पंकज अग्रवाल हरियाणा सरकार में वास्तुकला विभाग में प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत थे। सेवा में रहते हुए उन्होंने लगभग 60.54 करोड़ रुपये का घोटाला किया। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने आईएएस पंकज अग्रवाल को 22 जून 2026 की रात को चंडीगढ़ स्थित उनके आवास से हिरासत में ले लिया।  X
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साल 2026 में अब तक इन 6 महा-भ्रष्ट बाबूओं ने पार की सारी हदें! ब्यूरोक्रेसी का गंदा खेल देख खौल उठेगा आपका खून!

देश में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामले में चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की जांच चर्चे में हैं। हरियाणा के पंकज अग्रवाल को 60.54 करोड़ के घोटाले में सीबीआई ने हिरासत में लिया है, जबकि बिहार के योगेश कुमार ठेकेदार से सांठगांठ के आरोप में निलंबित हैं।

Author : Pradeep Yadav

  • देश में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामले में चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जांच के मामले चर्चे में हैं। हरियाणा के पंकज अग्रवाल को 60.54 करोड़ के घोटाले में सीबीआई ने हिरासत में लिया है, जबकि बिहार के योगेश कुमार ठेकेदार से सांठगांठ के आरोप में निलंबित हैं। वहीं राजस्थान के मेघराज सिंह रतनू पर आय से 73 गुना अधिक संपत्ति और गुजरात के के. राजेश पर रिश्वत व मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई हुई है।

देश की प्रशासनिक व्यवस्था और नौकरशाही से जुड़े लोगों के भ्रष्टाचार बाहर निकलकर आ रहे हैं। भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग के अलग-अलग मामलों में देश के विभिन्न राज्यों के चार वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य सरकारों का शिकंजा कस गया है। आइए इनके बारे में समझते हैं

पहले बात करते हैं पंकज अग्रवाल की। पंकज अग्रवाल हरियाणा सरकार में वास्तुकला विभाग में प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत थे। सेवा में रहते हुए उन्होंने लगभग 60.54 करोड़ रुपये का घोटाला किया। उनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने आईडीएफसी (IDFC) और एयू (AU) स्मॉल फाइनेंस बैंक का सहारा लेकर इस पूरी घटना को अंजाम दिया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने आईएएस पंकज अग्रवाल को 22 जून 2026 की रात को चंडीगढ़ स्थित उनके आवास से हिरासत में ले लिया। पंकज अग्रवाल के ऊपर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग कर वित्तीय अनियमितता की।

मूल रूप से झारखंड के रहने वाले पंकज अग्रवाल साल 2000 बैच के आईएएस अधिकारी (IAS Officer) हैं। बता दें कि साल 2024 में पंकज अग्रवाल मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer - CEO) भी रह चुके हैं। साल 2025 के राज्यसभा चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर (Returning Officer) के रूप में सेवा दे चुके हैं। जून 2025 से मार्च 2026 तक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में प्रधान सचिव के रूप में सेवा दे चुके हैं। साल 2018 से 2022 तक हरियाणा राज्य परिवहन में परिवहन आयुक्त के रूप में सेवा दे चुके हैं।

बिहार में IAS योगेश कुमार को 30 मई 2026 को निलंबित कर दिया गया। योगेश कुमार के ऊपर आरोप है कि उन्होंने रिशु श्री की मुख्य कंपनी 'रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज' (Reliable Infra Services) को लगभग 125 करोड़ रुपये का टेंडर पास कराने में फायदा पहुँचाया।

बिहार में IAS योगेश कुमार का निलंबन

बिहार में IAS योगेश कुमार को 30 मई 2026 को निलंबित कर दिया गया। बता दें कि वे समाज कल्याण विभाग में निदेशक (दिव्यांगजन सशक्तिकरण/Disability) के पद पर तैनात थे। दरअसल, रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री के घर ईडी ने छापेमारी की तो पता चला कि ठेकेदार बहुत सारे सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देता था। 27 मई 2026 को रिशु श्री ठेकेदार के घर छापेमारी हुई और 28 मई 2026 को उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। जांच में सामने आया कि ठेकेदार और योगेश के बीच सांठगांठ थी। 22 जून 2024 से 30 जून 2024 के बीच योगेश का परिवार यूरोप (ऑस्ट्रिया) गया हुआ था जिनका खर्च ठेकेदार ने अपनी तरफ से किया। योगेश कुमार ने रिशु श्री की मुख्य कंपनी 'रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज' (Reliable Infra Services) को लगभग 125 करोड़ रुपये का टेंडर पास कराने में फायदा पहुँचाया।

मेघराज सिंह रतनू साल 2010 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस (IAS) अधिकारी हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज FIR में बताया गया है कि उन्होंने अपनी आय से 73 गुना अधिक संपत्ति इकट्ठा कर ली है। मेघराज सिंह रतनू को मई 2026 में निलंबित किया जा चुका है।

मेघराज सिंह रतनू का निलंबन

मेघराज सिंह रतनू साल 2010 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस (IAS) अधिकारी हैं। आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets - DA) अर्जित करने और सहकारिता विभाग में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के मामले में उनके ऊपर आरोप लग रहे हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज FIR में बताया गया है कि उन्होंने अपनी आय से 73 गुना अधिक संपत्ति इकट्ठा कर ली है। मेघराज सिंह रतनू जब मई 2023 से जनवरी 2024 तक सहकारिता विभाग में रजिस्ट्रार के पद पर थे, उनके ऊपर आरोप हैं कि इस दौरान राज्य की सैकड़ों कोऑपरेटिव सोसायटियां उनके पास आती थीं जिनसे विशेष सेवा वसूला जाता था जो भ्रष्टाचार का प्रतीक बना। हालांकि मेघराज सिंह रतनू को मई 2026 में निलंबित किया जा चुका है।

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के. राजेश (K. Rajesh) साल 2011 बैच गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। 6 अगस्त 2022 को ईडी ने इन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया। ईडी ने पाया कि इस पूरे मामले में 3 करोड़ रुपये से अधिक का घपला हुआ है। फिलहाल साबरमती सेंट्रल जेल (Sabarmati Central Jail) में बंद के. राजेश (K. Rajesh) की जमानत याचिका को गुजरात हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

के. राजेश (K. Rajesh)

के. राजेश (K. Rajesh) साल 2011 बैच गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। इनकी सुर्खियां तब बनीं जब इनको सीबीआई (CBI) ने जुलाई 2022 में अवैध रूप से हथियार लाइसेंस जारी करने के बदले रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। 6 अगस्त 2022 को ईडी ने इन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया। ईडी ने पाया कि इस पूरे मामले में 3 करोड़ रुपये से अधिक का घपला हुआ है। 4 अक्टूबर 2022 को अहमदाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में औपचारिक चार्जशीट (Prosecution Complaint) दायर हुई। के. राजेश (K. Rajesh) ने जेल से बाहर निकलने की पूरी कोशिश की लेकिन बाहर नहीं निकल सके। फिलहाल साबरमती सेंट्रल जेल (Sabarmati Central Jail) में बंद के. राजेश (K. Rajesh) की जमानत याचिका को गुजरात हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया।

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