मैथ्यू वैनडाइक संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (SOLI) नामक संस्था का संस्थापक है, जो दुनिया भर में विद्रोहियों को मुफ्त सैन्य प्रशिक्षण देती है।  X
राष्ट्रीय

भारत में छिपकर साजिश रच रही थी CIA! जानें कौन है मैथ्यू वैनडाइक, जिसे NIA ने कोलकाता से दबोचा ?

13 मार्च 2026 को NIA ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिकों को कोलकाता, दिल्ली और लखनऊ से गिरफ्तार किया। इन पर आरोप है कि ये बिना अनुमति मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों से म्यांमार गए और वहां के विद्रोही समूहों को यूरोपीय ड्रोन तकनीक और युद्ध का प्रशिक्षण दे रहे थे।

Author : Pradeep Yadav

  • 13 मार्च 2026 को NIA ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिकों को कोलकाता, दिल्ली और लखनऊ से गिरफ्तार किया। इन पर आरोप है कि ये बिना अनुमति मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों से म्यांमार गए और वहां के विद्रोही समूहों को यूरोपीय ड्रोन तकनीक और युद्ध का प्रशिक्षण दे रहे थे।

  • मैथ्यू वैनडाइक संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (SOLI) नामक संस्था का संस्थापक है, जो दुनिया भर में विद्रोहियों को मुफ्त सैन्य प्रशिक्षण देती है। वह पहले लीबिया में गद्दाफी के खिलाफ लड़ने और इराक में ISIS के विरुद्ध ईसाइयों को ट्रेनिंग देने के लिए सुर्खियों में रहा है।

  • NIA को अंदेशा है कि वैनडाइक का समूह भारत के उत्तर-पूर्वी उग्रवादियों के साथ मिलकर क्षेत्र में अशांति फैलाने का बड़ा षड्यंत्र रच रहा था।

भारतीय जांच एजेंसी ने 13 मार्च 2026 को अमेरिका के मैथ्यू वैनडाइक (Matthew VanDyke) नामक शख्स को कोलकाता से गिरफ्तार किया है। उसके साथ 6 अन्य यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया। मैथ्यू वैनडाइक बिना किसी परमिशन के मिजोरम में प्रतिबंधित इलाकों से होते हुए म्याँमार जा रहा था। उत्तर पूर्व क्षेत्र में एक नई अशान्ति को जन्म देने की कोशिश की जा रही थी। ये सभी आरोपी वीजा पर भारत में आए थे।

इन्होंने अवैध रूप से म्यांमार सीमा पार में  और वहां के विद्रोही समूहों से संपर्क किया। एनआईए को शंका है कि इनके तार भारत के पूर्वोत्तर (Northeast) में सक्रिय उग्रवादियों से भी जुड़े हो सकते हैं और वैनडाइक का ग्रुप विद्रोहियों को ट्रेनिंग दे रहा था और वह  यूरोप से लाए गए आधुनिक ड्रोन का इस्तेमाल करना सिखा रहा था।

कौन है  मैथ्यू वैनडाइक ?

मैथ्यू वैनडाइक (Matthew VanDyke) मूल रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के मैरीलैंड (Maryland) राज्य में बाल्टीमोर शहर का रहने का वाला है। मैथ्यू वैनडाइक ने अपनी परास्नातक (Post Graduation) की पढ़ाई जार्जटाउन विश्वविद्यालय से की है। पढ़ाई के दरमियान ही  मैथ्यू वैनडाइक ने सीआईए (CIA) में भर्ती होने के लिए प्रयास किया था। लेकिन अंतिम चरण में सफलता हासिल नहीं हुई। 

इसके बाद वह साल 2011 में तब सुर्खियों में आया था जब उसे लीबिया में गिरफ्तार किया गया। दरअसल, यह आरोप था गद्दाफ़ी की सरकार के खिलाफ विद्रोहियों को भड़काने में मैथ्यू वैनडाइक भी शामिल था। उस समय इसे एक आतंकवादी घोषित किया गया था। 

खुद का संगठन बनाया है मैथ्यू ने 

मैथ्यू वैनडाइक ने साल 2014 में संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (Sons of Liberty International - SOLI) नामक संगठन की स्थापना की थी। इसने अपने संगठन को नॉन-प्रॉफिट मिलिट्री कॉन्ट्रैक्टिंग फर्म (Non-profit Military Contracting Firm) बताया था। इस संस्था की स्थापना करके मैथ्यू वैनडाइक ने इसे आइएसाइएस के खिलाफ इराक में ईसाइयों के लिए प्रशिक्षण का एक माध्यम बनाया।

इस संस्था का उद्देश्य यह बताया गया कि दुनिया के किसी भी हिस्से में कोई भी तानाशाही सरकार हो, उसके खिलाफ लड़ाई लड़ रहे लोगों को मुफ़्त में प्रशिक्षण मुहैया कराया जाएगा। मैथ्यू वैनडाइक की यह संस्था अलग-अलग समय पर अलग-अलग जगहों पर सक्रिय रूप में देखी गई है। हाल ही मे रूस-यूक्रेन युद्ध के समय भी इस संस्था की सक्रियता देखी गई थी। रूस के खिलाफ यूक्रेन की मदद की गई थी। 

यह भी पढ़ें : डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को फंसा दिया, राष्ट्रपति की इन 5 गलतियों के चलते ईरान जंग में बुरी तरह फंसे 'अंकल सैम' !

भारत के लिए खतरा !

मैथ्यू वैनडाइक के साथ में तीन यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ से और तीन अन्य को दिल्ली से पकड़ा गया। एनआईए (NIA) का मानना है कि ये लोग पहले तो मिजोरम के उस इलाके में गए जहां पर जाने लिए भारतीयों को भी इजाजत लेनी पड़ती है।

इसके बाद इनके संबंध म्यांमार में विद्रोहियों से हैं जो उत्तर पूर्व में भारत के लिए एक खतरा बने हुए हैं। हाल ही में बांग्लादेश के युवक ने कहा भी था कि भारत के उत्तर पूर्व के राज्यों को अलग करने में ज्यादा देर नहीं लगेगा।

बांग्लादेश (Bangladesh) के तख्तापलट में भी कुछ हद तक अमेरिका के अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप की बात शंका के तौर पर की जा रही थी। अगर ऐसी संभावना है कि भारत के उत्तर पूर्व के राज्यों में कोई भारी षड्यन्त्र की तैयारी चल रही है तो भारत को इस मामले में पहले से ज्यादा सतर्क होने की जरूरत है। फिलहाल एनआईए को कोर्ट से 11 दिन का समय मिल है कि सारे सबूत इकट्ठे किये जाएं और जांच पड़ताल किये जाएं। अगली सुनवाई 27 मार्च को सुनिश्चित है।

यह भी देखें :