सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के द्वारका नारकोटिक्स सेल पर छापा मारकर ₹48 लाख बरामद किए। केस रफा-दफा करने के नाम पर रिश्वत लेते कॉन्स्टेबल अजय रंगे हाथों पकड़ा गया, जबकि मुख्य आरोपी इंस्पेक्टर सुभाष यादव अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गया, जिसे 20 दिन बाद गिरफ्तार किया गया। सुभाष यादव पर ₹100 करोड़ की बेनामी संपत्ति का आरोप है। इस मामले में आईपीएस अफसरों की संलिप्तता की रिपोर्ट पीएमओ भेजने के बाद, शीर्ष अधिकारी मधुप तिवारी और रविन्द्र यादव का दिल्ली से अचानक तबादला कर दिया गया है।
दिल्ली पुलिस विभाग से इस वक्त एक बहुत बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पुलिस विभाग के एक इंस्पेक्टर के पास से लगभग 48 (कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक 50 लाख रुपए) बरामद किया है। भ्रष्टाचार का यह संगीन मामला जैसे ही प्रकाश में आया है, वैसे ही सरकारी विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर फिर से उँगलियाँ उठने लगी हैं। इस घटना ने एक बार फिर खाकी वर्दी को दागदार किया है और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
दरअसल, यह पूरा मामला दिल्ली पुलिस की नारकोटिक्स सेल के भीतर चल रहे कथित काले कारनामों से जुड़ा हुआ है। सीबीआई की एक विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए बीते 22 अप्रैल 2026 को द्वारका सेक्टर-16 स्थित नारकोटिक्स सेल के दफ्तर से लगभग 48 लाख (कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक 50 लाख) रुपये की भारी-भरकम राशि बरामद की। भ्रष्टाचार का यह मामला उस वक्त पूरी तरह प्रकाश में आया जब सीबीआई की टीम अचानक रेड करने सेल के दफ्तर पहुँची। सीबीआई को देखते ही नारकोटिक्स सेल के दफ्तर का इंचार्ज इंस्पेक्टर सुभाष यादव वहाँ से आनन-फानन में फरार हो गया। विभाग और सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, फरार इंस्पेक्टर लंबे समय से अवैध गतिविधियों और काले धंधे में संलिप्त था। हालांकि, वह बहुत दिनों तक कानून की गिरफ्त से दूर नहीं रह सका। बाद में इंस्पेक्टर सुभाष यादव को सीबीआई की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद धर दबोचा और बीते 12 मई 2026 को उसे सीबीआई की विशेष अदालत में कानूनी कार्रवाई के लिए पेश किया गया था।
इस पूरे घटनाक्रम की गहराई में जाएं तो दरअसल, यह पूरा मामला उत्तम नगर इलाके से जुड़ा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, नारकोटिक्स सेल दिल्ली में तैनात पुलिस अधिकारियों ने उत्तम नगर की रहने वाली एक महिला के घर पर अचानक छापेमारी की थी। इस छापेमारी के दौरान महिला के घर से नशीला पदार्थ यानी गाँजा बरामद हुआ था। पीड़ित महिला की शिकायत के अनुसार, इसके बाद वहां मौजूद पुलिस वालों ने केस को रफा-दफा करने के एवज में पंद्रह लाख रुपये की रिश्वत की मोटी रकम मांग ली और बोले कि अगर यह रकम दे दी जाएगी तो केस को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।
पुलिस के इस दबाव के बाद पीड़ित महिला ने सूझबूझ दिखाई और मामले की शिकायत लेकर सीबीआई की मदद ली और वहाँ तक अपनी पूरी बात पहुंचाई। जानकारी के अनुसार, सीबीआई ने महिला को एक सोची-समझी रणनीति के तहत कहा कि वह पंद्रह लाख रुपये की मांग को स्वीकार कर उनके पास जाए, ताकि अधिकारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया जा सके। महिला जैसे ही पुलिस वालों के पास पहली किश्त के रूप में 2 लाख रुपये लेकर गई, वहां पहले से जाल बिछाकर बैठी सीबीआई ने रंगे हाथों कार्रवाई करते हुए मौके पर तैनात कॉन्स्टेबल अजय को धर दबोचा।
इसके तुरंत बाद नारकोटिक्स सेल के दफ्तर में एक अजीबोगरीब वाकया हुआ। कॉन्स्टेबल की गिरफ्तारी के बाद थोड़ी देर के लिए पूरे ऑफिस में अचानक अंधेरा छा गया, क्योंकि दफ्तर की बिजली कट गई थी। इसी अचानक छाए अंधेरे का फायदा उठाकर मुख्य आरोपी इंस्पेक्टर सुभाष यादव वहाँ से भागने में सफल रहा और फरार हो गया। इसके बाद सीबीआई ने पीछे न हटते हुए लगभग 20 दिनों का एक सघन खोजी अभियान चलाया, जिसके तहत आखिरकार इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया। तत्पश्चात, 12 मई 2026 के दिन इंस्पेक्टर सुभाष को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया।
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इस पूरे संवेदनशील मामले से संबंधित विस्तृत जानकारी और गोपनीय रिपोर्ट को अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) भेज दिया गया है। इस रिपोर्ट में यह बेहद चौंकाने वाला दावा किया गया है कि इस अवैध धंधे और उगाही तंत्र में बहुत सारे आईपीएस (IPS) स्तर के बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ, इस कार्रवाई के बाद से ही दिल्ली पुलिस महकमे में तबादलों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में वरिष्ठ अधिकारी मधुप तिवारी का तबादला कर दिया गया और उन्हें अरुणाचल प्रदेश भेज दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, एलओ (LO) रवींद्र यादव को भी स्थानांतरित करते हुए डीजीपी (DGP) अंडमान बना दिया गया है।
अचानक हुए इन बड़े फेरबदल के बाद अब यह पूरा मामला एक नया तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। कई मीडिया रिपोर्ट्स और अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, आरोपी इंस्पेक्टर सुभाष यादव के पास 100 करोड़ रुपये से भी ऊपर की बेनामी संपत्ति होने का अनुमान है, जिसे कथित तौर पर अवैध तरीके से अर्जित किया गया था। मामले के कई आलोचकों और जानकारों का स्पष्ट कहना है कि इस पूरे सिंडिकेट में बड़े आलाकमान और उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल थे, और इसी वजह से अपनी साख बचाने के लिए तबादले का खेल जारी है। इसके विपरीत, प्रशासनिक महकमे ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा है कि ये तबादले पूरी तरह से एक सामान्य और रूटीन प्रक्रिया हैं, जो समय-समय पर प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए होती रहती हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
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