसी चकाचौंध के बीच, एक कोने में बेहद साधारण कपड़ों में एक महिला बैठी शांति से अपना भोजन कर रही थीं।

वहाँ उपस्थित अन्य महिलाओं को लगा कि शायद यह महिला किसी छोटे कर्मचारी के परिवार से है जो गलती से यहाँ आ गई है। जिज्ञासा और थोड़े अभिमान के साथ कुछ महिलाओं ने उनके पास जाकर उनका परिचय पूछा। उस महिला ने बड़ी सहजता से उत्तर दिया, "मेरे पति यहाँ काम करते हैं।"

जवाब सुनकर अधिकारियों की पत्नियों को लगा कि उनका शक सही है। एक महिला ने थोड़ा रौब दिखाते हुए दोबारा पूछा, "साफ-साफ बताइए, आपके पति आखिर किस पद पर हैं?" महिला ने मुस्कुराते हुए विनम्रता से कहा, "जी, वे प्रधानमंत्री के पद पर कार्य करते हैं।"

यह सुनते ही वहाँ सन्नाटा पसर गया। जो महिलाएं कुछ क्षण पहले उन्हें तिरस्कार की दृष्टि से देख रही थीं, वे शर्मिंदा हो गईं। श्रीमती गुरशरण कौर की थाली में रोटी लाने के लिए उन महिलाओं के बीच होड़ मच गई, लेकिन सादगी की मिसाल पेश करते हुए श्रीमती सिंह ने उन्हें धन्यवाद दिया और स्वयं अपना भोजन लेने के लिए उठ खड़ी हुईं। यह किस्सा आज भी भारतीय राजनीति में "सहजता के अनुयायियों" की कमी और पद की गरिमा के साथ विनम्रता बनाए रखने की सीख देता है।

डॉ. मनमोहन सिंह: बचपन और संघर्ष के दिन

डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर, 1932 को पंजाब के 'गाह' गांव (जो अब पाकिस्तान में है) में एक गरीब सिख परिवार में हुआ था। उनका बचपन बेहद संघर्षपूर्ण रहा। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने अपनी माँ को खो दिया था और उनका पालन-पोषण उनकी दादी ने किया। उनके गांव में बिजली नहीं थी, इसलिए वे रात में केरोसिन के दीये या सड़क की लाइट के नीचे बैठकर पढ़ाई किया करते थे।

विभाजन के दौरान उनका परिवार भारत आ गया और अमृतसर में बस गया। आर्थिक तंगी के बावजूद, उनके मन में ज्ञान की जो लौ जल रही थी, उसने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया।

शिक्षा: प्रतिभा का वैश्विक परिचय

मनमोहन सिंह की शैक्षणिक यात्रा किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से अपनी स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की, जहाँ उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके बाद वे अपनी आगे की पढ़ाई के लिए ब्रिटेन चले गए। उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के सेंट जॉन्स कॉलेज से अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी के साथ ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की और बाद में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी.फिल (पीएचडी) की उपाधि हासिल की। उनकी विद्वत्ता का लोहा दुनिया भर के अर्थशास्त्री मानते हैं।

विवाह और श्रीमती गुरशरण कौर का साथ

डॉ. मनमोहन सिंह का विवाह 1958 में श्रीमती गुरशरण कौर (Gursharan Kaur) से हुआ। यह एक पारंपरिक विवाह था, लेकिन दोनों का साथ वैचारिक रूप से बहुत मजबूत रहा। गुरशरण कौर स्वयं एक प्रबुद्ध महिला रही हैं और उन्होंने मनमोहन सिंह के सार्वजनिक जीवन के उतार-चढ़ाव में एक चट्टान की तरह उनका साथ दिया। उनकी तीन बेटियाँ हैं उपेंदर, दमन और अमृत। पूरा परिवार लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करता है और अपनी बौद्धिक क्षमताओं के बल पर समाज में योगदान दे रहा है।

श्रीमती गुरशरण कौर के बारे में कुछ रोचक बातें:

सांस्कृतिक रुचि: उन्हें कीर्तन और संगीत का बहुत शौक है। प्रधानमंत्री आवास में रहने के दौरान भी वे अक्सर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहती थीं।

सादगी का पालन: वे अक्सर विदेश दौरों पर भी भारतीय वेशभूषा (साधारण सूट या साड़ी) में ही नजर आती थीं और कभी भी दिखावे का हिस्सा नहीं बनीं।

स्वावलंबन: प्रधानमंत्री की पत्नी होने के बावजूद वे अपने छोटे-छोटे काम स्वयं करना पसंद करती थीं और स्टाफ के साथ उनका व्यवहार हमेशा एक परिवार के सदस्य जैसा रहा।

करियर: एक नौकरशाह से प्रधानमंत्री तक

डॉ. मनमोहन सिंह का करियर एक शिक्षक के रूप में शुरू हुआ, लेकिन उनकी प्रतिभा ने उन्हें नीति-निर्माण के गलियारों तक पहुँचा दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) में काम किया l 

आरबीआई गवर्नर (1982-1985): उन्होंने भारतीय बैंकिंग प्रणाली में कई सुधार किए।

वित्त मंत्री (1991): पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने एलपीजी (Liberalization-उदारीकरण, Privatization-निजीकरण और Globalization-वैश्वीकरण) की शुरुआत की, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा बदल दी।

प्रधानमंत्री (2004-2014): उन्होंने लगातार दो कार्यकाल तक भारत का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल के दौरान आरटीआई (RTI), मनरेगा (MGNREGA) और भारत-अमेरिका परमाणु समझौता जैसे ऐतिहासिक कदम उठाए गए।

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वहाँ उपस्थित अन्य महिलाओं को लगा कि शायद यह महिला किसी छोटे कर्मचारी के परिवार से है जो गलती से यहाँ आ गई है। जिज्ञासा और थोड़े अभिमान के साथ कुछ महिलाओं ने उनके पास जाकर उनका परिचय पूछा। उस महिला ने बड़ी सहजता से उत्तर दिया, "मेरे पति यहाँ काम करते हैं।"
Dr Manmohan Singh की जर्नी कैसी रही?

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